क्या है तलाक-ए-हसन, जिसने बर्बाद की हिना-जरीना की जिंदगी:दहेज-मारपीट के खिलाफ बोला तो लेटर लिखकर तलाक, शिकायत पर काजी बोला- कुत्ते की औलाद

📅 Published: December 21, 2025 | 📂 Category: India National

‘पति ने मुझे बंगाल से सीधा तलाक का पहला खत भेज दिया। जबकि पहले सुलह का नोटिस आना चाहिए। हमने दूसरे और तीसरे महीने आया तलाक का खत भी रिसीव नहीं किया। फिर भी उधर से कह दिया गया कि तलाक-ए-हसन हो गया। तलाक के पेपर में मेरी बेटी का जिक्र तक नहीं। न कोई मेंटेनेंस, न मेहर की रकम की बात।’ झारखंड की रहने वाली हिना 2018 से एकतरफा तलाक के खिलाफ कोर्ट में केस लड़ रही हैं। उनका आरोप है कि तलाक शरिया कानून के मुताबिक नहीं हुआ। क्योंकि तलाक-ए-हसन की 4 शर्तें होती हैं, जो उनके तलाक में पूरी नहीं की गईं। इसे लेकर जब उन्होंने तलाक कराने वाले काजी से शिकायत की तो जवाब मिला- तुम कुत्ते की औलाद हो। मुंबई की जरीना की भी ऐसी ही कहानी है। तीन तलाक पर प्रतिबंध के बाद से अब मुस्लिम महिलाएं तलाक-ए-हसन से परेशान हैं। दैनिक भास्कर ने इसका सामना कर रही हिना और जरीना से बात की। दोनों की कहानियां मिलती-जुलती हैं। पहले निकाह, फिर दहेज की मांग, घरेलू हिंसा और फिर पति ने खत भेजकर तलाक दे दिया। अलग-अलग शहरों में रहने वाली इन महिलाओं के नाम से एक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में PIL लगाई है। 19 नवंबर को कोर्ट ने तलाक-ए हसन का नाम लेकर एक जर्नलिस्ट हिना बेनजीर के हक में फैसला सुनाया तो इन महिलाओं की भी उम्मीद जागी है। पढ़िए इनकी आपबीती… सबसे पहले हिना की कहानी…
तलाक पर उठाए सवाल तो काजी बोला- तुम कुत्ते की औलाद
36 साल की हिना की शादी 2015 में हुई और 2018 में तलाक हो गया। इस बीच एक बेटी हुई। खत के जरिए उनका तलाक-ए-हसन हुआ। हिना कोर्ट गईं, जहां से मेंटेनेंस का ऑर्डर भी पास कर दिया गया। बावजूद इसके अब तक पति ने एक पैसा नहीं दिया। वो कहती हैं, ‘तलाक के खत में लिखे पते पर हमने फोन करके काजी हकीम अब्दुल अजीज से कॉन्टैक्ट किया। उन्होंने ही हमारा तलाक करवाया था। जब मैंने कहा कि हम तो झारखंड के रहने वाले हैं, हमारा ज्यूरिसडिक्शन कलकत्ता है ही नहीं, फिर आपने वहां से कैसे तलाक करवा दिया। इस पर काजी हकीम भड़़क गए और कहने लगे- ‘तुम कुत्ते की औलाद हो, जाओ कोर्ट में अपने बाप के पास जाकर ठीक करवा लो।’ हिना कहती हैं कि वो और उनके पति दोनों झारखंड के रहने वाले हैं। पति दिल्ली में जॉब करते थे तो वो भी वहीं उनके साथ रहती थीं लेकिन तलाक का जो खत आया, उस पर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की राइटर्स बिल्डिंग का पता था।’ तलाक में शरिया कानून फॉलो नहीं हुआ, फिर तलाक कैसे हुआ?
हिना बताती हैं कि तलाक-ए-हसन की 4 शर्तें होती हैं, जो मेरे तलाक में पूरी ही नहीं हुई। 1. पति-पत्नी के बीच सुलह के लिए पहले नोटिस भेजा जाता है। नोटिस में पत्नी से कहा जाता है कि आप पति से सुलह कर लें नहीं तो तलाक हो जाएगा। ये नोटिस मुझे मिला ही नहीं। 2. हमारा ज्यूरिसडिक्शन झारखंड है लेकिन तलाक के पेपर में पता कोलकाता का है। काजी कोलकाता का है और हमने पता किया तो वो काजी रजिस्टर्ड भी नहीं है। 3. तलाक-ए-हसन में पति-पत्नी 3 महीने तक एक साथ एक छत के नीचे रहते हैं, तब प्रक्रिया पूरी होती है। मेरे केस में ये भी नहीं हुआ। सीधे तलाक का खत आया। दो खत मैंने रिसीव भी नहीं किए जबकि रिसीविंग जरूरी होती है। 4. तलाक के खत में नाम मेरे पति का था लेकिन साइन मेरे ससुर ने किए थे। अगर तलाक पति देगा तो सिग्नेचर भी उसी के होने चाहिए? बेटी की जिम्मेदारी से भी पति ने किनारा किया
हिना बताती हैं कि जब पति ने तलाक दिया तो मेरी बेटी 2 साल की थी लेकिन तलाक के पेपर में उसका जिक्र तक नहीं था। ये कैसे? उलटा ये लिखा है कि मेरे और मेरी पत्नी के बीच संबंध नहीं थे। CM और गवर्नर से शिकायत की लेकिन जवाब नहीं आया
हिना बताती हैं, ‘मैंने ममता बनर्जी के दफ्तर में कई लेटर भेजे। मैंने लिखा कि मेरे पति ने तलाक के लिए आपके राज्य का नाम लेकर एक गैर रजिस्टर्ड काजी का इस्तेमाल किया है। आप इस पर संज्ञान लीजिए लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया।’ ‘गवर्नर ऑफिस में भी खत भेजा तो अजीब जवाब आया। कहा गया कि CM हमारी बात नहीं सुनती हैं। वो क्या करती हैं, किसी को नहीं पता। हमने आपका लेटर आगे भेज दिया है। जब उनका कोई जवाब आएगा, तब ही हम कुछ कर पाएंगे।’ हिना आगे कहती हैं, ‘हद ये है कि एक व्यक्ति बंगाल के सबसे मशहूर प्रशासनिक भवन राइटर्स बिल्डिंग के पते का मिसयूज कर मुझे तलाक भेज रहा है। इस पर CM की चुप्पी और गवर्नर का अजीब जवाब आता है। जबकि लेटर भेजने वाले का आधार कार्ड दिल्ली का है और घर झारखंड में है। बंगाल से उसका कोई नाता नहीं है। उस काजी पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जिसने ये गैर शरीयत वाला झूठा तलाक करवाया।’ ‘मैं खुद दो बार कोलकाता गई। मेरी वकील ऋतु दुबे ने बंगाल के लॉ सेक्रेटरी सलीम अंसारी को नोटिस भेजा था। मैं जब अंसारी से मिली तो वो कहते हैं कि ऐसे नोटिस तो हम कचरे के डिब्बे में डाल देते हैं। आप बताइए इस तरह सिर्फ मेरी ही नहीं, न जाने कितनी औरतों की जिंदगी तबाह हो रही है और किसी को कोई फिक्र नहीं।’ घरेलू हिंसा के केस के जवाब में मिला तलाक
हिना बताती हैं, ‘मेरे पति दिल्ली में फ्लैट लेना चाहते थे। मुझ पर दबाव डालते थे कि मैं अपने पापा से 5 लाख मांग लाऊं। जबकि वो पहले ही बहुत दहेज दे चुके थे। दहेज की मांग और मारपीट से परेशान होकर मैंने 2017 में घरेलू हिंसा का केस कर दिया। इसके बाद 2018 में उन्होंने तलाक भेज दिया।’ ‘मैं केस होने से पहले तक उनके साथ दिल्ली में ही थी। जब मैंने केस कर दिया तो उन्होंने मुझे जबरदस्ती झारखंड भेज दिया। अब मैं कोर्ट के ऑर्डर के बाद अपने ससुराल में पैतृक घर पर हूं।’ हिना आगे बताती हैं, ‘कोर्ट हर महीने 10 हजार रु. का मेंटेनेंस ऑर्डर पास कर चुका है लेकिन अब तक एक फूटी कौड़ी नहीं मिली। 9 लाख रु. अब तक ड्यू हो चुका है। घरेलू हिंसा के केस में मेरे पति ने अपील की तो उसकी अपील रद्द हो गई। अब मेरे पति और सास-ससुर के खिलाफ वारंट निकला है। तीनों फरार हैं।’ अब जरीना की कहानी…
डिलीवरी के बहाने मायके भेजा, बुलाने से मना कर दिया
हिना के बाद हमने मुंबई की रहने वाली जरीना से बात की। वे कहती हैं, ‘मेरे पति अहमद महबूब शेख का परिवार तमिलनाडु के मदुरई में टीवीएस नगर में रहता है। मैं भी शादी करके वहीं गई थी। उन्होंने झूठ बोलकर दूसरी शादी की। मुझसे कहा कि उनकी पहली पत्नी की मौत हो गई है जबकि वो जिंदा थीं। निकाह में मेरे पापा ने 2 लाख रु. का दहेज और कुछ सामान दिया था लेकिन कुछ ही दिन बाद इन लोगों ने और दहेज की डिमांड शुरू कर दी। ‘जब मैं प्रेग्नेंट हुई तो डिलीवरी के बहाने मायके भेज दिया। मेरा बेटा हुआ। पापा ने कुछ महीनों बाद ससुराल में फोन किया कि बेटी को ले जाइए तो उन्होंने साफ मना कर दिया।’ बिना तलाक पति ने तीसरी-चौथी शादी की, पांचवीं की तैयारी में था
जरीना बताती हैं, ‘मुझे फोन करने पर वो गंदी गालियां देते। कई महीने गुजर गए तो मैंने अपने बेटे के साथ चेन्नई पहुंच गईं। ससुराल वालों ने बवाल से बचने के लिए मुझे एक किराए के घर में अकेला रख दिया। ‘मैं दुधमुंहे बच्चे के साथ ऐसे घर में करीब 3 महीने तक रही, जहां बिजली भी नहीं थी। मेरे मकान मालिक को तरस आया तो उन्होंने ससुराल वालों को फोन किया और कहा कि अगर तुम लोग इसे नहीं ले जाते तो मैं पुलिस को इन्फॉर्म कर दूंगा। ये लोग डर गए और मुझे मेरे पति के पास लखनऊ भेज दिया। वहां जाकर मुझे पता चला कि मेरे पति ने तीसरी शादी कर ली थी।’ ‘मुझे लखनऊ में भी अलग रखा और टॉर्चर करने लगे। तीसरी शादी का पता चले कुछ महीने हुए थे कि तभी उन्होंने बिना किसी को तलाक दिए चौथी शादी भी कर ली। पांचवीं शादी के लिए मैट्रिमोनियल में डायवोर्सी का स्टेटस लगाकर प्रोफाइल भी बना ली। फिर एक दिन तो वो मुझे लेकर चेन्नई लौट गए और वहां मुझे जान से मारने की धमकी देने लगे।’ पति ने भेजा पहले तलाक का खत, 3 महीने बाद मुफ्ती ने भेजा फतवा
जरीना कहती हैं, ‘मैंने चेन्नई में पति के खिलाफ मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज की। पुलिस ने कहा कि आप मायके चली जाएं, तब तक हम कार्रवाई करेंगे। यहां आपको खतरा है। मैं मायके मुंबई आ गई। वहां एक दिन सादे कागज पर पोस्ट के जरिए तलाक का खत आया। तलाक की वजह मेरा कैरेक्टर लेस होना बताया गया। तीन महीने बाद मदरसा नदवा के मुफ्ती ने मुझे फतवा भेजा और कहा कि आपका तलाक हो चुका है।’ पुलिस बोली- इसके लिए कोई कानून नहीं
जरीना कहती हैं, ‘पुलिस ने साफ कह दिया कि ऐसे मामलों के लिए कोई कानून नहीं, हम कुछ नहीं कर सकते हैं। दूसरी तरफ मुफ्ती ने कहा कि फतवा टाला नहीं जा सकता क्योंकि तलाक हो गया है।‘ ‘जब मैंने कहा कि मेरे कैरेक्टर पर सवाल उठाया गया है जबकि इसका कोई प्रूफ नहीं और मुझसे कुछ पूछा तक नहीं गया। तब मुफ्ती ने कहा कि पूछने की जरूरत नहीं है‘ इस्लामिक स्कॉलर बोले, कुरान के नाम पर फर्जीवाड़ा
इस्लामिक स्कॉलर शेख निजामुद्दीन कहते हैं, ‘कुरान के नाम पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। एकतरफा तलाक का जिक्र कुरान या हदीस में है ही नहीं। तलाक दो लोगों के बीच होता है, जैसे निकाह दो लोगों के बीच दोनों की मर्जी से होता है।’ 3 तलाक तो अब गैरकानूनी है। तलाक-ए-हसन क्या है? इसके जवाब में वो कहते हैं, ‘तलाक-ए-हसन को शरीयत लीगल करार देती है लेकिन ये भी दोनों की मर्जी से होता है। जब पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर डिस्प्यूट हो जाए तो नियम कहता है कि पहले पंच या मस्जिद के जिम्मेदार लोग या अब अदालत में सुलह की कोशिश करवाई जाती है। तब भी बात न बने तो 3 महीने तक पति-पत्नी साथ रहते हैं।’ ‘ हर महीने में तलाक दिया जाता है यानी तीन माह में तीन बार। इसमें ये ध्यान रखा जाता है, गर्भ नहीं ठहरना चाहिए। कई बार ऐसा होता है कि इन तीन महीनों में मामला खुद ब खुद सुलझ जाता है। कुरान में फोन, लेटर, वॉट्सएप का तो को जिक्र तक नहीं, ये तो वैसे भी गैरकानूनी है।’ सुप्रीम कोर्ट में तलाक-ए-हसन और पॉलीगेमी के खिलाफ PIL दाखिल
न्याय बोध नाम की संस्था की वकील ऋतु दुबे कहती हैं, ‘तलाक-ए-हसन के 7 मामलों की एक PIL हमने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है। हिना बेनजीर का मामला भी पहले हमारे पास था और करीब 8-9 मामले लाइन में हैं। जो अभी दाखिल नहीं किए हैं।’ ‘इसका सबसे बुरा पक्ष ये है कि बिना औरत की मर्जी के तलाक दे दिया जाता है। बच्चे का जिक्र तो ससुराल वाले तलाक में करते ही नहीं। मेंटेनेंस अधर में लटका रहता है।’ निकाह टूटने के बाद पति मेंटेनेंस के लिए जिम्मेदार नहीं
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता एस क्यू आर इलियासी इन मामलों को लेकर कहते हैं, ‘तलाक-ए-हसन, तलाक का बेहतर तरीका है। पति पत्नी में विवाद होने की स्थिति में सुलह के लिए पहले कुछ स्टेप फॉलो होते हैं, जैसे शुरुआत में दोनों के बिस्तर अलग कर दिए जाते हैं। ताकि वे साथ न सोएं और कोई संबंध न बने। फिर दोनों पक्षों के लोग सुलह की कोशिश करते हैं।’ ‘कोई हल न निकलने पर तीन महीने की तलाक-ए-हसन की प्रक्रिया शुरू होती है। इन तीन महीनों को इद्दत कहते हैं। हर महीने में एक बार तलाक बोलना होता है। तीसरे महीने में तलाक बोलने पर निकाह टूट जाता है। अगर इस प्रक्रिया के बीच किसी भी महीने पति-पत्नी के बीच संबंध बन जाए तो फिर तलाक रद्द हो जाता है।’ ‘इस तरह के तलाक में एक बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोबारा वही दोनों मर्द उस औरत से निकाह नहीं कर सकता है। क्या बच्चे और पति मेंटेनेंस की हकदार भी नहीं होते? इस पर इलियासी कहते हैं, ‘जब निकाह होता है तो पति ही पत्नी की सारी जिम्मेदारी लेता है। बच्चा होने पर उसकी भी लेता है लेकिन तलाक के साथ जिम्मेदारियां भी खत्म हो जाती है। इस्लाम में तलाक के बाद औरत किसी भी तरह के मेंटेनेंस की हकदार नहीं है।’ …………………
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