ठंड और प्रदूषण से बढ़े अस्थमा–सीओपीडी के मरीज:अस्पतालों में 15–20% तक बढ़ी संख्या, लापरवाही हुई तो वायरल से बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा

📅 Published: January 11, 2026 | 📂 Category: India Up

शहर में बढ़ती ठंड और प्रदूषण का असर अब लोगों के फेफड़ों पर साफ दिखाई देने लगा है। अस्पतालों में अस्थमा और सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। मुरारी लाल चेस्ट हॉस्पिटल के एचओडी डॉ. अवधेश कुमार के अनुसार बीते दिनों में अस्थमा के लगभग 15 प्रतिशत और सीओपीडी के करीब 20 प्रतिशत मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसके साथ ही निमोनिया के मरीज भी सामने आ रहे हैं।
पहले अस्थमा और सीओपीडी में समझे अंतर
डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि अस्थमा एलर्जी से संबंधित बीमारी है, जो धूल, धुआं, परागकण, मौसम परिवर्तन और प्रदूषण से ट्रिगर होती है, जबकि सीओपीडी ज्यादातर उन लोगों में देखी जाती है जो लंबे समय तक धूम्रपान करते हैं या धुएं के संपर्क में रहते हैं। ठंड के मौसम में हवा में धुंध और प्रदूषण बढ़ने से सांस की नलियों में सूजन हो जाती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत, खांसी और सीने में जकड़न बढ़ जाती है।
सर्दियों में ज्यादा सक्रीय होते है कीटाणु
उन्होंने बताया कि सर्दियों में लोग अक्सर कमरे बंद करके रहते हैं और धूप का कम पहुंचना कीटाणुओं के लिए अनुकूल वातावरण बना देता है। ऐसे में वायरल संक्रमण तेजी से फैलता है। यदि इस अवस्था में लापरवाही की जाए तो वायरल संक्रमण, बैक्टीरियल इंफेक्शन में बदल सकता है, जिसके उपचार के लिए एंटीबायोटिक की आवश्यकता पड़ती है। इसी कारण इस मौसम में खांसी-जुकाम और सांस फूलने को हल्के में न लेने की सलाह दी जाती है। बच्चे और बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक
डॉ. कुमार के अनुसार अस्पताल में आने वाले मरीजों में बच्चों और बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक है। जिन मरीजों को पहले से अस्थमा या सीओपीडी है, उनमें अटैक आने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए ऐसे मरीज अपनी दवा और इनहेलर नियमित रूप से लें और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा में कोई बदलाव न करें।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग धूम्रपान करते हैं उन्हें इस मौसम में खास तौर पर परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह फेफड़ों की क्षमता और अधिक कम कर देता है। ये लक्षण दिखे तो तुरंत करें संपर्क
उन्होंने बताया कि लगातार सांस फूलना, सीने में घरघराहट, सीने में जकड़न, बलगम खांसी, बुखार या थकान जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चेस्ट विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है। समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है और आईसीयू की जरूरत भी पड़ सकती है। अस्थमा और सीओपीडी से बचाव के 10 जरूरी टिप्स

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