नीतीश ने हिजाब खींचा, पति ने नुसरत को कोलकाता भेजा:बाहर निकलने पर पाबंदी, भाई बोले- मजबूरी है, नहीं चाहते मियां-बीवी अलग हों

📅 Published: December 30, 2025 | 📂 Category: India National

‘जब नीतीश कुमार ने नकाब खींचा, तो समझ नहीं आया कौन, कहां से मुझे खींच लेगा। वहां सब हंसने लगे थे। इतना कुछ पहले हो गया था, न जाने और क्या करते। मैं जल्दी-जल्दी वहां से निकली, ताकि मुझे कोई देख न ले। थोड़ी देर बाद दोबारा वहां गई अपॉइंटमेंट लेटर फाड़कर फेंकने, लेकिन तब तक सब जा चुके थे।’ नुसरत परवीन ने ये आपबीती भाई बबलू को सुनाई थी। वही नुसरत, जिनका हिजाब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जॉइनिंग लेटर देते वक्त खींच दिया था। तारीख 15 दिसंबर थी। इसके बाद से नुसरत सामने नहीं आई हैं। अब तक कुछ कहा भी नहीं है। बिहार सरकार की ओर से जॉइनिंग की तारीख बढ़ाने के बाद भी उन्होंने नौकरी जॉइन नहीं की है। नुसरत और उनका परिवार पटना से कोलकाता चला गया। भाई का दावा है कि पति ने नुसरत को मीडिया से बात करने और बाहर निकलने से मना किया है। परिवार भी इसका विरोध नहीं कर रहा, क्योंकि हम नहीं चाहते कि पति-पत्नी का रिश्ता बिगड़े। पहले पटना में तलाश
तारीख: 23 और 24 दिसंबर
दो पते, पहला घर खाली और दूसरा बंद, परिवार गायब नुसरत और उनका परिवार पटना में रह रहा था। हमें घर का पता चला। न्यू पाटलिपुत्र के कमर प्लाजा में मकान नंबर-102 में किराए पर पूरा परिवार रहता है। परिवार में नुसरत के पति डॉ. आसिफ अली खान, 14 साल का बड़ा और 9 साल का छोटा बेटा है। हम उस पते पर पहुंचे, लेकिन वे इस घर को छोड़कर कुछ दूर किसी और मकान में रहने लगे हैं। बदला पता है- मोहिदिन इन्क्लेव, न्यू पाटलिपुत्र कॉलोनी। यहां पहुंचे, तो गेट पर ताला मिला। सिक्योरिटी गार्ड शंभू ने बताया कि परिवार 17 दिसंबर को कहीं चला गया है। नुसरत तिब्बी कॉलेज में पीजी कर रही हैं। पति डॉ. आसिफ साइकियाट्रिस्ट हैं। वे हाजीपुर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाते हैं और पटना के चांद मेमोरियल अस्पताल में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। नुसरत के घर के पास रहने वाले रफीक बताते हैं कि नुसरत का परिवार यहीं रहता था, लेकिन उनसे बहुत मेलजोल नहीं था। रफीक आगे कहते हैं, ‘मेरी पत्नी भी कुवैत में सरकारी नौकरी करती हैं। वहां भी जॉब करने वालों को फेस खुला रखना पड़ता है, लेकिन चेहरे से नकाब महिला पुलिस ही हटाती है।’ नुसरत के इस घर के सामने मस्जिद है। पता चला कि नुसरत के पति डॉ. आसिफ वहां नमाज पढ़ने जाते थे। वहां के इमाम मोहम्मद फारूक ने बताया कि डॉ. आसिफ से बहुत ताल्लुक नहीं है। बस कभी सलाम-कलाम करते थे। चार महीने पहले ही उमरा करके आए थे। उस दौरान दिन में 2-3 दफा नमाज पढ़ने आ जाया करते थे। इससे ज्यादा पता नहीं।’ इसी कड़ी में इमाम साहब की पत्नी हुस्ना खातून बताती हैं, नुसरत बालकनी में कपड़े डालने आती थीं, तब नकाब नहीं पहनती थी। वहीं से दुआ-सलाम हो जाती थी। वो किसी के घर नहीं आती-जाती थीं। नुसरत के पति ने अस्पताल आना बंद किया, पटना भी छोड़ा
मोहल्ले से निकलकर हम चांद मेमोरियल अस्पताल पहुंचे। नुसरत के पति डॉ. आसिफ यहां रोज शाम 6 बजे मरीजों को देखते थे। उस दिन डॉ. आसिफ अस्पताल नहीं पहुंचे। उन्हें कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अस्पताल के मैनेजर ने फोन मिलाया, तो उन्होंने आने से मना कर दिया। हम अगली सुबह, यानी 24 दिसंबर को फिर अस्पताल पहुंचे। मैनेजर ने बताया कि डॉ. आसिफ शहर में ही नहीं हैं। नकाब वाले मामले के बाद मीडिया से बच रहे हैं। शायद कोलकाता गए हैं।’ अब पटना से कोलकाता तक तलाश तारीख: 25-26 दिसंबर
नुसरत का पता लगाने हम पटना से कोलकाता रवाना हुए। पता चला कि नुसरत और उनका परिवार कोलकाता के तोपसिया के कोहिनूर बाजार में रहता है। हम वहां घंटों तक उनके घर का पता खोजते रहे। आखिरकार नुसरत के बडे़ भाई सरफराज का पता मिला। वहां पहुंचे, तो घर में कोई नहीं था। पता चला कि नुसरत के छोटे भाई बबलू का प्रॉपर्टी का काम है। हम उनके ऑफिस SK ट्रेडर्स 77/2 तोपसिया पहुंचे। पहचान छिपाते हुए उनके घर का पता पूछा। बताया गया कि अभी सब नुसरत की बहन के घर गए हैं। साथ ही सरफराज का फोन नंबर दे दिया। बहन का घर भी उसी बाजार में है। करीब घंटेभर की मशक्कत के बाद उनका पता मिल गया। हम उनके अपार्टमेंट जेनटेक्स प्लाजा पहुंचे। सिक्योरिटी गार्ड ने हमें रोक लिया। कुछ ही देर में बबलू भी स्कूटी से वहां आ गया। हमें देखकर हमारी सही पहचान पूछने लगा। इस बार हमने बता दिया कि दैनिक भास्कर से हैं। बहुत समझाने और भरोसा दिलाने पर वो हमें अपने घर ले जाने को राजी हो गया। नुसरत की बहन देखते ही भड़कीं, बोलीं- यहां से चले जाइए
हम बबलू के साथ बिल्डिंग के दूसरे फ्लोर पर पहुंचे। सामने गेट पर एक महिला खड़ी थीं। ये नुसरत की छोटी बहन हैं। उन्होंने गुस्से से पूछा- आप लोग कौन हैं? मीडिया से होने की वजह से उन्होंने हम पर चिल्लाना शुरू कर दिया। कुछ देर में घर से और लोग बाहर आने लगे। ये वही घर है, जिसमें नुसरत और उनके पति डॉ. आसिफ मौजूद थे। परिवार के लोगों ने धमकी दी कि गार्ड से कहकर, धक्के मारकर बाहर करवा देंगे। हमने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात नहीं की। इसके बाद हम बाहर आ गए। भाई बोले- हम नहीं चाहते कि पति-पत्नी अलग हो जाएं
बाहर जाने पर बबलू ने हमें अपने भतीजे वकार से मिलवाया। वकार सरफराज के बेटे हैं। वे वकालत करते हैं। उन्होंने ऑफिस चलने के लिए कहा। ऑफिस पहुंचकर बताया कि नुसरत के पति ने उसे मीडिया से दूर रखा है। सोशल मीडिया पर भी कुछ लिखने से मना किया है। इसी वजह से नुसरत घर में बंद है। हम कुछ नहीं कर सकते, हम नहीं चाहते कि मियां-बीवी अलग हो जाएं। इसलिए हम चुप हैं।’ ‘भाई परमिशन दें तो नीतीश समेत सभी मंत्रियों पर FIR करा दूं’
बबलू आगे कहते हैं, ‘मौजूदा हुकूमत से कौन उलझेगा। हम लोगों को बहुत तकलीफ है। अगर आज मेरा बड़ा भाई परमिशन दे दे, तो अभी तोपसिया थाना जाकर नीतीश कुमार समेत वहां मौजूद सभी मंत्रियों के नाम FIR करवा दूं।’ हमने पूछा कि नुसरत क्या चाहती हैं? भाई जवाब देते हैं, ‘पति के बोलने पर ही वो कुछ करेंगी।’ नुसरत, पढ़ी-लिखी, समझदार हैं, फिर ऐसा कैसे? इस पर वकार ने कहा, ‘मुस्लिम परिवार है। यही सबसे बड़ी वजह है।’ आखिरकार नुसरत के घरवालों ने हमें उनसे नहीं मिलने दिया। भाई सरफराज ने कहा, ‘नुसरत इस माहौल में मीडिया से बात नहीं करना चाहतीं। एक महीने बाद वे मीडिया से बात करेंगी। उसने कॉलेज जाना बंद कर दिया है। मुख्यमंत्री ने जॉइनिंग लेटर दिया है, लेकिन जॉइन नहीं किया।’ हालांकि बिहार के आयुष विभाग की तरफ से जॉइनिंग की तारीख 20 दिसंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी गई है। अब देखना यही है कि नुसरत के पति, नुसरत के लिए क्या फैसला करते हैं। हिजाब विवाद की शुरुआत
15 दिसंबर को बिहार के CM नीतीश कुमार पटना में आयुष डॉक्टरों को जॉइनिंग लेटर दे रहे थे। डॉ. नुसरत लेटर लेने मंच पर आईं। नीतीश कुमार उन्हें लेटर देने लगे। नीतीश कुमार ने नुसरत के हिजाब की ओर इशारा करते हुए पूछा कि ये क्या है जी। नुसरत ने जवाब दिया, हिजाब है सर। CM ने कहा कि हटाइए इसे। इसके बाद नीतीश कुमार ने नुसरत का हिजाब खींच दिया। इस दौरान डिप्टी CM सम्राट चौधरी नीतीश कुमार को रोकने की कोशिश करते दिखे। हिजाब हटाने से नुसरत थोड़ी देर के लिए असहज हो गईं। आसपास मौजूद लोग हंसने लगे। अधिकारियों ने नुसरत को जॉइनिंग लेटर देकर जाने का इशारा किया। इसके बाद नुसरत वहां से चली गईं। 32 हजार सैलरी, आयुष डॉक्टर की नौकरी, लेकिन नुसरत नहीं पहुंचीं
डॉ. नुसरत पटना के राजकीय तिब्बी कॉलेज अस्पताल से पढ़ाई कर रही हैं। यहां बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी की पढ़ाई होती है। नुसरत की नियुक्ति 32 हजार रुपए सैलरी पर आयुष डॉक्टर के पद पर हुई है। उन्हें 20 दिसंबर 2025 को पटना सिटी के पीएचसी सदर में जॉइन करना था। हिजाब विवाद के बाद नुसरत ने नौकरी जॉइन नहीं की। इस दौरान इस जॉइनिंग की तारीख 31 दिसंबर कर दी गई। अगर वे इस तारीख तक जॉइन नहीं करती हैं, तो उनका अपॉइंटमेंट रद्द हो सकता है। यूपी, झारखंड और कश्मीर में नीतीश के खिलाफ शिकायत
इस विवाद के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ लखनऊ, रांची और श्रीनगर में शिकायत दर्ज कराई गई। सपा की प्रदेश प्रवक्ता सुमैया राणा ने लखनऊ के कैसरबाग थाने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ तहरीर दी। सुमैया मशहूर शायर मुनव्वर राणा की बेटी हैं। झारखंड की राजधानी रांची के इटकी थाने में सोशल वर्कर मो. मुर्तजा आलम ने शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि धार्मिक पोशाक के साथ सार्वजनिक मंच पर किया गया ऐसा व्यवहार आपत्तिजनक है। जम्मू-कश्मीर के विपक्षी दल पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता और पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने श्रीनगर पुलिस में नीतीश कुमार के खिलाफ शिकायत दी है।

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