उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की ड्राफ्ट लिस्ट जारी होते ही सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। बरेली शहर विधानसभा सीट, जिसे 1985 से भाजपा का अभेद्य किला माना जाता है, वहां इस बार समीकरण बदलते दिख रहे हैं। SIR की प्रक्रिया के बाद बरेली शहर विधानसभा से रिकॉर्ड 1,65,685 वोट कम हो गए हैं। यह आंकड़ा इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि 2022 के चुनाव में भाजपा के डॉ. अरुण कुमार सक्सेना को कुल 1,29,014 वोट मिले थे। अब इतनी बड़ी संख्या में वोट कटने से भाजपा खेमे में जहां चिंता की लकीरें हैं, वहीं सपा और कांग्रेस इसे अपनी नैतिक जीत मानकर चुनावी उत्साह में नजर आ रहे हैं। कांग्रेस का बड़ा हमला: ‘फर्जी वोटरों के दम पर जीत रही थी भाजपा, अब बर्बादी शुरू’ वोटों की इस बड़ी कटौती पर विपक्ष ने सीधे तौर पर भाजपा को घेरा है। कांग्रेस के प्रवक्ता राज शर्मा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में तीखा हमला करते हुए कहा कि ये कटे हुए वोट दरअसल भाजपा द्वारा बनवाए गए ‘फर्जी वोटर’ थे। उन्होंने दावा किया कि भाजपा इन्हीं जाली वोटों के सहारे दशकों से जीतती आ रही थी, लेकिन राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दों और चुनाव आयोग की सख्ती के बाद अब दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। शर्मा ने कहा कि अब शहर सीट पर भाजपा का ‘सफाया’ तय है क्योंकि असली मुकाबला अब निष्पक्ष मतदाता सूची के आधार पर होगा। भाजपा की सफाई: ‘2003 के बाद पहली बार हुआ इतना बड़ा रिवीजन, मृत और शिफ्टेड लोग हटे’ विपक्ष के आरोपों पर भाजपा के महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना ने पलटवार किया है। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया कि शहर और कैंट विधानसभाओं में करीब 35% वोट कटे हैं, लेकिन यह कोई साजिश नहीं बल्कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण है। सक्सेना के अनुसार, 2003 के बाद से इतना गहन रिवीजन नहीं हुआ था, जिसके कारण सूची में उन लोगों के नाम भी शामिल थे जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो सालों पहले शहर छोड़कर जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग नौकरी के सिलसिले में बरेली आए थे और बाद में चले गए, उनके वोट भी अब हटा दिए गए हैं। भाजपा अब फॉर्म 6 और फॉर्म 8 के जरिए वास्तविक मतदाताओं को जोड़ने के अभियान में जुट गई है। सपा का संतुलित रुख: ‘वोट कटने से नतीजों पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा’ वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता और 2022 के प्रत्याशी राजेश अग्रवाल का नजरिया थोड़ा अलग है। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष की बात का समर्थन करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से किसी दल को व्यक्तिगत नुकसान या फायदा नहीं होगा। उन्होंने माना कि सूची में बहुत से दोहरे वोट और मृत व्यक्तियों के नाम थे, जिनकी वजह से वोटिंग प्रतिशत हमेशा कम दिखाई देता था। राजेश अग्रवाल का दावा है कि अब जब वास्तविक वोटरों की सूची तैयार हो गई है, तो आने वाले चुनाव में मतदान का प्रतिशत 80 से 85 तक जा सकता है, जो लोकतंत्र के लिए अच्छी बात है। कांग्रेस के इतिहास पर भाजपा का तंज: ‘इमरजेंसी लगाने वाले हमें लोकतांत्रिक मूल्यों की सीख न दें’ फर्जी वोट के आरोपों पर अधीर सक्सेना ने कांग्रेस के इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि जिस पार्टी ने इमरजेंसी लगाकर सत्ता बचाई हो, उन्हें पारदर्शिता पर सवाल उठाने का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा विकास के एजेंडे पर काम करती है, जिसका प्रमाण 2023 के नगर निगम चुनाव हैं, जहां भाजपा के पार्षदों की संख्या 36 से बढ़कर 51 हो गई और मेयर की जीत का अंतर 12 हजार से बढ़कर 56 हजार पार कर गया। उन्होंने तंज कसा कि विपक्ष सिर्फ सोशल मीडिया और ट्विटर तक सीमित है, जबकि भाजपा कार्यकर्ता हर मौसम में जनता के बीच रहते हैं। अब नजर डालते है 2022 के विधानसभा चुनाव पर 2022 के विधानसभा चुनाव का रिपोर्ट कार्ड भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार डॉ. अरुण कुमार सक्सेना को सबसे अधिक 1,29,014 वोट मिले, जो कुल मतदान का लगभग 53.77% था। उनके मुख्य प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी के राजेश कुमार अग्रवाल रहे, जिन्हें 96,694 वोट (40.30%) प्राप्त हुए। बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी ब्रह्मानंद शर्मा को 6,982 वोट मिले, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कृष्ण कांत शर्मा के खाते में 2,311 वोट आए। इसके अलावा, AIMIM की प्रत्याशी शाहीन खान को 1,744 वोट मिले और 1,178 मतदाताओं ने नोटा (NOTA) का विकल्प चुना। अब नजर डालते है बरेली शहर विधानसभा के इतिहास पर बरेली शहर विधानसभा में 1985 से लेकर आज तक भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। कोई भी पार्टी भाजपा का किला आज तक नही ढाह सकी है। बरेली शहर के विधायक भारतीय जनता पार्टी से डॉ अरुण कुमार है। जो योगी सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री है। पेशे से अरुण कुमार डॉ है और गांधीनगर में इनका हॉस्पिटल है। डॉ अरुण शहर सीट से 2007 में सपा से चुनाव लड़ चुके है लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बाद में डॉ अरुण बीजेपी में शामिल हुए और शहर शीट से 2012, 2017 और 2022 में विधानसभा का चुनाव लड़े और जीत हासिल की। पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त बने थे CM शहर विधानसभा के इतिहास पर नजर डाले तो यहाँ पर 1951 से लेकर 1969 तक कांग्रेस का कब्ज़ा रहा। 1951 में पहली बार चुनाव हुआ। पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त ने शहर सीट से चुनाव लड़ा और भारी मतों से जित हासिल की। उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद 1957 , 1962 , और 1967 तक कांग्रेस के जगदीश सरन अग्रवाल का इस शीट पर कब्ज़ा रहा। 1969 में बीकेडी से राम सिह खन्ना ने जीत हासिल की। 1974 में बीजेपी के डॉ दिनेश जौहरी शहर शीट पर अपना कब्ज़ा जमाया। लेकिन 1977 के चुनाव में जेएनपी के सत्य प्रकाश ने डॉ दिनेश जौहरी को हराकर अपना कब्ज़ा जमाया। 1980 में राम सिंह खन्ना ने जीत हासिल की। लेकिन एक बार फिर से डॉ दिनेश जौहरी ने 1985 के विधानसभा चुनाव में अपना कब्ज़ा जमा लिया। डॉ दिनेश जौहरी 1989 , 1991 में भी विधायक चुने गए। उसके बाद बीजेपी से ही राजेश अग्रवाल 1993 के चुनाव में खड़े हुए और जीत हासिल की। राजेश अग्रवाल ने 1996 , 2002 , 2007 के विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल की। इसके बाद परिसीमन बदलने से राजेश अग्रवाल कैंट विधानसभा से चुनाव लड़े। जबकि शहर शीट से बीजेपी से डॉ अरुण कुमार ने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 124 बरेली शहर विधानसभा: कब कौन रहा विधायक 1951-1957 – पण्डित गोविन्द बल्लभ पन्त – कांग्रेस – यूपी के सीएम बने
1957-1962- जगदीश शरन अग्रवाल – कांग्रेस
1962-1967- जगदीश शरन अग्रवाल – कांग्रेस
1967-1969- जगदीश शरन अग्रवाल – कांग्रेस
1969- 1974- राम सिंह खन्ना – बीकेडी
1974-1977- डॉ दिनेश जौहरी – बीजेपी
1977-1980- सत्य प्रकाश – JNP
1980-1985- राम सिंह खन्ना – कांग्रेस
1985-1989- डॉ दिनेश जौहरी – बीजेपी
1989-1991- डॉ दिनेश जौहरी – बीजेपी
1991-1993- डॉ दिनेश जौहरी – बीजेपी
1993-1996- राजेश अग्रवाल – बीजेपी
1996-2002- राजेश अग्रवाल – बीजेपी
2002- 2007- राजेश अग्रवाल – बीजेपी
2007- 2012- राजेश अग्रवाल – बीजेपी
2012- 2017- डॉ अरुण कुमार – बीजेपी
2017- 2022- डॉ अरुण कुमार – बीजेपी
2022 से अब तक- डॉ अरुण कुमार – बीजेपी
बरेली में 'SIR' से भाजपा के अभेद्य किले में सेंध:विपक्ष बोला- 1.65 लाख फर्जी वोटर हटे, अब होगा भाजपा का सफाया
📅 Published: January 8, 2026 |
📂 Category: India Up
