मेरठ कपसाड़ कांड के बाद सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा:यूजर्स ने उठाए सवाल “बुलडोजर कहाँ है चाचा?”

📅 Published: January 9, 2026 | 📂 Category: India Up

मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण के मामले ने ज़िले का माहौल गरमा दिया है। वारदात के बाद अब यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है। यूजर्स सरकार और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। X (ट्विटर) पर कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि इस मामले में अब तक ‘बुलडोजर एक्शन’ क्यों नहीं हुआ? एक यूजर ने सीधे यूपी सीएम को टैग करते हुए लिखा — “बुलडोजर कहाँ है चाचा?” “जंगलराज नहीं तो क्या है?” — यूजर्स के तीखे सवाल पोस्ट में लोग लिख रहे हैं कि एक महिला की हत्या और उसकी बेटी का अपहरण जैसी गंभीर वारदात में कार्रवाई में देरी सवाल खड़े करती है। एक यूजर ने लिखा: “राजपूत युवक ने दलित युवती का अपहरण किया, माँ की हत्या कर दी… ये जंगलराज नहीं तो क्या है?” दूसरे ने लिखा: “अपराधी कोई भी हो, बुलडोजर सब पर चले — धर्म और जाति मत देखो।” कुछ यूजर्स ने फैक्ट चेक पर भी दिया जोर सोशल मीडिया पर बहस में कुछ यूजर्स ने पुलिस को समय देने की बात भी कही। एक पोस्ट में लिखा गया: “कोई दबंग नहीं, बॉयफ्रेंड है। कॉल रिकॉर्ड्स और फैक्ट्स आने दो, फिर फैसला करो।” UP की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल कई यूजर्स ने यूपी की कानून व्यवस्था पर तंज कसे। एक ने लिखा: “UP महिलाओं के लिए नर्क बन चुका है… महिला अपनी सुरक्षा खुद करें।” एक अन्य ने लिखा: “योगी का रामराज मुबारक हो।” एक तीखी पोस्ट में कहा गया: “माँ मर चुकी है, समाज और सिस्टम सड़ चुका है… बुलडोजर के टायर फट गए और डीज़ल खत्म हो गया।” मामले में कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी सरकार से कार्रवाई की मांग की है। कुछ पोस्ट में जनता ने सवाल करते हुए लिखा की: “कब तक गूंगे-बहरे बने रहोगे? ऐसे दरिंदों पर तुरंत कार्रवाई करो।” यूजर्स आरोपी के लिए कठोर सजा की मांग करते हुए लिख रहे हैं — “मौत की सजा मौत होनी चाहिए।”
पीड़ित परिवार लगातार बेटी की खोज और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। परिजनों ने आरोप लगाया कि न पारस की गिरफ्तारी हुई और न ही लड़की का कोई पता चला। पुलिस अब तक यह भी स्पष्ट नहीं कर पाई कि युवती आरोपी के कब्जे में है या कहीं और। कपसाड़ और आसपास के इलाकों में पुलिस बल तैनात है। लोगों में नाराजगी और डर दोनों मौजूद हैं। सोशल मीडिया पर बढ़ते दबाव के चलते मामला सरकार और प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है।

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