राइफल लेकर आए, अगवा किया, पूछा-शाहरुख खान के रिश्तेदार हो:50 लोगों के साथ कंटेनर में ठूंसा, डेढ़ महीने कैद, कैसे सूडान से लौटे आदर्श

📅 Published: December 19, 2025 | 📂 Category: India National

‘मैं एक छोटे से कंटेनर में कैद था। आसपास इतना घना जंगल था कि लोकेशन का पता ही नहीं चलता। आतंकी जिन लोगों को पकड़कर लाते, कंटेनर में ठूंस देते थे। मेरे कंटेनर में 50-60 लोग थे। अंदर दम घुटता था। सांस लेने में भी मुश्किल होती थी। 3-4 दिन बाद मुझे जेल की तरह एक कोठरी में भेज दिया। भयानक ठंड में जमीन पर सोता था। खाने में सिर्फ एक ब्रेड मिलती थी। टॉयलेट के लिए एक बॉल्टी थी। वो भी साफ नहीं होती थी। हर दिन सोचता था कि यहां से जिंदा निकल भी पाऊंगा या नहीं।’ सूडान में सरकार के खिलाफ लड़ रहे विद्रोही लड़ाकों की कैद से छूटकर आए आदर्श बेहरा के चेहरे पर अब भी घबराहट है। आदर्श ओडिशा के जगतसिंहपुर में रहते हैं और 17 दिसंबर को घर लौटे हैं। वे सूडान में एक प्लास्टिक फैक्ट्री में मशीन ऑपरेटर का काम करते थे। सूडान में 2023 से सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) और रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच जंग चल रही है। 26 अक्टूबर को RSF ने देश के अल-फशीर शहर पर कब्जा कर लिया। तभी आदर्श को भी बंधक बना लिया गया। अगवा किए जाने के बाद आदर्श का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें अपहरण करने वाले लड़ाके उनसे शाहरुख खान के बारे में पूछ रहे हैं। आदर्श की पत्नी सुष्मिता ने सरकार के अलावा शाहरुख खान से भी पति को रिहा कराने की अपील की थी। करीब डेढ़ महीने विद्रोहियों की कैद में रहे आदर्श अब घर पर हैं। पढ़िए उनकी आपबीती… हट्टा-कट्टा शरीर, इसलिए विद्रोहियों ने फौजी समझकर पकड़ा
आदर्श का परिवार जगतसिंहपुर जिले के कोटकणा गांव में रहता है। घर में माता-पिता के अलावा पत्नी सुष्मिता और दो बेटे हैं। आदर्श ने सिर्फ 10वीं तक ही पढ़ाई की। इसके बाद महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और फिर गुजरात कमाने चले गए। प्लास्टिक फैक्ट्री में 8-10 साल काम किया। सिर्फ 15-16 हजार रुपए सैलरी मिलती थी। इसमें खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। इसलिए सूडान चले गए। वे बताते हैं, ‘मैं 2022 में सूडान गया था। अल-फशीर शहर में नौकरी मिली। सब ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक गृहयुद्ध ने शहर को चपेट में ले लिया। अल-फशीर विद्रोहियों का गढ़ बन गया। चारों तरफ बमबारी और गोलीबारी होती थी। फैक्ट्री के अंदर रहना मौत को बुलाने जैसा था।’ ‘मैंने शहर छोड़ने का फैसला लिया। मैं और मेरे मैनेजर पैदल ही चल पड़े। हमने सड़कों की बजाय जंगल का रास्ता चुना ताकि किसी की नजर में न आएं। रास्ते में हथियारबंद विद्रोहियों ने घेर लिया। मेरी कद-काठी अच्छी है। हुलिया भी सूडान के लोग से अलग था। विद्रोहियों को लगा कि मैं सूडान की फोर्स में हूं और वर्दी छोड़कर भाग रहा हूं।’ ‘उन्होंने पीटना शुरू कर दिया। 1500 डॉलर (करीब 1.25 लाख रुपए), मोबाइल फोन और एपल वॉच छीन ली। विद्रोहियों ने मेरे मैनेजर को जंगल में ही छोड़ दिया, लेकिन मैं विदेशी था, इसलिए मुझे साथ ले गए।’ 3 दिन जंगल में रखा, पूछा- शाहरुख खान के रिश्तेदार हो क्या
आदर्श बताते हैं, ‘किडनैप करने के बाद मुझे तीन दिन घने जंगल में रखा गया। वहां कड़ाके की ठंड थी। मेरे पास ओढ़ने के लिए कंबल तो दूर, सोने के लिए बिस्तर तक नहीं था। मैं जमीन पर सोता था। खाने में सिर्फ बिस्किट या ब्रेड का एक टुकड़ा देते थे।’ कैद के दौरान विद्रोहियों ने आदर्श का एक वीडियो रिकॉर्ड किया। यह वीडियो दिखाने के लिए था कि उन्होंने एक विदेशी नागरिक को पकड़ लिया है। वीडियो में विद्रोहियों ने कैमरे के सामने चिल्लाकर कहा, ‘अब यह वापस नहीं जा सकता।’ इसी वीडियो से पता चला कि आदर्श को किडनैप कर लिया गया है। आदर्श बताते हैं, ‘वीडियो बनाते हुए उन्होंने मुझसे बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान के बारे में पूछा। वे मुझसे पूछ रहे थे कि क्या तुम शाहरुख खान को जानते हो। क्या शाहरुख खान तुम्हारा रिश्तेदार है। क्या तुम उसी के इलाके में रहते हो। 3-4 दिन बाद मुझे जंगल से निकालकर एक जेल में ले गए। वहां बहुत गंदगी थी। इतने मच्छर थे कि आप सो नहीं सकते।’ सेल के अंदर टॉयलेट नहीं था। मुझे एक बाल्टी दी गई थी, जिसे टॉयलेट के लिए इस्तेमाल करना था। उसे साफ करने वाला कोई नहीं था। ‘मुझे लगा कि अगर घर तक खबर नहीं पहुंचाई तो जिंदा नहीं बचूंगा। मैंने एक शख्स से बहुत गिड़गिड़ाकर फोन मांगा। उसने मुझे सिर्फ 5 मिनट के लिए फोन दिया। मैंने पत्नी सुष्मिता को फोन किया। रोते हुए पूरी बात बताई। कहा कि जल्दी सरकार से मदद मांगो, वरना मैं नहीं बचूंगा।’ ‘करीब एक महीने बाद आतंकियों का लीडर आया। उसका नाम एब्सोक था। उसने कहा कि रेडक्रॉस वाले आएंगे, तब तुम्हें छोड़ देंगे। वे एंबेसी में बात नहीं करते थे। कहते थे कि जिसे बात करनी है, उसे यहां आना होगा।’ रेड क्रॉस की मदद से छूटे, सरकार ने स्पेशल फ्लाइट भेजी
आदर्श के कहने पर उनकी पत्नी सुष्मिता ने सरकार और रेडक्रॉस से मदद मांगी। आखिरकार विद्रोहियों से बात हुई और वे आदर्श को छोड़ने के लिए तैयार हो गए। विद्रोहियों ने उन्होंने न्याला सिटी छोड़ दिया। यहां से भारत सरकार ने आदर्श को अबू धाबी लाने के लिए स्पेशल फ्लाइट भेजी। आदर्श बताते हैं, ‘मैं उस फ्लाइट में अकेला पैसेंजर था। मैं PM मोदी, केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और रेडक्रॉस का शुक्रगुजार हूं। अगर एंबेसी का कोई व्यक्ति पहले से मौजूद होता, तो शायद मैं जल्दी छूट जाता।’ आदर्श घर लौट आए हैं, लेकिन उनके पास अब कोई काम नहीं है। उनके पैसे विद्रोहियों ने लूट लिए। आदर्श कहते हैं, ‘अगर ओडिशा में ही कोई नौकरी मिल जाए, तो मैं कभी बाहर नहीं जाऊंगा। अब घर चलाने में बहुत मुश्किल आएगी।’ पत्नी बोलीं- वीडियो देख डर गई थी, विधायक-सांसद तक से मदद मांगी
आदर्श की पत्नी सुष्मिता उनकी रिहाई के लिए सरकारी अफसरों, विधायक, सांसद के घर चक्कर काटती रहीं। वे बताती हैं, ‘डेढ़ महीने से आदर्श से बात नहीं हो रही थी। तभी सोशल मीडिया पर वीडियो देख लिया। वीडियो में आदर्श के चारों तरफ हथियारबंद लोग थे। हम तो डर गए कि अब क्या होगा। ‘पहले 2-3 दिन में एक वॉयस मैसेज आ जाता था, फिर वह भी बंद हो गया। विद्रोहियों ने उन्हें बंधक बना रखा था। उनकी जान खतरे में थी। वॉयस मैसेज में एक ही बात होती थी कि किसी भी तरह सरकार से कहो कि मुझे यहां से छुड़ा ले। मैंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और विधायक को लेटर भेजा। उनसे कहा कि आप ही इकलौती उम्मीद हैं। जगतसिंहपुर के सांसद विभु प्रसाद तराई ने बहुत मदद की। भरोसा दिलाया कि वे हर हाल में आदर्श को वापस लेकर आएंगे।’ ‘16 दिसंबर को रात 9 बजे इंडियन एंबेसी का कॉल आया। अधिकारी ने बताया कि आदर्श सुरक्षित बचा लिए गए हैं। उन्होंने आदर्श से बात भी करवाई। उन्होंने फोन पर सिर्फ इतना कहा कि मैं ठीक हूं, अब चिंता मत करना। अधिकारी ने बताया कि आदर्श रात की फ्लाइट से भुवनेश्वर आएंगे और सुबह 8:30 बजे भुवनेश्वर एयरपोर्ट पर लैंड करेंगे।’ आदर्श को रिहा कराने वालीं डॉ. कल्पना
आदर्श की रिहाई के पीछे सबसे बड़ा योगदान मेजर डॉक्टर कल्पना का है। वे रेडक्रॉस से जुड़ी हैं। वे बताती हैं, ‘सुष्मिता का छोटा भाई मेरा स्टूडेंट है। वो मदद मांगने आया। मैंने कोऑर्डिनेट करना शुरू किया। रेड क्रॉस में एक फैमिली न्यूज सर्विस होती है, जो ऐसे समय में लोगों की जानकारी जुटाती है।’ ‘इस सर्विस के जरिए हमने ऐसे 15 मामले सुलझाए थे, लेकिन आदर्श का केस मुश्किल था। सूडान में सिविल वॉर इतना भीषण था कि सामान्य प्रोटोकॉल काम नहीं कर रहे थे। मैंने स्टेट और नेशनल रेड क्रॉस से संपर्क किया। वहां से उम्मीद नहीं मिली।’ ‘सूडान में इंटरनेशनल रेड क्रॉस को भी काम करने की परमिशन नहीं है। ऐसे में किसी को सुरक्षित बाहर निकालना नामुमकिन लग रहा था। इसी दौरान आदर्श ने मैसेज भेजा कि सूडान के न्याला शहर में रेड क्रॉस को परमिशन मिल रही है। हमने तय किया कि अगर न्याला रेड क्रॉस और इंडियन एंबेसी कोशिश करें, तो रेस्क्यू मुमकिन है।’ ‘मैंने स्विट्जरलैंड में रेडक्रॉस हेडक्वार्टर लेटर भेजा। भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी को लेटर लिखे। स्विट्जरलैंड के अधिकारी बहुत प्रोफेशनल थे। वे हर लेटर का जवाब देते थे। रेडक्रॉस ने विद्रोहियों से बात की और तय कराया कि आदर्श को सही-सलामत रखा जाए। इसी के बाद उन्हें जेल में खाना-पीना, कपड़े और दवाइयां दी गईं।’ ‘सूडान में सबसे बड़ा सवाल था कि किससे बात की जाए। पूरा शहर अलग-अलग आतंकी गुटों में बंटा हुआ है। हर इलाके का अपना लीडर है। रेडक्रॉस इंडियन एंबेसी के जरिए नेगोशिएशन करता है। आदर्श को पकड़ने वाले विद्रोही थे, इसलिए नेगोशिएशन में बहुत वक्त लगा।’ विधायक बोले- लोगों का काम के लिए विदेश जाना हमारी नाकामी
आदर्श का घर तिरतोल विधानसभा सीट में आता है। BJD नेता रमाकांत भोई यहां से विधायक हैं। उन्होंने आदर्श का मामला विधानसभा में भी उठाया था। वे कहते हैं, ‘जगतसिंहपुर जिले में पारादीप बंदरगाह है। यहां बड़ी इंडस्ट्री और फैक्ट्रियां हैं। ये दुख की बात है कि आदर्श को काम के लिए सूडान जैसे खतरनाक देश जाना पड़ा। यह हमारी व्यवस्था की बड़ी नाकामी है।’ वे कहते हैं, ‘सरकार को युवाओं को स्किल सिखानी चाहिए ताकि वे इंडस्ट्री की जरूरतें पूरी कर सकें। स्थानीय लोगों को नौकरी में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इससे उन्हें मजबूरी में घर छोड़कर बाहर नहीं जाना पड़ेगा।’ …………………………….. ये खबर भी पढ़ें- शादी में नोट उठाए, मदन ने साहिल को गोली मारी 29 नवंबर को CISF के हेड कॉन्स्टेबल मदन गोपाल तिवारी ने 14 साल के साहिल की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस को मिली शिकायत के मुताबिक, CISF जवान मदन के भाई की शादी थी। बारात में साहिल अपने दोस्तों के साथ नोट बीन रहा था। इसी पर गुस्साए मदन ने साहिल को पहले पीटा फिर पिस्तौल से सिर में गोली मार दी। हालांकि मदन का परिवार जानबूझकर गोली मारने के आरोप को गलत बता रहा है। पढ़ें पूरी खबर

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