‘सब काम पर चले जाते हैं तो मैं नीचे कुर्सी डालकर बैठ जाती हूं। अकेले ऊपर नहीं रह पाती। रात के 12 बजे तक जागती रहती हूं, लगता है कि अब बेटा दरवाजा खटखटाते हुए कहेगा, मम्मी खोलो। अगर मुझे मार देते तो ठीक रहता। 14 साल के बच्चे ने क्या बिगाड़ा था?‘ नीशा खातून बेटे साहिल को याद कर भावुक हो जाती हैं। बेटे की मौत के सदमे से परिवार अब भी उभर नहीं पाया है। आरोप है कि 29 नवंबर को CISF के हेड कॉन्स्टेबल मदन गोपाल तिवारी ने 14 साल के साहिल की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस को मिली शिकायत के मुताबिक, CISF जवान मदन के भाई की शादी थी। बारात में साहिल अपने दोस्तों के साथ नोट बीन रहा था। इसी पर गुस्साए मदन ने साहिल को पहले पीटा फिर पिस्तौल से सिर में गोली मार दी। हालांकि मदन का परिवार जानबूझकर गोली मारने के आरोप को गलत बता रहा है। आरोपी मदन पुलिस की हिरासत में है। साहिल का परिवार इंसाफ की मांग कर रहा है। घटना वाले दिन हुआ क्या था? साहिल का परिवार किस हाल में रह रहा है? आरोपी के परिवार की क्या दलील है। ये जानने के लिए दैनिक भास्कर दिल्ली के शाहदरा में घटनास्थल पर पहुंचा। सबसे पहले जानिए 29 नवंबर को क्या हुआ
शाहदरा में मानसरोवर पार्क इलाके में DDA के फ्लैट्स और कम्युनिटी हॉल है। पहले इसके बगल में ही मानसरोवर पार्क थाना हुआ करता था, लेकिन अब इसके पीछे शिफ्ट किया गया है। यहां से लगभग 500 मीटर दूर गली नंबर-14 में रेलवे ट्रैक के किनारे साहिल का परिवार रहता है। रेलवे ट्रैक और घर के बीच में एक दीवार खड़ी है। दीवार की एक तरफ घर और दूसरी तरफ कचरे का ढेर है। गंदगी के बीच बने 25 गज के एक मंजिला मकान में साहिल के पिता सिराजुद्दीन अंसारी और मां नीशा खातून 3 बच्चों के साथ रहते हैं। नीचे के हिस्से में मकान मालिक ने सामान भर रखा है। परिवार पहली मंजिल पर रहता है। संकरी सीढ़ियों से पहली मंजिल तक पहुंचने पर एक छोटा सा कमरा और शौचालय दिखता है। मकान का किराया 38 सौ रुपए है। घर पर पहले हमारी मुलाकात साहिल के पिता 42 साल के सिराजुद्दीन अंसारी से हुई। 6 महीने पहले उनके शरीर के एक हिस्से में लकवा मार गया था। इसीलिए वे काम पर नहीं जा पाते थे। ऐसे में 14 साल के साहिल का ही सहारा था। वो परचून की दुकान में दूध की सप्लाई करता था और उसी की कमाई से घर चलता था। पिता सिराजुद्दीन बताते हैं कि साहिल दुकान से रोजाना 9 बजे लौटता था। उस रात भी उसी वक्त लौटा। मोहल्ले में शादी थी और बाकी बच्चे बारात में लुटाए गए पैसे बटोर रहे थे। साहिल ने पैसे तो नहीं लूटे लेकिन वो वहीं खड़ा हो गया। तभी CISF जवान ने उसे पकड़ लिया और लात-जूते मारे। जवान नशे में धुत लग रहा था। साहिल बोला कि अंकल, मैंने कुछ नहीं किया। मेरी कोई गलती नहीं। फिर भी वो साहिल को पीटता रहा। फिर पिस्टल निकाली और गोली मार दी। साहिल को गोली मारकर आरोपी मदन कार में बैठकर भाग निकला। पुलिस ने जब दूल्हे और उसके पिता को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तब आरोपी मदन का पता लगा। CISF जवान मदन दूल्हे के मामा का बेटा है और छुट्टी लेकर शादी में आया था। वो इटावा के भरथना का रहने वाला है और कानपुर में पोस्टेड है। इसके बाद मानसरोवर थाना पुलिस ने आरोपी को अगले दिन सुबह भरथना से अरेस्ट कर लिया। बच्चे ने पत्थर मारने की कोशिश की इसलिए मारी गोली
सिराजुद्दीन दावा करते हैं, ‘जब मैं आरोपी CISF जवान से थाने में मिला था, तब वो साहिल को कसूरवार ठहरा रहा था। उसने कहा कि साहिल पैसे लूट रहा था। मैंने उसे भगाया लेकिन वो भागा नहीं। उलटा उसने पत्थर मारने की कोशिश की, इसलिए गोली मार दी।’ सिराजुद्दीन सवाल करते हुए कहते हैं, ’14 साल का बच्चा क्या कर सकता है। शादी में बच्चे का पैसे लूटना आम बात है।’ मां बोलीं- गोली आर-पार हो गई थी, शादी में नोट लूटने की बात झूठी
साहिल के पिता सिराजुद्दीन और मां नीशा इससे पहले 2020 में भी एक बेटा खो चुके हैं। उनके सबसे बड़े बेटे की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। अब साहिल की मौत से परिवार को एक और धक्का लगा है। साहिल की हत्या वाले दिन को याद करते हुए साहिल की मां नीशा की आंखों में आंसू आ जाते हैं। वे कहती हैं, ‘मैं रात करीब 10 बजे खाना बना रही थी। अचानक दो बच्चे भागते हुए आए और चिल्लाने लगे कि गोली मार दी, गोली मार दी। मुझे लगा कि शायद मजाक कर रहे हैं। दरवाजा खोला तो देखा चारों ओर भीड़ लगी हुई है। मैं भी भागकर शादी वाली जगह पहुंचीं।’ ‘वहां साहिल सड़क पर पड़ा था। उसके सिर में गोली लगी थी, जो आर-पार हो गई थी। मैंने छुआ तो सांसें थम चुकी थीं। उसकी ऑन-स्पॉट ही मौत हो गई। पुलिस ने मुझे हटा दिया। थाने से एम्बुलेंस आई और हम उसे जीटीबी हॉस्पिटल ले गए। वहां डॉक्टरों ने कहा कि बच्चा खत्म हो गया।‘ नीशा नोट लूटने की बात को गलत बताती हैं। वे कहती हैं, ‘साहिल पैसे कमाकर मेरे हाथ में देता था। फिर मैं ही उसे खर्च के लिए पैसे देती थी। उस दिन मैंने उसे 50 रूपए दिए थे। पुलिस को भी जेब से 60 रुपए मिले। पैसे लूटने का बहाना बनाया जा रहा है, साहिल तो बस साइड में खड़ा होकर सब देख रहा था।‘ घर चलाना मुश्किल, साहिल ही कमाता था
परिवार का हाल पूछने पर साहिल के पिता बताते हैं, ‘1999 में झारखंड के गोड्डा से मेरा परिवार कमाई की आस में दिल्ली आया था। परिवार में 7 बच्चे थे, जिनमें से 3 बेटियों की शादी हो गई। वहीं 2020 में एक बेटे की मौत के बाद तीन बेटों का परिवार बचा था।‘ ‘अब परिवार में दो लड़के और हम मियां-बीवी हैं। साहिल और बड़ा भाई मिलकर कमाते थे। मैं मजदूरी करता था, लेकिन हाथ में लकवा मारने के बाद से दिक्कत हो गई। अब हेल्पर का काम करता हूं, जिसमें 400-500 रुपए ही मिलते हैं। ऐसे में घर का खर्च चलाने में दिक्कत आती है।‘ घटना के 8-10 दिन बाद अब सिराजुद्दीन ने फिर से काम शुरू किया। पिता सिराजुद्दीन कहते हैं, ‘काम में दिल कहां लगता है? लोग आते-जाते रहते हैं। दुनिया कहेगी कि बच्चा मर गया और पिता काम पर निकल पड़े लेकिन गुजारा तो करना पड़ता है। हमें कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है। गांव वालों ने अंतिम संस्कार में थोड़ी मदद की लेकिन बाकी किसी ने मदद का कोई हाथ नहीं बढ़ाया।‘ दूसरे बच्चे पर भी चलाई थी गोली, वो बाल-बाल बचा
इस घटना का एक वीडियो सामने आया है। इसमें साहिल के सिर पर गोली लगी है और वे सड़क पर पड़े दिख रहे हैं। घटना वाली जगह पर खाने-पीने की कुछ दुकानें हैं। रात साढ़े नौ बजे के आस-पास जब साहिल को गोली मारी गई, तब यहां खाने की एक दुकान खुली हुई थी। जब हम इस दुकान पर पहुंचे तो यहां काम करने वाले एक वर्कर ने बताया, ‘उस दिन जब गोली चली तब लगा कि पटाखों की आवाज है। शादियों में अक्सर पटाखे जलते हैं। बाद में जब लड़के को गोली लगने की बात पता लगी तो हम दुकान बंद कर चुके थे। तुरंत पुलिस भी आ गई थी।’ घटना के वक्त साहिल का दोस्त 14 साल के संतोष (बदला हुआ नाम) भी ट्यूशन पढ़कर लौट रहा था। संतोष दावा करते हैं कि वहां दूसरा बच्चा भी था, जो बाल-बाल बच गया। उसे भी गोली मारी थी लेकिन वो नीचे लेट गया इसलिए बच गया। संतोष आगे बताते हैं, ’मैं ट्यूशन से लौट रहा था। रास्ते में साहिल सड़क पर पड़ा था। मैं और साहिल का छोटा भाई साजिम घर गए और आंटी को बताया। जब हम लौटे, तो पुलिस सबको हटा रही थी। कोई उसे उठा नहीं रहा था, न ही कुछ कर रहा था।’ संतोष भी पैसे लूटने की बात नहीं मानते। वे कहते हैं कि साहिल मेरा बचपन का दोस्त था। 6-7 साल से हम साथ थे। शादियों में हम दोनों साथ आते-जाते थे। शादी-ब्याह का मौसम चलता रहता है। हम बस आकर देखते और चले जाते थे। कभी पैसे नहीं लूटते थे। साहिल तो ऐसा बिल्कुल नहीं था। पुलिस बोली- आरोपी ने गुस्से में गोली चलाने की बात कबूली
आरोपी CISF जवान मदन गोपाल तिवारी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। शाहदरा के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत गौतम ने बताया कि आरोपी घटना के बाद तुरंत फरार हो गया था। वो गाड़ी में बैठकर दिल्ली के रास्ते इटावा भाग गया। पुलिस ने दूल्हे के पिता और दूल्हे से पूछताछ की तब पता लगा कि आरोपी इटावा के भरथना में रहता है। प्रशांत गौतम बताते हैं, ‘जानकारी मिलने पर जांच के लिए सीमापुरी के ASP और मानसरोवर थाना के SHO की निगरानी में टीम बनाई गई है। लोकल स्तर पर पूछताछ और विवाह स्थल पर लगे सीसीटीवी फुटेज की मदद से अगले ही दिन यानी 30 नवंबर को उत्तर प्रदेश से आरोपी को पकड़ लिया गया।‘ मानसरोवर थाने के SI सुनील कुमार भरथना गई टीम का हिस्सा थे। वे बताते हैं कि आरोपी ने घटना में इस्तेमाल लाइसेंसी .32 बोर की पिस्तौल को एक्सप्रेस-वे पर फेंक दिया था। हालांकि पुलिस रात को ही आरोपी के ठिकाने पर पहुंच गई। आरोपी को साथ दिल्ली लाते वक्त पिस्तौल और गाड़ी भी बरामद हो गई। आरोपी की फैमिली बोली- आरोप झूठे, हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे
आरोपी मदन गोपाल तिवारी का परिवार इटावा के भरथना में रहता है। परिवार में उसके अलावा पत्नी और दो बच्चे हैं। इटावा के भरथना में रहने वाले आरोपी के भाई सोनू से हमने फोन पर बात की। वे अपने भाई पर लगे आरोपों को गलत बताते हैं। सोनू दावा करते हैं, ‘मेरे भाई ने गोली जानबूझकर नहीं चलाई। बारात में काफी भीड़ थी और पिस्तौल लोडेड थी। भीड़-भाड़ में गलती से पिस्तौल चल गई और बच्चे को गोली लग गई।‘ आरोपी के नशे में होने की बात को भी सोनू गलत बताते हैं। वे कहते हैं कि सब कह रहे हैं कि मेरा भाई नशे में था लेकिन ये बात पूरी तरह से गलत है। मेरे भाई ने कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया है। सोनू कहते हैं कि परिवार अब कानूनी लड़ाई लड़ेगा। CISF के जवाब का इंतजार
आरोपी मदन गोपाल तिवारी CISF का हेड कॉन्स्टेबल है। उसकी फिलहाल कानपुर में पोस्टिंग थी। हमने मामले में CISF का पक्ष जानने की कोशिश की। CISF की आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए कॉन्टैक्ट पर कॉल नहीं उठा। इसके बाद हमने CISF को अपना सवाल मेल किया है। जवाब आने पर खबर में अपडेट करेंगे। हालांकि CISF के नियमों की बात करें तो अगर कोई जवान किसी आपराधिक मामले में 48 घंटे से ज्यादा समय तक हिरासत में रहता है तो उसे सस्पेंड कर दिया जाता है।
…………………… ये खबर भी पढ़ें… ‘सिर्फ मुसलमानों के घर तोड़े, अब हमें गोली मार दो‘ ‘अगर हम ही बांग्लादेशी हैं तो पहले दिन ही क्यों नहीं उजाड़ दिया? हिंदुओं को टारगेट क्यों नहीं करते? बस हमें मुसलमान होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। अगर इतनी ही नफरत है, तो एक गोली मारकर खत्म कर दो न। कम से कम ऐसी जिल्लत तो नहीं देखनी पड़ेगी। कम से कम बेघर होकर सड़क पर मरने-जीने की नौबत नहीं आएगी न।’ असम में नागांव जिले के लुटीमारी इलाके में रहने वाली रुबीना बेगम (बदला हुआ नाम) के घर 29 नवंबर को बुलडोजर चलाया गया। पढ़िए पूरी खबर…
शादी में नोट उठाए, मदन ने साहिल को गोली मारी:मां बोली- बस 14 साल का था, मुझे मार देते; CISF कॉन्स्टेबल है आरोपी
📅 Published: December 16, 2025 |
📂 Category: India National
