युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की जयंती कल राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाएगी। बहुत कम लोग जानते हैं कि स्वामी विवेकानंद ने अपना पहला शिष्य हाथरस में बनाया था। यह घटना 1888 की है, जब उन्होंने हाथरस सिटी स्टेशन के सहायक स्टेशन मास्टर शरतचंद्र गुप्ता को दीक्षा दी थी। स्वामी विवेकानंद उस समय काशी से कोलकाता की यात्रा पर थे और हाथरस जंक्शन रेलवे स्टेशन पर रुके थे। तत्कालीन सहायक स्टेशन मास्टर शरतचंद्र गुप्ता स्वामी जी के व्यक्तित्व से अत्यधिक प्रभावित हुए और उन्होंने उनसे शिष्य बनने की इच्छा व्यक्त की। गुरु दीक्षा देने से पहले स्वामी जी ने शरतचंद्र की एक अनोखी परीक्षा ली। इस परीक्षा में सहायक स्टेशन मास्टर को अपने ही स्टेशन के कुलियों से भिक्षा मांगनी पड़ी। शरतचंद्र इस परीक्षा में सफल रहे, जिससे यह सिद्ध हुआ कि उन्होंने अपना अहंकार त्याग दिया था। परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद स्वामी जी ने उन्हें अपना शिष्य बना लिया। शरतचंद्र ने अपनी नौकरी छोड़ दी और स्वामी जी के साथ चले गए, अपना नाम बदलकर स्वामी सदानंद रख लिया। स्वामी सदानंद ने रामकृष्ण मिशन के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए और स्वामी विवेकानंद के उपदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने जापान की यात्रा भी की। उनका निधन वर्ष 1911 में हुआ। फिल्मों और पुस्तकों में है इसका जिक्र स्वामी विवेकानंद द्वारा हाथरस में पहला शिष्य बनाने की इस घटना का जिक्र 1998 में बनी स्वामी विवेकानंद पर आधारित फिल्म में भी है, जिसमें अनुपम खेर ने स्वामी सदानंद का किरदार निभाया था। ‘द लाइफ ऑफ स्वामी विवेकानंद’ सहित कई पुस्तकों में भी इसका उल्लेख मिलता है। हालांकि, हाथरस सिटी स्टेशन पर स्वामी सदानंद को समर्पित एक शिला पट्टिका सौंदर्यीकरण के कारण हटा दी गई है।
स्वामी विवेकानंद ने हाथरस में बनाया पहला शिष्य:तत्कालीन स्टेशन मास्टर शरतचंद्र गुप्ता बने थे स्वामी सदानंद
📅 Published: January 11, 2026 |
📂 Category: India Up
