जौनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर में सोमवार को फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएमआरएआई) के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर विक्रय संवर्धन कर्मचारी (सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1976 को निरस्त किए जाने पर आपत्ति जताई। संगठन ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर कहा कि ओएसएच संहिता लागू होने से लाखों विशेष उद्यम (एसपीई) असुरक्षा की स्थिति में पहुंच गए हैं। एफएमआरएआई ने बताया कि वर्ष 1976 का यह अधिनियम विशेष रूप से विक्रय संवर्धन कर्मचारियों की सेवा शर्तों को विनियमित करने के लिए बनाया गया था। राज्यसभा की याचिका समिति ने भी एसपीई के लिए अलग कानून बनाने की सिफारिश की थी। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह अधिनियम 6 मार्च 1976 से लागू हुआ और बाद में केंद्र सरकार ने इसे अन्य 10 उद्योगों तक विस्तार दिया। अगस्त 2017 में औद्योगिक त्रिपक्षीय समिति ने भी इसकी धारा 12 के तहत वैधानिक नियम बनाए जाने की सिफारिश की थी। संगठन का आरोप है कि विशेष उद्यमों की मांगों को नजरअंदाज कर सरकार ने इस विशिष्ट कानून को व्यवसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता (ओएसएच संहिता) के तहत समाप्त कर दिया है। इससे न केवल इस शिल्प-विशिष्ट कानून का दायरा घटा है, बल्कि मौजूदा कवरेज और फायदा भी सीमित हो गए हैं। एफएमआरएआई ने दावा किया कि नई श्रम संहिताओं के लागू होने से देशभर के एसपीई और अन्य श्रमिकों में असुरक्षा बढ़ी है। वर्षों के संघर्ष से मिले अधिकार और सुविधाएं इन संहिताओं में संरक्षित नहीं हैं, बल्कि कर्मचारियों को और अधिक असुरक्षित स्थिति में धकेल दिया गया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि संहिताओं को बिना संशोधन लागू किया गया, तो नियोक्ताओं की शोषणकारी गतिविधियां बढ़ेंगी और विशेष उद्यमों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
जौनपुर कलेक्ट्रेट में मेडिकल सेल्स प्रतिनिधियों का प्रदर्शन:बोले-विशेष कानून खत्म करना सही नहीं, डीएम को सौंपा ज्ञापन
📅 Published: November 24, 2025 |
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