बैंक खाते और लॉकर पर वारिसों का हक:चंडीगढ़ कोर्ट ने जारी किया सक्सेशन सर्टिफिकेट,बैंक खाता और लॉकर की जांच, दोनों बहनों ने दी सहमति

📅 Published: December 1, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

चंडीगढ़ कोर्ट में चल संपत्ति बैंक खाते और लॉकर के अधिकार को लेकर दायर याचिका पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) राहुल गर्ग की अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि आशा शर्मा की पूरी चल संपत्ति पर उनके बेटे और दोनों बेटियों का समान हक है। इसलिए कोर्ट ने तीनों के नाम पर यह संपत्ति लेने का सक्सेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि दिवंगत आशा शर्मा की संपत्ति पर उनके बेटे और दोनों बेटियों का ही कानूनी हक बनता है और तीनों को बराबर हिस्सा मिलेगा। इसी वजह से कोर्ट ने सक्सेशन सर्टिफिकेट अशिष शर्मा, अंजली जैन और प्रीति नेगी इन तीनों के नाम जारी कर दिया। अदालत ने यह निर्णय इस आधार पर दिया कि न तो परिवार में किसी ने आपत्ति जताई और न ही पब्लिक से कोई दावा सामने आया। अदालत ने सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच कर यह माना कि याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए कागजात सही और विश्वसनीय हैं। बैंक खाता और लॉकर की जांच मामले में याचिकाकर्ता अशिष शर्मा ने बताया था कि उनकी मां आशा शर्मा का 17 जुलाई 2021 को निधन हुआ था। उनके नाम पर एसबीआई, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, सेक्टर-12 चंडीगढ़ में बचत खाता और लॉकर था, जिसमें कोई नॉमिनी नहीं था। अदालत के निर्देश पर बैंक मैनेजर ने लॉकर खोलकर उसमें मौजूद सभी वस्तुओं की सूची और मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में लॉकर में रखे सामान का कुल बाजार मूल्य ₹15,42,618 दर्ज किया गया। दोनों बहनों ने दी सहमति नोटिस जारी होने के बाद दिवंगत की दोनों बेटियां अंजली जैन और प्रीति नेगी ने लिखित रूप से कहा कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और सक्सेशन सर्टिफिकेट जारी किया जा सकता है। इसके अलावा, जनरल पब्लिक को जारी नोटिस पर भी कोई दावा नहीं आया, जिसके चलते अदालत ने पब्लिक को एक्स-पार्टी कर दिया। पहले जमा करें इंडेम्निटी बॉन्ड अदालत ने साफ कहा कि आशा शर्मा के बैंक खाते में जितने भी पैसे हैं, और उस पर जो ब्याज लगा है, वह तीनों बच्चों में बराबर-बराबर बाँटा जाएगा। इसी तरह अदालत ने यह भी कहा कि लॉकर में जो-जो सामान रखा हुआ है, वह भी तीनों के बीच बराबर बांटा जाएगा। साथ ही, सक्सेशन सर्टिफिकेट देने से पहले तीनों को एक-एक इंडेम्निटी बॉन्ड और जमानतदार देना होगा, ताकि भविष्य में कोई विवाद होने पर कानूनी सुरक्षा बनी रहे।

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