अयोध्या में कभी तापमान में अचानक वृद्धि तो कभी गिरावट के कारण सरसों की फसल पर माहू (एफिड) कीट का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। खासकर पछेती सरसों की फसल में इसका असर अधिक देखा जा रहा है, जिससे उत्पादन पर भारी खतरा मंडरा रहा है। इस वर्ष अयोध्या में करीब 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में सरसों की खेती की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। कीट वैज्ञानिक डॉ. रवि मौर्य के अनुसार माहू कीट फसल को बढ़वार की अवस्था से लेकर फलियां बनने तक प्रभावित करता है। इसके लक्षण सरसों और तोरिया में स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। छोटे-छोटे हरे रंग के कीट फूलों के गुच्छों के पास बड़ी संख्या में जमा होकर पुष्प के निचले भाग से रस चूसते हैं। अधिक प्रकोप होने पर फूल सूखकर नष्ट हो जाते हैं, जिससे उपज में भारी कमी आ सकती है। किसान रामकुमार, राजित राम, वेद प्रकाश, दीनानाथ और महेश चौहान का कहना है कि नहर किनारे खेत होने के कारण समय पर जुताई संभव नहीं हो पाती, जिससे उन्हें सरसों की लेट वैरायटी बोनी पड़ती है। इस बार मौसम में बदलाव के चलते माहू का प्रकोप और बढ़ गया है। घनी फसल में दवा का छिड़काव करना भी कठिन हो रहा है। माहू कीट सरसों के साथ गेहूं को भी नुकसान पहुंचा रहा है। यह पत्तियों के भीतर छिपकर रस चूसता है, जिससे पत्तियां सिकुड़ जाती हैं और बालियां निकलने में बाधा आती है। विशेषज्ञों ने प्रारंभिक प्रकोप पर एक लीटर नीम का तेल 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव की सलाह दी है। अधिक प्रकोप की स्थिति में डाईमेथोएट या इमिडाक्लोप्रिड व थायोमैथोक्साम के छिड़काव से नियंत्रण संभव है। समय पर पहचान और उचित प्रबंधन से फसल को बचाया जा सकता है।
अयोध्या में सरसों पर माहू कीट का प्रकोप:पछेती फसल पर असर, उत्पादन घटने का खतरा मंडराया, जिले में 5000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हो रही खेती
📅 Published: February 15, 2026 |
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