अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत करते हुए अरब सागर और लाल सागर में विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन, यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट और कई मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत तैनात किए हैं। साथ ही कतर, बहरीन, सऊदी अरब, इराक और जॉर्डन के सैन्य अड्डों से वायुसेना की सक्रियता बढ़ी है। अमेरिका अब ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों व कमांड सेंटरों पर समुद्र और आसमान दोनों से हमले की स्थिति में आ गया है। उधर, ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह जून, 2025 की तरह कतर के अमेरिकी ठिकानों और इजराइल पर मिसाइलें और ड्रोन दाग सकता है।
कुछ घंटों में हमला संभव: विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका को अब किसी अतिरिक्त जमावड़े की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि राजनीतिक आदेश मिलता है, तो कुछ ही घंटों में सीमित या बड़े पैमाने की सैन्य कार्रवाई संभव है। यही वजह है कि इसे हमले से पहले की स्थिति के तौर पर देखा जा रहा है।
वार्ता संभव: जंग की आहट के बीच सुलह की कोशिशें जारी हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची हमले को टालने के लिए अंकारा जा रहे हैं। तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन ने ट्रम्प व ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच वीडियो वार्ता का प्रस्ताव रखा है। अराघची इस पर चर्चा करेंगे।
मोर्चाबंदी: ईरानी सेना को आतंकी संगठन घोषित किया ब्रसेल्स| यूरोपीय संघ (ईयू) ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। यह फैसला विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की हिंसक कार्रवाई के चलते लिया गया है। रिवोल्यूशनरी गार्ड के शीर्ष कमांडरों समेत 15 अधिकारियों और 6 संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी करने वाली संस्थाएं भी हैं। यूरोप में इनकी संपत्तियां जब्त की जाएंगी और उनकी यात्रा पर रोक लगेगी।
