आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय पंखिया सेम कर रहा विकसित:कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह और कैंसर रोगियों के लिए फायदेमंद, किसानों की बढ़ेगी इनकम

📅 Published: November 27, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज के सब्जी विज्ञान विभाग ने सेम की एक नई उत्कृष्ट प्रजाति ‘पंखिया सेम’ विकसित कर रहा है। इस प्रजाति के फल, फूल, पत्ते, तने, बीज और जड़ सभी खाने योग्य हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह कोलेस्ट्रॉल घटाने, मधुमेह और कैंसर रोगियों के लिए लाभकारी है। पंखिया सेम प्रोटीन, खनिज, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट का एक अच्छा स्रोत है। पंखिया सेम को इसके उच्च पोषक तत्वों से भरपूर हरे फलियों, कंदो, पत्तियों, बीजों के कारण वन स्पेसीज सुपरमार्केट के रूप में जाना जाता है।इसकी देखभाल और लागत कम है, जबकि पैदावार भरपूर मिलती है। इसे ‘वंडर वेजिटेबल’ भी कहा जाता है क्योंकि यह एकमात्र ऐसी सब्जी है जिसके हर हिस्से का सेवन किया जा सकता है। यह सब्जी वर्तमान में उत्तर-पूर्वी भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में किचन गार्डन में पाई जाती है। हालांकि, इस पर अब तक कोई विधिवत वैज्ञानिक शोध नहीं हुआ था। इसकी पोषण संबंधी महत्ता और आर्थिक लाभ को देखते हुए सब्जी विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ आस्तिक झा के द्वारा इस सब्जी की किस्म विकसित करने हेतु व्यापक शोध कार्य किया जा रहा है। पंखिया सेम की फलियां चार किनारों वाली होती हैं, जिनके किनारों पर पंख जैसी संरचनाएं होती हैं, इसलिए इसे ‘पंखिया सेम’ कहा जाता है। यह सभी आवश्यक पोषक तत्वों और रेशे का एक प्रचुर स्रोत है, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में सहायक है। शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का एक उत्कृष्ट विकल्प है। डॉ. आस्तिक झा ने बताया कि पंखिया सेम किसानों के लिए आय का एक नया और लाभकारी विकल्प बनेगी। इसकी खेती से कम लागत में प्रति हेक्टेयर दो से तीन लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस सेम में जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन क्षमता है। डॉ. आस्तिक झा के अनुसार, संस्थान में 80-82 जर्मप्लाज्म रोपित किए गए हैं, जो विभिन्न आकार और रंगों में उपलब्ध हैं। आने वाले दिनों में पूर्वांचल के साथ-साथ अन्य राज्यों के किसानों को भी इसके बीज उपलब्ध कराए जा सकेंगे।

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