15 जनवरी को लगने लगा कि ट्रम्प अब कुछ ही घंटे में ईरान पर हमले का आदेश दे सकते हैं। नेतन्याहू का विमान इजराइली एयर स्पेस से बाहर कहीं ‘सेफ जगह’ पर चला गया। कतर के अमेरिकी एयरबेस से सैनिक हटाए जाने लगे। पेंटागन के आसपास पिज्जा के ऑर्डर्स बढ़ गए। ऐसा तभी होता है, जब अमेरिका कोई बड़ा एक्शन लेने वाला होता है। फिर अचानक ईरान को लेकर ट्रम्प के तेवर नरम पड़ गए। आखिर ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटे ट्रम्प, नेतन्याहू ने किस मजबूरी में ट्रम्प से हमला टालने को कहा, क्या अब सुप्रीम लीडर खामेनेई की सत्ता बनी रहेगी, जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: ईरान पर हमले का आदेश देने से पीछे क्यों हटे ट्रम्प?
जवाब: 13 जनवरी को ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर ईरान के प्रदर्शनकारियों से कहा, ‘प्रोटेस्ट करते रहिए। मदद रास्ते में है।’ कई अमेरिकी रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प ईरान पर हमले का मन बना चुके थे, लेकिन अचानक उनके पीछे हटने की 4 बड़ी वजहें हैं… 1. नेतन्याहू ने ट्रम्प को हमला करने से मना किया 2. सऊदी अरब, कतर जैसे देशों ने विरोध किया 3. अमेरिका अभी हमले के लिए पूरी तरह तैयार नहीं 4. ईरान में प्रदर्शन कमजोर हुए, फांसी टाली गईं सवाल-2: सऊदी अरब, इजराइल ने ट्रम्प को हमला करने से क्यों रोका?
जवाब: NYT की रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत, कतर, सऊदी अरब जैसे देशों ने अमेरिकी ऑफिसर्स से कहा कि ईरान पर हमला हुआ, तो इलाके में एक बड़ा संघर्ष छिड़ जाएगा। ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेसेज को टारगेट कर सकता है। इससे पहले 22 जून 2025 को जब अमेरिका ने अपने B2 बॉम्बर विमानों से ईरान की 3 न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए थे, तब ईरान ने अगले ही दिन कतर में अमेरिकी एयरबेस ‘अल-उदैद’ पर एयरस्ट्राइक कर दी थी। जबकि कतर, इजराइल और ईरान के बीच सीजफायर के लिए मध्यस्थता कर रहा था। दरअसल, मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 19 मिलिट्री बेस हैं। इनमें से 8 अरब देशों में अमेरिका ने स्थायी अड्डे बनाए हैं। इनमें बहरीन, इजिप्ट, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और UAE जैसे देश हैं। ये सभी देश अमेरिका के आर्थिक और डिफेंस मामलों में सहयोगी हैं। तेल व्यापार और डिफेंस पार्टनरशिप के बदले अमेरिका इन देशों को सुरक्षा की गारंटी देता है। वहीं ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को समर्थन देने के बावजूद इजराइल नहीं चाहता कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर हमला करे। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में स्ट्रैटजिक स्टडीज प्रोग्राम के डिप्टी डायरेक्टर विवेक मिश्र के मुताबिक, इसके पीछे 2 वजहें हैं… सवाल-3: क्या ईरान में सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट रुकने वाले हैं?
जवाब: ईरान में प्रोटेस्ट धीमा पड़ता हुआ दिख रहा है, हालांकि इसके पूरी तरह खत्म होने के संकेत नहीं हैं। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के सख्त रुख के चलते हालात अस्थायी रूप से शांत होते नजर आ रहे हैं। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों के लोगों ने कहा है कि कुछ दिन पहले सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधे टकराव हो रहे थे, लेकिन अब शांति है। सड़कों पर पहले जैसी भीड़, गोलीबारी और आगजनी नहीं दिख रही। ईरान प्रशासन की तरफ से भी अब प्रदर्शनकारियों के लिए नरम भाषा में संदेश जारी किए जा रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि सरकार देश में स्थिति सुधारने, भ्रष्टाचार और मुनाफाखोरी पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही है। सवाल-4: क्या वाकई प्रदर्शनकारियों की फांसी पर रोक लगा दी गई है?
जवाब: ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर तेज ट्रायल और जल्दी से फांसी देने का ऐलान किया था। हालांकि, अब फांसी पर रोक लगा दी गई है। NYT के मुताबिक, दो इजराइली ऑफिसर्स ने कहा कि ईरान में सरकार की सख्त कार्रवाई और इंटरनेट सर्विसेज ठप होने के चलते प्रोटेस्ट कमजोर हुए हैं और प्रदर्शनकारियों की हत्याओं में कमी आई है। यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका की धमकी के बाद ईरान ने प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रोकी हैं। इरफान को फांसी दिए जाने की चर्चा के बाद ट्रम्प ने कहा था , ‘अगर वे फांसी देते हैं, तो आप कुछ भयानक देखेंगे।’ ब्रिटिश वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि ईरान में करीब 12 हजार लोगों की मौत हुई है। ज्यादातर लोग गोली लगने से मारे गए हैं। हालांकि अमेरिकी संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स ने बताया कि अब तक करीब 2,550 हत्याएं हुई हैं। चीन के बाद ईरान दुनिया का दूसरा देश है, जहां सजा के तौर पर सबसे ज्यादा लोगों को फांसी दी जाती है। इसके बाद दूसरे स्थान पर चीन है। 2025 में ईरान ने करीब 1,500 लोगों को फांसी दी थी। सवाल-5: क्या ईरान में खामेनेई की इस्लामिक सत्ता बनी रहेगी?
जवाब: ईरान में जब विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, उस समय ट्रम्प ने वेनेजुएला से राष्ट्रपति मादुरो को उठवा लिया था। इसके बाद जब ट्रम्प ने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को अपना समर्थन दिया, तो कहा जाने लगा कि अमेरिका खामेनेई का तख्तापलट करवा सकता है। विवेक मिश्र कहते हैं कि जब तक ईरान में सेना पर खामेनेई का कंट्रोल है, उन्हें हटाना या उनका तख्तापलट करना मुश्किल है। कमरतोड़ महंगाई के बावजूद ईरान में वेनेजुएला जैसे राजनीतिक हालात नहीं हैं। वहां कोई विपक्ष नहीं है और न ही विरोध प्रदर्शनों का कोई एक लीडर है। ईरान के आखिरी राजशाही शासक रहे मोहम्मद शाह के बेटे रजा पहलवी अमेरिका में रह रहे हैं। हालांकि ट्रम्प ने कहा है कि वह ईरान में सत्ता संभालने के लिए अभी तैयार नहीं हैं। रजा पहलवी ट्रम्प से मिलना भी चाहते थे, लेकिन ट्रम्प नहीं मिले। ईरान को उसके सहयोगी देशों से भी मदद मिल रही है। दरअसल, ईरान में इंटरनेट पर बैन के बाद मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने ईरान में फ्री इंटरनेट देना शुरू कर दिया था। कई शहरों में ईरान ने इस सर्विस को भी बंद कर दिया। विवेक मिश्रा कहते हैं कि स्टारलिंक को ठप करने की तकनीकी क्षमता ईरान में नहीं है। उसे चीन जैसे देश ये तकनीकी मदद दे रहे हैं। सवाल-6: क्या अमेरिका वाकई ईरान पर हमला करने वाला था?
जवाब: 14-15 जनवरी के घटनाक्रम से ईरान पर अमेरिका के बड़े हमले के कयास लगाए जा रहे थे… सवाल-7: क्या ट्रम्प आगे ईरान पर हमले का आदेश दे सकते हैं?
जवाब: हां, आने वाले कुछ दिनों में ईरान पर अमेरिकी हमले की संभावनाओं को खारिज नहीं किया जा सकता। इसके पीछे 2 बड़े तर्क हैं…
1. ट्रम्प के इरादे पर भरोसा नहीं किया जा सकता 2. अमेरिका सैन्य तैयारी का समय ले रहा विवेक मिश्र कहते हैं कि टैक्टिकली अभी अमेरिका के लिए ईरान पर हमले का सबसे बढ़िया मौका है। ईरान इस समय सबसे ज्यादा कमजोर है। इस पूरे तनाव की जड़ ईरान के न्यूक्लियर बम बनाने की कोशिश है। ऐसे सबूत नहीं हैं कि ईरान ने अपना वो प्रोग्राम रोक दिया है। इसलिए अमेरिका अपने मुताबिक सत्ता लाकर ईरानी तेल पर कब्जा और न्यूक्लियर खतरे को जड़ से खत्म करना चाहता है। —– रिसर्च सहयोग- ऐश्वर्य राज —– ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर: नेतन्याहू ने इजराइल छोड़ा, पेंटागन में पिज्जा खपत बढ़ी, युद्धपोत मुड़े; 7 संकेत बता रहे ईरान पर जल्द हमला करेगा अमेरिका इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के देश से बाहर जाने की खबरें हैं, अमेरिकी युद्धपोत मिडिल ईस्ट की तरफ मुड़ चुके हैं, ईरान के एयरस्पेस से विमान गायब हैं और पेंटागन में पिज्जा की डिमांड बढ़ गई है। ये सभी बातें इशारा कर रही हैं कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान पर बड़ा हमला कर सकता है… शायद आज रात ही। पूरी खबर पढ़ें…
ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटा अमेरिका:नेतन्याहू ने किस मजबूरी में ट्रम्प को रोका; क्या बरकरार रहेगी खामेनेई की इस्लामिक सत्ता
📅 Published: January 17, 2026 |
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