‘ईरान में हम सब अच्छे हैं। शाम को प्रदर्शन होते हैं, लेकिन हम हॉस्टल से नहीं निकलते। आप लोग ज्यादा टेंशन मत लेना। यहां महंगाई की वजह से प्रदर्शन हो रहे हैं। 6 बजे के बाद कर्फ्यू लग जाता है। अभी हमें ईरान छोड़कर भारत लौटने को नहीं कहा गया है। ये भी नहीं पता है कि हम लौटेंगे ही, इसलिए इंतजार मत करना।‘ कश्मीर के बडगाम की रहने वाली अनीका जान ईरान में MBBS की पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने अपनी खैरियत बताने के लिए एक वीडियो फैमिली को भेजा है। ईरान में 28 दिसंबर से महंगाई को लेकर सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं। इंटरनेट और मोबाइल सेवा बंद है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका के दखल के बाद प्रदर्शन हिंसक हो गए। अब तक 2,677 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 19,097 लोग अरेस्ट किए गए हैं। ईरान में प्रदर्शन और हिंसा के बीच अनीका की तरह भारत के करीब 3 हजार मेडिकल स्टूडेंट्स फंसे हैं। परिवारों का आरोप है कि तेहरान में इंडियन एंबेसी मदद नहीं कर रही है। श्रीनगर में रहने वाले अब्दुल हमीद कहते हैं कि बैंक बंद हैं और बच्चों के पास पैसे खत्म हो गए हैं। रोजमर्रा के सामान खरीदना मुश्किल है। सरकार ने कहा है कि भारतीय नागरिक किसी भी तरह ईरान से निकल जाएं। बच्चे फ्लाइट के टिकट कहां से खरीदें। सरकार को उन्हें वापस लाना चाहिए। हमने कश्मीर में कुछ परिवारों से बात कर ईरान में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स का हाल जाना। स्टूडेंट्स के परिवारों से बात…
हॉस्टल में कैद स्टूडेंट्स, खाने-पीने का सामान खत्म हो रहा
कश्मीर के अनंतनाग में रहने वाले हिलाल अहमद भट की बेटी सहर तेहरान यूनिवर्सिटी से MBBS की पढ़ाई कर रही हैं। हिलाल बताते हैं, ‘वहां हालात बहुत खराब हैं। बेटी रोज परेशान हो रही है। हमारे रिश्तेदार और यार-दोस्त हमें दिन में 10-10 बार फोन करके उसकी खैरियत पूछ रहे हैं। वो जानना चाहते हैं कि सहर कब और कैसे वापस आ रही है।’ क्या एंबेसी से बच्चों को कोई मदद मिल रही है? इस पर हिलाल बताते हैं, ‘अफसर बेटी का नाम लिखकर ले गए थे और उसका पासपोर्ट भी लिया था। 15 जनवरी की शाम सहर का फोन आया, तो उसने बताया कि उसे पासपोर्ट लौटा दिया है। आसपास के लोग बार-बार कह रहे हैं कि यहां हालात बिगड़ रहे हैं और आप लोग निकल जाइए। बेटी के कॉलेज वाले भी ईरान छोड़ने की सलाह दे रहे हैं।’ बेटी ने वहां के हालात के बारे में क्या बताया? हिलाल कहते हैं, ‘महंगाई आसमान छू रही है। बच्चे हॉस्टल से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। उन्हें खाने-पीने की बहुत दिक्कत हो रही है। 250 ग्राम की तेल की बोतल 300 से 400 रुपए में मिल रही है। एक किलो चावल की कीमत हजार रुपए पहुंच गई है। उनके लिए रोजमर्रा का सामान खरीदना मुश्किल हो गया है।’ क्या महंगाई की वजह से ही हालात बिगड़े हैं? इस पर वे कहते हैं, ‘नहीं, वहां पहले भी महंगाई थी, लेकिन विरोध बढ़ने के बाद से दिक्कत बढ़ गई है। अब खाने-पीने के सामान की कमी हो गई है। बच्चों ने जो सामान पहले से स्टोर करके रखा था, अब वो भी खत्म हो रहा है। हमारे बच्चे बहुत मुश्किलों में जी रहे हैं।’ वहां लोगों के जख्मी होने की बात सामने आ रही है? इस पर हिलाल बताते हैं, ‘वहां रहने वाले लोग तो ये भी बता रहे हैं कि लाखों लोग जख्मी हैं, लेकिन हम ज्यादा नहीं जानते हैं। बेटी ने इतना जरूर बताया था कि प्रदर्शन के दौरान कश्मीर की एक लड़की जख्मी हुई है। वो कौन है और किस शहर की रहने वाली है, ये नहीं जानते।’ हिलाल बेटी की वतन वापसी के लिए सरकार से गुजारिश करते हुए कहते हैं, ‘किसी भी तरह हमारी बेटी को वहां से निकाल लाएं। सरकार जो चाहे कर सकती है। सरकार चाहे तो रोज 10 फ्लाइटें चलाकर ईरान में फंसे लोगों को निकाल सकती है। उनके लिए ये कोई काम बड़ा नहीं है। फिर कुछ करके जल्द हमारे बच्चों को भी वहां से निकाल लाइए।’ एंबेसी एयरलिफ्ट नहीं कर रही, बच्चे टिकट कैसे कराएं
इसके बाद हमने श्रीनगर के रहने वाले सुहेल अहमद काजी से बात की। उनके दोनों बच्चे तेहरान यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। वे बताते हैं, ‘इंटरनेट बंद होने की वजह से बेटे और बेटी दोनों से ही पिछले 7-8 दिन से कॉन्टैक्ट नहीं हो पा रहा था। 15 जनवरी को ISD कॉल पर दोनों से बात हो सकी। मुश्किल से एक से दो मिनट की बात करने के बाद कॉल कट गया।’ वे कहते हैं, ‘सबकी तरह हम भी अपने बच्चों की सलामती चाहते हैं। सरकार से यही गुजारिश है कि अगर वहां बच्चों को किसी तरह का खतरा है और उन्हें निकालने की जरूरत है तो निकाला जाए।’ श्रीनगर की ही रहने वाली रेहाना अख्तर की बेटी एलीजा भी तेहरान यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। वे बताती हैं, ‘अब तक तो बच्चे गाइडलाइन फॉलो कर रहे थे। घर वापसी की उम्मीद में जैसे-तैसे हॉस्टल में रहकर ही दिन काट रहे थे। 16 जनवरी को एंबेसी ने अचानक बच्चों से कह दिया कि अपने खर्च पर ईरान से निकलो।’ ‘बच्चों ने रिक्वेस्ट भी की थी कि उनके पास पैसे नहीं हैं, ऐसे में टिकट कैसे कराएं। इंटरनेट बंद है, ऐसे में फैमिली भी टिकट नहीं करा सकती है। आप हमें एयरलिफ्ट करने में मदद करिए, लेकिन एंबेसी ने साफ मना कर दिया। अफसरों ने कहा कि हमने एक बार आपको एयरलिफ्ट किया, अब नहीं कर सकते हैं।’ ‘एंबेसी बच्चों पर ही दबाव बना रही है कि वे जल्द से जल्द यहां से निकलने की कोशिश करें। इस वक्त फ्लाइट बहुत महंगी हो गई है। बच्चों के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे टिकट कराकर घर लौटे सकें।’ बच्चों के पास टिकट के पैसे नहीं, मां-बाप लाचार, सरकार मदद करे
श्रीनगर के रहने वाले सुलेमान अहमद का बेटा भी ईरान में पढ़ रहा है। वे जम्मू-कश्मीर सरकार, विदेश मंत्रालय और भारतीय एंबेसी से अपील करते हुए कहते हैं, ‘अधिकारियों को स्टूडेंट्स की मुश्किलों को गंभीरता से लेना चाहिए ताकि बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर न हो और वे सुरक्षित रहें।’ ‘हम उनके पेरेंट्स हैं, लेकिन इस वक्त उनके लिए कुछ भी नहीं कर सकते हैं क्योंकि हम लाचार हैं। हमारे पास न तो इतने पैसे हैं और न ही वहां जाने का कोई साधन है। अभी बच्चों के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे टिकट वगैरह करा सकें। सरकार ने ईरान-इजराइल जंग के दौरान भी स्टूडेंट्स को एयरलिफ्ट कराया था। इस बार भी उसी तरह कराना चाहिए। सरकार तय करे कि हमारे बच्चे घर तक सुरक्षित पहुंचें।’ श्रीनगर के ही रहने वाले अब्दुल हमीद कहते हैं, ‘ईरान की स्थिति बहुत खराब है। आज तक हमारी राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर एक भी बयान जारी नहीं किया कि हमें थोड़ा सुकून मिल सके। हमारी उनसे अपील है कि वे विदेश मंत्रालय के साथ बातचीत करके हमारे बच्चों को ईरान से निकालने की कोशिश करें।’ ‘जबसे हमने सुना है कि इंडियन एंबेसी ने स्टूडेंट्स से कहा है कि वो अपने टिकट का इंतजाम खुद करें तो हमारा तनाव बढ़ गया है क्योंकि इस वक्त ये मुमकिन नहीं है। वहां बच्चे बहुत लाचार हैं। बाजार बंद हैं, बैंक बंद हैं, उनके पास पैसे नहीं है। वो बहुत परेशान और निराश हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि सरकार ठोस और वाजिब कदम उठाए और एंबेसी की मदद से बच्चों को घर वापस लाए।’ स्टूडेंट्स को उनके हाल पर छोड़ा, सरकार के एक्शन से मायूस
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) के नेशनल कन्वीनर नासिर खुएहामी ने बताया कि ईरान में करीब 3 हजार भारतीय स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं। ये अलग-अलग शहरों जैसे मशहद, तेहरान और शिराज में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से करीब 2 हजार स्टूडेंट्स कश्मीर घाटी के हैं। नासिर कहते हैं, ‘भारत सरकार ने एक सलाह जारी की है, जिसमें भारतीय नागरिकों, स्टूडेंट्स और युवा पेशेवरों से ईरान छोड़ने की गुजारिश की गई है। हालांकि ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और मौजूदा हालात के बीच स्टूडेंट्स परेशान हैं कि वे कहां जाएं। उनके लिए अकेले निकलना सेफ नहीं है। स्टूडेंट्स के साथ ही उनके पेरेंट्स भी परेशान हैं कि उन्हें ईरान से कैसे निकाला जाए।‘ ‘कई पेरेंट्स ने जम्मू-कश्मीर सरकार से कॉन्टैक्ट कर गुजारिश की है कि इस मामले को भारत सरकार के साथ उठाए। हमने भी भारत सरकार से इस मामले में दखल देने और स्टूडेंट्स की वापसी का इंतजाम करने के लिए लेटर लिखा है। जैसे पिछले कई मौकों पर अभियान चलाकर भारतीयों को निकाला गया, वैसे ही इस बार भी किया जाए।‘ ‘हालांकि भारत सरकार की तरफ से अब तक ऐसा कुछ नहीं बताया गया है कि स्टूडेंट्स को निकालने के लिए कोई इंतजाम किया गया है या नहीं। उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। स्टूडेंट्स से कहा जा रहा है कि वे खुद फ्लाइट बुक कर घर लौटें। ऐसे में उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसलिए हमारी भारत सरकार से अपील है कि वो स्टूडेंट्स की सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए उनके लौटने का इंतजाम करे।‘ भारतीयों को एयरलिफ्ट करने वाला ‘ऑपरेशन स्वदेश’ रुका
ईरान से केंद्र सरकार ने भारतीयों को एयरलिफ्ट करने के लिए ‘ऑपरेशन स्वदेश’ शुरू किया है। पहली स्पेशल फ्लाइट 16 जनवरी को तेहरान से नई दिल्ली पहुंचने वाली थी। हालांकि इसे स्थगित कर दिया गया है। तेहरान में इंडियन एंबेसी के अधिकारियों ने बताया कि अभियान को फिलहाल स्थगित किया गया है। दूतावास के अधिकारी स्टूडेंट्स के सीधे संपर्क में हैं और अगर उन्हें निकालने के लिए जरूरत पड़ी तो उन्हें बताया जाएगा। ईरान से कुछ भारतीय स्टूडेंट्स खुद फ्लाइट बुक करके भारत लौट रहे हैं। इनमें से ज्यादातर कश्मीर के रहने वाले हैं। स्टूडेंट्स का एक ग्रुप शिराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से शारजाह होते हुए नई दिल्ली पहुंच रहा है। भारतीय नागरिकों को ईरान न जाने की सलाह
15 जनवरी को विदेश मंत्री एस जयशंकर की ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत हुई। उन्होंने ईरान के हालातों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय (MEA) ने भारतीय नागरिकों को ईरान न जाने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं। भारत सरकार की ये एडवाइजरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस धमकी के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि अगर ईरान देशभर में हो रहे प्रदर्शनों का हिंसा से जवाब देना जारी रखता है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
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ये खबर भी पढ़ें… क्या पाकिस्तान से आए लोगों ने ईरान में भड़काई हिंसा ईरान का हाल बता रहे अहमद अब्बास राजधानी तेहरान में रहते हैं। वे दावा करते हैं कि बढ़ती महंगाई से लोगों में बेचैनी थी। पेट्रोल की कीमत 15 से बढ़कर 25 रुपए हो गई। 10 रुपए की रोटी 15 रुपए में मिलने लगी। इसके विरोध में लोग पहली बार 28 दिसंबर 2025 को तेहरान की सड़कों पर उतरे। अहमद का दावा है कि अमेरिका और इजराइल के दखल से प्रोटेस्ट हिंसक हो गया। देश में बीते 17 दिन में 2500 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। पढ़िए पूरी खबर…
ईरान में फंसे भारतीय स्टूडेंट, पैसे खत्म, हॉस्टल में कैद:फैमिली बोली- बच्चे चावल नहीं खरीद पा रहे, सरकार कह रही खुद टिकट खरीदो
📅 Published: January 17, 2026 |
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