एएमयू में 7 साल से छात्र संघ चुनाव नहीं:छात्रों ने फिर खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, वीसी पर वादा खिलाफी का आरोप; बोले– साजिशन टाले जा रहे चुनाव

📅 Published: November 21, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में लगातार सात वर्षों से छात्र संघ चुनाव न होने के मुद्दे पर विवाद फिर तेज हो गया है। एलएलएम के छात्र कैफ हसन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में नई याचिका दाखिल की है। आरोप लगाया कि परीक्षा के कार्यक्रम आगे बढ़ाने से लग रहा है कि एएमयू इंतजामिया और कुलपति दिसंबर में चुनाव कराने के लिखित आश्वासन से मुकर रहे हैं। हाईकोर्ट में एएमयू ने दाखिल किया था हलफनामा कैफ हसन का कहना है कि विश्वविद्यालय ने अगस्त में नोटिस और हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में साफ लिखा था कि दिसंबर 2025 में छात्र संघ चुनाव कराए जाएंगे। इसी आश्वासन के आधार पर उन्होंने 10 नवंबर को कुलपति प्रो. नईमा खातून को ज्ञापन सौंपकर चीफ इलेक्शन ऑफिसर (सीईओ) की नियुक्ति और चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग की। लेकिन उसी दिन अचानक विश्वविद्यालय प्रबंधन ने परीक्षा कार्यक्रम और अंतिम कार्य दिवस भी बढ़ा दिया। चुनाव टालने की सोची–समझी रणनीति छात्रों का आरोप है कि परीक्षा कार्यक्रम और अंतिम कार्य दिवस आगे बढ़ाने का फैसला चुनाव टालने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई है कि वह एएमयू प्रशासन को तत्काल सीईओ नियुक्त करने और एएमयू स्टूडेंट्स यूनियन (एएमयूएसयू) चुनाव की तिथि घोषित करने का निर्देश दे। छात्र संघ का करोड़ों रुपये का फंड जमा कैफ हसन का कहना है कि सात साल से छात्र संघ नहीं हैं। बावजूद इसके छात्र संघ फीस से करोड़ों रुपये का फंड है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फंड बिना किसी चुने हुए प्रतिनिधि की निगरानी के खर्च किया जा रहा है। यह छात्रों के संवैधानिक अधिकार का हनन है और फंड के उपयोग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सुरक्षा को हुआ खतरा तो एएमयू प्रशासन की होगी जिम्मेदारी अगस्त में छात्रों को भूख हड़ताल करनी पड़ी थी, तब जाकर प्रशासन ने दिसंबर में चुनाव कराने की लिखित सहमति दी थी। लेकिन मौजूदा परिस्थितियां देखकर लग रहा है कि एएमयू प्रशासन छात्रों से किए वादे से पीछे हट रहा है। कैफ हसन ने कहा कि अगर उनकी सुरक्षा को कोई खतरा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी एएमयू प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि लगातार टाले जा रहे चुनावों को लेकर एएमयू कैंपस में असंतोष बढ़ रहा है और छात्र इसे अपने प्रतिनिधित्व के अधिकार पर सीधा हमला बता रहे हैं।

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