ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ पंचकूला पहुंचे बिजली निगम कर्मी:ACS को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी; भारी संख्या में पुलिस रही तैनात

📅 Published: February 5, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

हरियाणा के पंचकूला में वीरवार को प्रदेश भर से बिजली निगम कर्मचारी ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ पहुंचे। जहां पर प्रदर्शन के उपरांत यूनियन के प्रतिनिधिमंडल द्वारा अतिरिक्त मुख्य सचिव (बिजली), हरियाणा सरकार को कर्मचारियों की जायज एवं जीवन से जुड़ी मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। विरोध प्रदर्शन की अध्यक्षता यूनियन के प्रांतीय प्रधान इकबाल चंदाना ने की, जबकि मंच संचालन प्रांतीय महासचिव यशपाल देशवाल द्वारा किया गया। प्रदर्शन में वरिष्ठ उपप्रधान अशोक शर्मा, वित्त सचिव अनिल पहल, राज्य प्रेस सचिव श्याम लाल खोड, राज्य ऑडिटर मनोज सैनी, राज्य उप-महासचिव विजय हुड्डा, सतेन्द्र सहारण, चेयरमैन अनिल कौशिक मौजूद रहे। ट्रांसफर पॉलिसी में मनमाना रवैया प्रदर्शन को संबोधित करते हुए प्रांतीय प्रधान इकबाल चंदाना ने कहा कि निगम प्रबंधन एवं हरियाणा सरकार द्वारा बिजली कर्मचारियों पर जबरन थोपी जा रही ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी और अधिकारियों की खुली मनमानी न केवल घोर कर्मचारी-विरोधी है, बल्कि यह फील्ड में कार्यरत तकनीकी कर्मचारियों के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह नीति कर्मचारियों को जान बूझकर जोखिम, असुरक्षा और मौत के खतरे की ओर धकेलने वाला एक तानाशाही फरमान है, जिसे यूनियन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी। प्रधान ने लगाए चार आरोप • अधिकारियों द्वारा जानबूझकर पदोन्नतियां रोकी जा रही हैं।
• ऑनलाइन ट्रांसफर पोर्टल के माध्यम से सीटें ब्लॉक कर कर्मचारियों को फंसाया जा रहा है।
• रैशनलाइजेशन जानबूझकर गलत व पक्षपातपूर्ण ढंग से किया जा रहा है।
• तथा कर्मचारियों पर मानसिक दबाव, भय और अस्थिरता का माहौल बनाया जा रहा है। 15 दिन में 2 बार हो चुकी बैठक उन्होंने बताया कि पिछले 15 दिनों में यूनियन पदाधिकारियों की अधिकारियों के साथ दो बार बैठक हो चुकी है, लेकिन अधिकारियों ने केवल समय टालने और गुमराह करने की नीति अपनाई है। आज तक ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी पर कोई ठोस, लिखित या भरोसेमंद आश्वासन नहीं दिया गया, जिससे पूरे प्रदेश के कर्मचारियों में भारी रोष और आक्रोश व्याप्त है। ट्रांसफर से होंगे ये नकारात्मक प्रभाव • डिफॉल्टर उपभोक्ताओं की पहचान असंभव हो जाएगी।
• बकाया वसूली पर सीधा असर पड़ेगा।
• निगम को प्रदेश में करोड़ों रुपए का राजस्व नुकसान उठाना पड़ेगा।

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