कश्मीर में पोस्टर ‘बाहरियों को शरण न दें’:तीन एजेंट, पांच अफसर, एक जवाब– ‘गैर कश्मीरी जमीन नहीं खरीद सकता’, स्टिंग में खुलासा

📅 Published: November 26, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

जम्मू–कश्मीर में गैर कश्मीरियों का जमीन खरीदना अब भी मुश्किल है। भास्कर ने खरीददार बनकर कश्मीर के तीन एजेंट, चार अफसरों का स्टिंग किया। सभी ने एक ही जवाब दिया कि, ‘बिना डोमिसाइल के आउटसाइडर जमीन नहीं खरीद सकता।’ पड़ताल में कड़ियां दिल्ली के ब्लास्ट से भी जुड़ीं। 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला के पास ब्लास्ट हुआ था। इसके पहले श्रीनगर के बनपोरा इलाके में JeM (जैश-ए-मोहम्मद) की तारीफ वाले पोस्टर मिले थे। इनमें लिखा था कि, ‘बाहरियों को शरण न दें’ और ‘शरिया के खिलाफ काम न करें’, वरना सख्त एक्शन लिया जाएगा। ये पोस्टर कमांडर हंजला भाई के नाम से 17 अक्टूबर को साइन किए गए थे। इस पोस्टर के बाद ही जम्मू–कश्मीर पुलिस हरकत में आई थी, और जांच शुरू की थी। कश्मीर की जमीनी हकीकत जानने के लिए भास्कर रिपोर्टर ने जमीन खरीददार बनकर वहां के प्रॉपर्टी एजेंट्स, पटवारी और तहसीलदार से मुलाकात। हिडन कैमरे में बातचीत रिकॉर्ड हुई। पढ़िए और देखिए ये इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट। पहली मुलाकात : शाह मुतयैब, रियल एस्टेट ब्रोकर कश्मीरी रियल्टर शाह मुतयैब और रिपोर्टर के बीच हुई बातचीत रिपोर्टर: मैं जयपुर से हूं, श्रीनगर में रेसिडेंशियल प्लॉट लेना चाहता हूं? मुयतैब: आउटसाइडर अपने नाम पर जमीन रजिस्टर नहीं करा सकता। डोमिसाइल जरूरी है। रिपोर्टर: बिना डोमिसाइल नहीं खरीद सकता? मुतयैब: नहीं। एग्रीकल्चर लैंड तो बिल्कुल नहीं। रेसिडेंशियल भी तभी जब डोमिसाइल हो। रिपोर्टर: अगर मैं किसी और के नाम पर लूं और बाद में अपने नाम कर दूं? मुतयैब: नहीं। अपने नाम पर तभी जब डोमिसाइल हो। हां किसी लोकल दोस्त या रिलेटिव के नाम पर लिया जा सकता है, लेकिन रिस्क आपका है। रिपोर्टर: डोमिसाइल का रास्ता क्या है? मुतयैब: आप सरकारी कर्मचारी हैं, 10 साल से यहां पोस्टेड हैं, तो डोमिसाइल मिल सकता है। या फिर सरकारी लीज ले सकते हैं, 10, 20, 99 साल तक। लेकिन प्राइवेट लैंड पर नहीं। रिपोर्टर: मतलब मेरे नाम पर रजिस्ट्री नहीं हो सकती? मुतयैब: बिन डोमिसाइल के नहीं। रिपोर्टर: कुछ लोग कहते हैं आसानी से हो जाती है। मुतयैब: बहुत लोग धोखा देते हैं। टोकन लेकर गायब हो जाते हैं। DC ऑफिस में रजिस्ट्रेशन तभी होगा जब डोमिसाइल वैध हो। रिपोर्टर: बड़ी कंपनियां कैसे ले रही हैं? मुतयैब: वो कंपनी के नाम पर लेती हैं और उनकी पकड़ होती है, इसलिए उनके प्रोजेक्ट चल रहे हैं। दूसरी मुलाकात : अरैब भट, रियल्टर अरैब: आप रेसिडेंशियल प्लॉट खरीदना चाहते हैं? रिपोर्टर: हां अरैब : बाहर वालों के लिए यह मुश्किल है। डॉक्यूमेंटेशन जरूरी है। शहरी क्षेत्र में डोमिसाइल और ग्रामीण क्षेत्र में एग्रीकल्चर सर्टिफिकेट (आपके/पिता के नाम पर जमीन) होना चाहिए। रिपोर्टर: तो मैं क्या कर सकता हूं अरैब: आप लीज ले सकते हैं, 5, 10, 40 या 99 साल की। यह सेल नहीं, सिर्फ लीज। डोमिसाइल की जरूरत नहीं। रिपोर्टर: समझ गया। अरैब : कुछ ग्रुप जैसे संघानिया या बंसल ले सकते हैं, लेकिन इंडिविजुअल आउटसाइडर के लिए अब कोई रूम नहीं है। रिपोर्टर: डोमिसाइल बनवाना संभव है क्या? अरैब : हां, तहसीलदार या अफसर को पैसे देकर बनाया जा सकता है। मैं ऐसा नहीं करता। फर्जी डोमिसाइल तो अब तक लगभग 82 हजार बन चुके हैं। रियल एस्टेट के दोनों कारोबारियों से मिलने के बाद हमने सरकारी सिस्टम को जांचने के मकसद से मुतयैब से कहा कि, ‘हमें एक भरोसेमंद कश्मीरी मिल गया है। हम उसके नाम पर जमीन खरीदना चाहते हैं। यह सुनकहर मुतयैब ने हमें ऑफिस में बुलाया।’ मुलाकात पर मुतयैब ने कहा कि, ‘मैंने आपके लिए जमीन देख ली है, लोकेशन पर आपको एजेंट मिल जाएगा, बस आप जाकर पहले जमीन पसंद कर ले, फिर पेपर आपको मिल जाएंगे, जिन्हें आप चेक कर सकते हैं।’ प्रॉपर्टी दिखाने के दौरान शाह मुतयैब और रिपोर्टर के बीच बातचीत हुई मुतयैब: आपके पास बंदा कौन है ? रिपोर्टर: नोएडा से है। हमने उससे फ्लैट लिया था। मुतयैब: अच्छा, नाम? रिपोर्टर: इरफान। मुतयैब: ठीक, मैं आपको कुछ प्रॉपर्टी दिखा सकता हूं। रिपोर्टर: हां, दिखाइए। मुतयैब: बंदे ने आपके लिए प्रॉपर्टीज शॉर्टलिस्ट की हैं। आप लोकेशन पर जाएंगे, वह आपको सारी प्रॉपर्टी दिखा देगा। रिपोर्टर: क्या मेरे नाम पर रजिस्ट्री हो सकती है, या किसी कश्मीरी के जरिए ही लेना पड़ेगा? मुतयैब: दो ऑप्शन हैं, अगर आप 10 साल से कश्मीर में रह रहे हैं और बिजनेस किया है, तो डोमिसाइल के लिए एलिजिबल हैं। अगर किसी जान-पहचान वाले कश्मीरी से मदद लें, डोमिसाइल निकलवाना भी संभव है। रिपोर्टर: अगर इरफान के नाम पर हूं, कोई डॉक्यूमेंट नहीं चाहिए? मुतयैब: नहीं, बस उसके साथ एक अलग एग्रीमेंट बना सकते हैं कि यह मेरे लिए है, मालिक वह नहीं है। रिपोर्टर: यह लीगल होगा? मुतयैब: हां, एग्रीमेंट नोटरी और ई-स्टाम्प के साथ लीगल माना जाएगा। रिपोर्टर: पेपर्स ठीक होंगे? मुतयैब: हां, सभी क्लियर हैं। आपको केवल टोकन देना होगा। रिपोर्टर: लोकेशन कहां है? मुतयैब: हारवन, दाचीगाम नेशनल पार्क के ऊपर वाले साइड। हारवन में प्लॉट विजिट, चट्टेरहमा रिपोर्टर की एजेंट रियाज से मुलाकात रिपोर्टर: कौन सा प्लॉट है रियाज़: यह है, डेढ़ कनाल, पूरी तरह रेसिडेंशियल रिपोर्टर: लोकेशन रियाज़: चट्टेरहमा, Harvan। तहसील – हज़रतबल रिपोर्टर: महबूबा मुफ्ती का घर पास है रियाज़: हां, गेट के पास रिपोर्टर: बाकी प्रॉपर्टीज रियाज: यहां बड़े-बड़े बिजनेसमैन के प्लॉट हैं, सारे पेपर क्लियर हमने रियाज को बताया कि हमें यह प्लॉट पसंद आ गया है हम अगले ही दिन हजरतबल तहसील ऑफिस जाकर पटवारी से मिले। हमारा मकसद प्लॉट की जांच नहीं, बल्कि पटवारी से यह साफ-साफ जानना था कि क्या कोई बाहरी व्यक्ति इस तरह की रेसिडेंशियल जमीन खरीद भी सकता है या नहीं। रिपोर्टर और पटवारी बिलाल के बीच हुई बातचीत रिपोर्टर: सर, मैं दिल्ली से हूं। बिलाल अहमद: ठीक है। रिपोर्टर: यहां रियल्टर ने जमीन दिखाई, कौन सी जगह है? रियाज़ (एजेंट): चट्टेरहमा, महबूबा मुफ्ती के घर के सामने। बिलाल अहमद: अगर मिल्कियत ठीक है, तो कोई परेशानी नहीं। रिपोर्टर: मैं अपने नाम से खरीद सकता हूं? बिलाल अहमद: नहीं, उसके लिए परमीशन चाहिए। आप यहां के सिटिजन नहीं हैं, इसलिए DC से परमीशन लेनी होगी। रिपोर्टर: परमीशन का नाम क्या है? बिलाल अहमद: बस, आउटसाइडर के लिए परमीशन। रिपोर्टर: किसी आउटसाइडर ने यहां खरीदी है? बिलाल अहमद: जिसका डोमिसाइल रहेगा, वह आउटसाइर नहीं। बाकी को परमीशन चाहिए। रिपोर्टर: जमीन ठीक है ना? बिलाल अहमद: मुझे नहीं पता, आपने कौन सी देखी है। मिल्कियत अगर सही है, फर्द कटेगी। रिपोर्टर: 2 कनाल खरीदना चाह रहा हूं। बिलाल अहमद: मिल्कियत सही होगी तो ठीक। लेकिन आउटसाइडर को परमीशन जरूरी है, बिना इसके फर्द अमान्य होगी। रिपोर्टर: कई लोगों से सुना था, परमीशन की जरूरत नहीं होती। बिलाल अहमद: नहीं, परमीशन होनी चाहिए। वरना लीगल इश्यू या फ्रॉड हो सकता है। रिपोर्टर: तो आउटसाइडर के लिए खरीदना मुश्किल है? बिलाल अहमद: मुश्किल नहीं, लेकिन परमीशन लेना जरूरी है। रिपोर्टर: ठीक, मतलब SDM ही कर सकता है। बिलाल अहमद: हां, मैं सिर्फ पेपर देखता हूं। बाकी SDM हैंडल करेगा। पटवारी बिलाल अहमद से मिलने के बाद हमने एक और बड़ी रियल एस्टेट कंपनी के हैरिस मंजूर से बात की। उसने खुद को हलाल रियल एस्टेट का मैनेजिंग डायरेक्टर बताया। हलाल रियल एस्टेट – श्रीनगर रिपोर्टर: मैं नोएडा से हूं। फैमिली ने कहा कि जमीन देख लें। हैरिस : जमीन रेसिडेंशियल के लिए चाहिए या किसी और मकसद के लिए? रिपोर्टर: रेसिडेंशियल। हैरिस: हाईवे के पास चाहते हैं? रिपोर्टर: हां, दो कनाल। हैरिस: जमीन मिलेगी। रजिस्ट्री हो सकती है, लेकिन पहले मैं जमीन वाले से कन्फर्म करूंगा। रिपोर्टर: क्या कोई बाहर वाला (आउटसाइडर) ले सकता है? हैरिस: हां, लेकिन डोमिसाइल होना चाहिए। बिना डोमिसाइल के रजिस्ट्री नहीं होगी। जमीन तो ले सकते हैं, मकान भी बना सकते हैं, लेकिन नाम पर रजिस्ट्री नहीं होगी। रिपोर्टर: डोमिसाइल कैसे बनेगा? हैरिस: आधार और एड्रेस अपडेट करना पड़ेगा। आसानी से नहीं होता। अगर कोई भरोसेमंद स्थानीय बंदा हो, तो वह नाम पर कर सकता है, तब रजिस्ट्री आसान है। रिपोर्टर: श्रीनगर में कितनी जमीन है, रेसिडेंशियल/कमर्शियल/एग्रीकल्चर? हैरिस : रेसिडेंशियल काफी है। कमर्शियल भी है। एग्रीकल्चर बहुत कम, ज्यादातर रेसिडेंशियल में कन्वर्ट हो चुका है। डॉक्यूमेंट पर जो रेसिडेंशियल दिखता है, वही वैलिड है। रिपोर्टर: क्या सच में कोई भी बाहर वाला जमीन ले सकता है? हैरिस: ऑफिशियल तौर पर ऐसा कहा जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत में बड़े जमींदार बाहर वालों को जमीन नहीं बेचते। सिर्फ लोकल कश्मीरी को बेचते हैं। रिपोर्टर: तो रजिस्ट्री के लिए डोमिसाइल जरूरी है।हैरिस: हां, रेसिडेंशियल हो या कमर्शियल, डोमिसाइल जरूरी है अगर नाम पर रजिस्ट्री करनी है। रिपोर्टर: कौन मदद कर सकता है? हैरिस: मेरा एडवोकेट, जो जमीन के कागजात बनवाता है। रजिस्ट्री अलग एडवोकेट करता है। नोट: फोन पर हैरिस ने अपने एडवोकेट से कन्फर्म किया कि बाहर वाले को बिना डोमिसाइल के रजिस्ट्री नहीं मिलेगी। अब तक की पड़ताल से जो बातें सामने आई थीं, उनमें डॉमिसाइल का जिक्र सबसे ज्यादा था। फोन पर तहसीलदार ने डॉमिसाइल की शर्त बताई थी, कश्मीर रियलटर के शाह मुतयैब और अरैब भट ने भी यही बात दोहराई थी। हलाल रियल एस्टेट के हैरिस मंजूर ने भी वही बात दोहराई। इसके बाद हमने कश्मीर के रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारी नूर मोहम्मद से मुलाकात की। उनसे पूछा कि क्या आउटसाइडर कश्मीर में जमीन खरीद सकता है। नूर मोहम्मद ने बताया, हाल ही में उनके पास पंजाब से एक पार्टी आई थी, जो 25 कनाल जमीन खरीदना चाहती थी, लेकिन स्थानीय SDM ने उन्हें अनुमति नहीं दी। उन्होंने बताया कि उनका एक परिचित है, वो उसी सब-रजिस्ट्रार के ऑफिस मे काम करता है, जिस जमीन का जिक्र वो कर रहे है, उसके पास सही जानकारी होगी। हम नूर मोहम्मद के साथ पूर्वी श्रीनगर के सब-रेजिस्ट्रार के दफ्तर पहुंचे और रजिस्ट्रार के बगल के कमरे में बैठे रीडर आसिफ से मिले। हमने आसिफ से पूछा कि, क्या कोई आउटसाइडर कश्मीर में जमीन खरीद सकता है। रिपोर्टर : क्या मैं यहां रेसिडेंशियल प्लॉट या कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीद सकता हूं? आसिफ : थोड़ी सी लिमिटेशन है अभी। रिपोर्टर : लिमिटेशन है? आसिफ : हां, एक तो डोमिसाइल होना चाहिए आपका। रिपोर्टर : डोमिसाइल चाहिए ही चाहिए। आसिफ : हां, दूसरी कंडीशन यह है कि अगर कलेक्टर देना चाहे। रिपोर्टर : कलेक्टर? आसिफ : कलेक्टर ऑर्डर देना चाहे कि यह खरीद सकता है। रिपोर्टर : तो हो जाएगा। आसिफ : हां। बिलाल अहमद, नायब तहसीलदार (ईदगाह) बिलाल ने कहा ‘डोमिसाइल जरूरी है, रिकॉर्डेड एग्रीकल्चर लैंड के लिए एग्रीकल्चर सर्टिफिकेट चाहिए और नॉन-एग्रीकल्चर प्लॉट के लिए भी डोमिसाइल चाहिए।’ ज्यादा पूछताछ करनेे पर बिलाल ने दो बार रजिस्ट्रेशन ऑफिस में कॉल किया फिर कहा कि, नॉन-एग्रीकल्चर प्लॉट बिना डोमिसाइल के खरीदा जा सकता है, सिर्फ आधार व फोटो चाहिए। रिपोर्टर: मैं दिल्ली का हूं, क्या बिना डोमिसाइल के रेसिडेंशियल प्लॉट ले सकता हूं? बिलाल: डोमिसाइल जरूरी है। अगर जमीन रिकॉर्ड में एग्रीकल्चर है, तो एग्रीकल्चर सर्टिफिकेट भी चाहिए। रिपोर्टर: लेकिन मैं नॉन-एग्रीकल्चर प्लॉट देख रहा हूं। बिलाल: फिर भी डोमिसाइल जरूरी है… लेकिन मैं चेक कर लेता हूं।(फोन पर रजिस्ट्रेशन ऑफिस से बात) बिलाल (बाद में): नॉन-एग्रीकल्चर के लिए डोमिसाइल नहीं चाहिए। एग्रीकल्चर के लिए एग्रीकल्चर सर्टिफिकेट चाहिए। आधार और फोटो काफी हैं। फयाज खान, नायब तहसीलदार (नरबल/मागम) फयाज खान ने कहा, ‘डोमिसाइल जरूरी है, डोमिसाइल उन लोगों को मिलता है, जो 15 साल से यहां रह रहे हैं। रिपोर्टर ने पूछा क्या कोई आउटसाइडर आवासीय जमीन ले सकता है। फयाज ने कहा, बिना डोमिसाइल के नहीं। अखबारों में जो लिखा है कि कोई भी खरीद सकता है—वह सही नहीं। रिपोर्टर: क्या मैं, एक बाहर का व्यक्ति, यहां रेसिडेंशियल प्लॉट खरीद सकता हूं? फयाज़: नहीं, डोमिसाइल जरूरी है। पूरे JK में यही नियम है। रिपोर्टर: लेकिन कई डीलर कह रहे हैं कि खरीद सकते हैं। फयाज़: गलत बता रहे हैं। लीगली वही खरीद सकता है जिसके पास डोमिसाइल हो। चाहे वह मूल निवासी हो या यहां 15 साल से रह रहा हो। हामिद उल्लाह, नायब तहसीलदार (नंदपोरा) बाहर का व्यक्ति तभी जमीन खरीद सकता है जब वह 15 साल की रेसिडेंसी के आधार पर डोमिसाइल ले ले। रिपोर्टर: मैं टूरिस्ट हूं, क्या डोमिसाइल बिना जमीन ले सकता हूं? हामिद उल्लाह: नहीं। डोमिसाइल जरूरी है। रिपोर्टर: सरकार कहती है कोई भी ले सकता है। हामिद: पहले नहीं ले सकते थे, अब ले सकते हैं, लेकिन शर्त यह है कि आपके पास डोमिसाइल हो, जो 15 साल की रेसिडेंसी से मिलता है। पड़ताल के दौरान हमारी श्रीनगर वेस्ट के SDM इरफान बहादुर, पट्‌टन के SDM डॉ गुलजार अहमद से भी मुलाकात हुई, जिन्होंने साफ कहा कि, आप बिना डोमिसाइल के रेसिडेंशियल जमीन खरीद सकते हैं। कश्मीर में हालात अब भी ठीक नहीं… कश्मीरी एक्टिविस्ट अहमद अयाज कहते हैं, ‘631 लोगों ने ही अब तक जमीन खरीदी। कश्मीर में तो बहुत कम ने खरीदी है। क्योंकि स्थिति अब तक सामान्य नहीं है।’ सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट अभिषेक कृष्णा कहते हैं कि, अगर जम्मू-कश्मीर में कोई सरकारी अधिकारी, जैसे तहसीलदार, कानूनगो, पटवारी या भूमि विभाग से जुड़े अन्य अधिकारी किसी दूसरे राज्य के व्यक्ति को जमीन खरीदने के बारे में गलत जानकारी देता है, ताकि वह व्यक्ति जमीन न खरीदे, तो यह भारतीय कानून के तहत अपराध माना जाता है। मिलिटेंट्स ने आउटसाइडर को मुद्दा बनाया जम्मू–कश्मीर के एक्स डीजीपी एसपी वैद्द के मुताबिक, ‘370 हटने के बाद कश्मीर की डेमोग्राफी में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जो भी यह कह रहा है, वह बिल्कुल गलत है।’ ‘मिलिटेंट्स हमेशा कोई न कोई नया मुद्दा ढूंढते रहते हैं, और अब इन्होंने आउटसाइडर को अपना नया मुद्दा बना लिया है।’ ‘हां, इस तरह की विचारधारा वाले लोग सिस्टम में या यूं कहें कि हर जगह मौजूद हैं, जो नहीं चाहते कि कोई आउटसाइडर यहां आकर बसे।’ ‘अगर कोई तहसीलदार या अधिकारी किसी गेम प्लान के तहत आउटसाइडर को जमीन खरीदने से संबंधित सही जानकारी नहीं देता, तो उनके ऊपर बैठे अफसर—डिवीजन कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर, सेक्रेटरी रेवेन्यू डिपार्टमेंट को चाहिए कि ऐसे अधिकारियों को चिन्हित करें और उनके खिलाफ कार्रवाई करें।’ ‘लैंड और रेवेन्यू डिपार्टमेंट को चाहिए कि आउटसाइडर के लिए जमीन से जुड़े तमाम कानूनों को लेकर अलग से एक डेस्क बनाएं।’ ‘LG साहब और सीनियर अधिकारियों को चाहिए कि आउटसाइडर के लिए एक ऐसी सुविधा तैयार करें कि उन्हें पटवारी के चक्कर में भटकना न पड़े।’ नोट : भास्कर ने इस मामले में सरकार का पक्ष जानने के लिए सवाल होम मिनिस्ट्री को ईमेल किए हैं। जैसे ही जवाब आएगा, हम खबर में अपडेट करेंगे। ………………………………………. आप ये इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं विदेशी लड़कियों को हाथ–पैर बांध, पीटकर बना रहे सेक्स वर्कर:बॉस के चंगुल में फंसाते हैं; उज्बेक, तुर्कमेनिस्तान की लड़कियां टारगेट पर ‘मैं उज्बेकिस्तान की रहने वाली हूं। नौकरी की तलाश में थी। इंस्टाग्राम पर एक लड़की से दोस्ती हुई। उसने दुबई आने को कहा। बोली– एक गर्भवती महिला है, उसके बच्चे को संभालने का काम है।’ ‘मैं उस पर यकीन कर दुबई पहुंची। फिर कहा गया कि, आपको किसी दूसरे शहर में रहना होगा। यह बोलकर मुझे नेपाल ले गए। फिर एक आदमी नेपाल से भारत ले आया।’ पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…।

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