काशी तमिल संगमम में फेस पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन:काशी और दक्षिण की सभ्यता को दिखाया, स्टूडेंट्स बोले- नेट पर पढ़ा इतिहास, आज चित्र बना रहे

📅 Published: November 27, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

काशी तमिल संगमम् 4.0 के तहत वसंत महिला महाविद्यालय तथा विभिन्न संस्थानों द्वारा आयोजित कला-आधारित प्री-इवेंट्स पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसका थीम “विविधता में एकता” रखा गया। इसके आलावा सिगरा स्थित आई.पी. मॉल और जे.एच.वी. मॉल में फेस पेंटिंग प्रतियोगिता में छात्रों ने प्रतिभाग किया। देखें तस्वीर… वसंत महिला महाविद्यालय परिसर में आयोजित पोस्टर एवं पेंटिग प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्राओं को भारतीय संस्कृति की एकात्मता, विशेषकर काशी और तमिल संस्कृति के प्राचीन संबंधों को कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से समझने का अवसर प्रदान करना था। छात्राओं ने अपने चित्रों में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’, भाषाई विविधता, सांस्कृतिक सेतु, तमिल-काशी आध्यात्मिक विरासत तथा भारतीयता के साझा मूल्यों को उकेरा। फेस प्रतियोगिता में उत्तर और दक्षिण के सभ्यता का किया चित्रण इसी क्रम में काशी तमिल संगमम 4.0 के प्रचारात्मक कार्यक्रमों को गति देते हुए आई.पी. मॉल और जे.एच.वी. मॉल में फेस पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें 70 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ‘अनेकता में एकता’ विषय पर आधारित इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने रंगों के माध्यम से उत्तर और दक्षिण भारत की परंपराओं, धरोहरों और सांस्कृतिक विशेषताओं को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। किसी ने काशी के घाटों और मदुरै के मंदिरों को एक साथ उकेरा, तो किसी ने नटराज और विश्वनाथ के प्रतीकात्मक चित्रों को जोड़कर सांस्कृतिक बंधन को सुंदर रूप दिया। कई प्रतिभागियों ने भारतीय संगीत, नृत्य, परिधान, त्यौहारों और भाषा विविधता को चेहरे पर कैनवास की तरह चित्रित कर अनूठी पहचान बनाई। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, आईआईटी मद्रास,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा आईआईटी–बीएचयू के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। यह रहे उपस्थित दृश्य कला कार्यक्रम के संयोजक प्रो. मनीष अरोरा, सह-संयोजक सृष्टि प्रजापति तथा समन्वयक विजय भगत रहे। जूरी में साहब राम टुडू और जयंती मंडी शामिल थे, जिन्होंने प्रतिभागियों की कलाकृतियों की सराहना करते हुए कहा कि इन कृतियों में काशी और दक्षिण के बीच पिछले वर्षों में विकसित सांस्कृतिक सेतु का सजीव चित्रण दिखाई दिया है। मुख्य आयोजन 2 से 15 दिसंबर 2025 तक नमोघाट पर प्रस्तावित है।

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