गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में एक और बाघिन को शामिल किया गया है। यह बाघिन लखीमपुर के मझगई रेंज, नार्थ खिरी-दुघवा टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू की गई थी। वन विभाग के अनुसार, बाघिन पहले मानव क्षेत्रों के नजदीक आने लगी थी और हाल ही में युवक पर हमला करने का मामला भी सामने आया था। उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि बाघिन लगभग सात वर्ष की है और स्वभाव से काफी उग्र है। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान वन विभाग की टीम ने पूरी सावधानी बरती और उसे सुरक्षित रूप से रिजर्व से बाहर निकाला। विशेषज्ञों की टीम ने बाघिन को पकड़ने और सुरक्षित स्थान पर लाने में पूरी तैयारी के साथ काम किया। स्वास्थ्य जांच के साथ हो रही निरंतर निगरानी रेस्क्यू के तुरंत बाद बाघिन की स्वास्थ्य जांच की गई और उसे गोरखपुर चिड़ियाघर में सुरक्षित स्थान पर रखा गया। चिकित्सक और कर्मचारी उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। वन विभाग ने बताया कि बाघिन का स्वास्थ्य फिलहाल सामान्य है और उसे चिड़ियाघर के वातावरण में ढलने के लिए समय दिया जाएगा। गोरखपुर चिड़ियाघर में बाघों की संख्या हुई तीन इस रेस्क्यू के बाद गोरखपुर चिड़ियाघर में कुल रेस्क्यू बाघों की संख्या तीन हो गई है, जिसमें शावक भी शामिल हैं। वन विभाग के अनुसार यह संख्या बाघ संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चिड़ियाघर में इन बाघों के लिए सुरक्षित और प्राकृतिक माहौल बनाए रखा गया है। तेंदुए सहित अन्य वन्यजीवों की देखभाल और सुरक्षा इसके अलावा, चिड़ियाघर में तेंदुए को भी रेस्क्यू कर लाया गया है। सभी वन्यजीवों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वन विभाग का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहेंगे ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम किया जा सके और जंगल के जानवर सुरक्षित रहें।
गोरखपुर चिड़ियाघर पहुंची लखीमपुर से रेस्क्यू हुई बाघिन:अब कुल तीन बाघ, चिकित्सक कर रहे लगातार निगरानी
📅 Published: November 21, 2025 |
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