चंडीगढ़ PGI-क्लेरिटी मेडिकल के बीच टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एग्रीमेंट:देश को मिला स्वदेशी HFNC सिस्टम, कोरोना में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट

📅 Published: January 12, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

गंभीर सांस संबंधी बीमारियों के इलाज में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। पीजीआई चंडीगढ़ ने मोहाली स्थित क्लेरिटी मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड के साथ स्वदेशी रूप से विकसित ‘ट्रूऑक्सी+ हाई फ्लो नेजल कैनुला (HFNC) सिस्टम’ के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए। यह अत्याधुनिक श्वसन सहायता उपकरण पीजीआई में ही डिजाइन और विकसित किया गया है। यह प्रोजेक्ट विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के सहयोग से शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य कम लागत, उच्च गुणवत्ता और मेक इन इंडिया आधारित समाधान तैयार करना था, ताकि एक्यूट हाइपॉक्सेमिक रेस्पिरेटरी फेल्योर से जूझ रहे मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। डिवाइस का एक साल से ज्यादा समय तक पीजीआई के बायोमेडिकल हब में परीक्षण किया गया। इसके बाद 2024 में फेज-1 क्लिनिकल ट्रायल पूरा हुआ और पिछले एक साल से यह फेज-2 क्लिनिकल ट्रायल से गुजर रहा है। कोविड काल में शुरू हुआ प्रोजेक्ट इस रिसर्च की शुरुआत वर्ष 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान हुई थी। परियोजना का नेतृत्व प्रो. जी.डी. पुरी ने किया और इसे 2024 में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस प्रोजेक्ट के तहत विकसित ‘ट्रूऑक्सी+’ सिस्टम को खास तौर पर भारतीय अस्पतालों, आईसीयू और हाई डिपेंडेंसी यूनिट्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह डिवाइस 60 लीटर प्रति मिनट तक ऑक्सीजन फ्लो, 21 से 100 प्रतिशत तक ऑक्सीजन की मात्रा, और 31 से 37 डिग्री तापमान नियंत्रण जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसमें ऑटोमैटिक कंट्रोल, एडवांस अलार्म सिस्टम और मरीज की सुरक्षा से जुड़े फीचर्स शामिल हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।स्वदेशी निर्माण को मिलेगा बढ़ावा क्लेरिटी मेडिकल के साथ साझेदारी के जरिए पीजीआई का लक्ष्य इस डिवाइस का बड़े पैमाने पर स्वदेशी निर्माण, रेगुलेटरी मंजूरी और देशभर में किफायती दरों पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इससे महंगे आयातित उपकरणों पर निर्भरता कम होगी और क्रिटिकल केयर टेक्नोलॉजी में भारत की आत्मनिर्भरता मजबूत होगी। इस प्रोजेक्ट को पीजीआई के एनेस्थीसिया और इंटेंसिव केयर विभाग की टीम ने विकसित किया। इसमें प्रो. जी.डी. पुरी, डॉ. शिव लाल सोनी, डॉ. अजय सिंह, डॉ. नवीन नाइक बी. और इंजीनियर हरप्रीत सिंह शामिल रहे। सस्ते और प्रभावी मेडिकल डिवाइस तैयार टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समारोह की अध्यक्षता पीजीआई के डायरेक्टर विवेक लाल ने की। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार देश के लिए बेहद जरूरी हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सस्ते और प्रभावी मेडिकल डिवाइस तैयार किए जा सकें। कार्यक्रम में डीन (रिसर्च) संजय जैन के साथ कई वरिष्ठ प्रोफेसर और अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे। क्लेरिटी मेडिकल के सीईओ एस.पी. रंगी और प्रतिनिधि दिवेश सिसोदिया ने बताया कि यह प्रोजेक्ट कोविड काल से ही पीजीआई के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर चलाया जा रहा है। प्रो. जी.डी. पुरी ने कहा कि यह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक अहम कदम है। एचएफएनसी डिवाइस का उपयोग आईसीयू, नॉन-ऑपरेटिंग एनेस्थीसिया, एंडोस्कोपी, ईआरसीपी, पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी और पोस्ट-एक्सट्यूबेशन सपोर्ट में किया जाता है। शोध के अनुसार, इससे दोबारा वेंटिलेशन की जरूरत कम होती है।

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