चित्रकूट कोषागार का करोड़ों का पेंशन घोटाला की जांच अटकी:SIT ने मांगे थे आर्थिक–तकनीकी विशेषज्ञ, एक माह में भी नहीं मिली मदद

📅 Published: November 28, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

चित्रकूट जिला कोषागार में हुए करोड़ों के पेंशन घोटाले की जांच घटती रफ्तार से आगे बढ़ रही है। SIT ने एक महीने पहले जिला प्रशासन से आर्थिक और तकनीकी मामलों की जांच के लिए विशेषज्ञों की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं कराया गया है।यह घोटाला अक्टूबर में सामने आया था, जब पेंशन भुगतान में बड़े स्तर पर हेराफेरी पकड़ी गई थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक ने 17 सदस्यीय SIT गठित की थी। जांच आगे बढ़ी तो अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों की गहरी सांठगांठ सामने आई।SIT का कहना है कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि आर्थिक तकनीकों से जुड़ा जटिल घोटाला है, जिसकी वैज्ञानिक जांच के लिए विशेषज्ञ बेहद जरूरी हैं।विशेषज्ञ न मिलने से टीम को मौजूदा लेखाकारों की मदद से कागजी मिलान करना पड़ रहा है। पिछले एक महीने में न कोई नया पेंशनर गिरफ्तार हुआ और न ही कोई बिचौलिया। 35 पेंशनरों ने ‘निर्दोष’ बताते हुए भेजे पत्र इस बीच घोटाले में नामजद 35 पेंशनरों ने लखनऊ से लेकर जिले तक पत्र भेजकर खुद को निर्दोष बताया है।इनका दावा है कि बिचौलियों ने उनके नाम से फर्जी पेंशन निकलवाई, जबकि उन्हें घोटाले की जानकारी भी नहीं थी। कुछ पत्रों में जेल में बंद विभागीय अधिकारियों के नाम का भी उल्लेख है।SIT का मानना है कि यह जेल जाने के डर से ‘अपने को बचाने की कोशिश’ भी हो सकती है।कोषागार में कागज मिलान के दौरान SIT को ये पत्र भी सौंपे गए, जिनमें कई नए बिचौलियों के नाम सामने आए। इनकी भूमिका की जांच अब शुरू की गई है। 3.60 करोड़ की रिकवरी, फिर भी कई कड़ियां बाकी अब तक 27 अक्टूबर तक 32 अधिकारी-कर्मी जेल भेजे जा चुके हैं।एटीओ संदीप की मृत्यु हो चुकी है, जबकि एटीओ विकास सचान और अकाउंटेंट अशोक वर्मा जेल में हैं। रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप ने कोर्ट से स्टे लेकर गिरफ्तारी टाल दी है।फिलहाल 3 करोड़ 60 लाख रुपये की रिकवरी हो चुकी है, लेकिन SIT के मुताबिक “कई कड़ियां अभी भी जुड़ना बाकी हैं।” दोनों के बीच फंसा कोषागार घोटाला एक तरफ SIT विशेषज्ञों के अभाव में वैज्ञानिक जांच नहीं कर पा रही, दूसरी ओर आरोपी पेंशनर और बिचौलिये लगातार पत्र भेजकर जांच को और उलझा रहे हैं।SIT का साफ कहना है कि विशेषज्ञों की नियुक्ति के बिना घोटाले की तह तक पहुंचना मुश्किल है।कोषागार का करोड़ों का यह घोटाला फिलहाल जांच की सुस्ती और आरोपियों की सक्रियता के बीच उलझा हुआ है।

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