चित्रकूट कोषागार घोटाला: रकम निकालकर वापस जमा की:जेल जाने के डर से पेंशनरों ने लौटाई राशि

📅 Published: November 21, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

चित्रकूट कोषागार घोटाले में नए खुलासे हो रहे हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ पेंशनभोगियों ने अपने खातों में आई अतिरिक्त राशि निकाली और बाद में जेल जाने के डर से उसे वापस जमा कर दिया। पहाड़ी निवासी पेंशनर जयश्री मिश्रा ने कोषागार विभाग से अपने खाते में आए 3 लाख 31 हजार 148 रुपये निकाले थे। जब कई अन्य पेंशनभोगियों को जेल हुई, तो उन्होंने यह राशि वापस जमा कर दी। इसी तरह, पहाड़ी के ही पेंशनर अवधेश कुमार ने भी कोषागार विभाग से गलत तरीके से प्राप्त 3 लाख 49 हजार 56 रुपये निकाले और कुछ दिनों बाद उसे वापस जमा कर दिया। जिला शासकीय अधिवक्ता श्यामसुंदर मिश्रा ने बताया कि ये दोनों पेंशनर कई बार अपने वकील के माध्यम से अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर कर चुके हैं। बहस की तारीख आने पर इनके अधिवक्ता लगातार अदालत से समय मांग रहे हैं। आज भी इनकी सुनवाई थी, लेकिन दोनों के अनुपस्थित रहने पर अदालत ने अगली तारीख दी है। इस घोटाले में विभाग के चार नामजद अधिकारियों में से रिटायर्ड एटीओ अवधेश प्रताप सिंह को अग्रिम जमानत के स्टे में राहत मिली है। बृहस्पतिवार को उनकी पहली मियाद पूरी हो रही थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें 16 दिसंबर तक का स्टे दे दिया है। इस मामले में रिटायर्ड एटीओ के अलावा एटीओ विकास सचान और अकाउंटेंट अशोक वर्मा जेल में हैं। एक अन्य एटीओ संदीप श्रीवास्तव की विवेचना के दौरान मृत्यु हो चुकी है। कोषागार घोटाले में जेल में बंद और बाहर मौजूद नामजद पेंशनभोगी व बिचौलिए भी अग्रिम जमानत के लिए अदालत के चक्कर लगा रहे हैं। अधिवक्ता आशीष तिवारी ने बताया कि शुक्रवार को पेंशनर बलवंत और सूर्यकुमार सहित चार अन्य बिचौलियों ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत में याचिका दायर की है। घोटाले में शामिल बिचौलियों और पेंशनभोगियों के बीच संबंधों की जांच तेजी से चल रही है। एसआईटी इस बात की पड़ताल कर रही है कि पेंशनभोगियों के खातों में बिचौलियों के खाते कैसे जोड़े गए और भुगतान सहित अन्य प्रक्रियाएं कैसे हुईं। उदाहरण के तौर पर, बिचौलिए गौरेंद्र शिवहरे ने अपनी मां गिरजेश कुमारी के पेंशन खाते में अपना खाता जुड़वाकर धनराशि निकाली थी।
इसी प्रकार दीपक पांडेय ने पेंशनर सहोद्रा देवी के खाता में अपना खाता जुडवा कर धनराशि ले रहा था। खुलासा होने के बाद दोनों जेल में हैं। इसी प्रकार करीब 11 पेंशनरों के खाता में पेंशन की धनराशि न जाकर बिचौलियों के खाता में जा रही थी। यह सब कोषागार में तैनात कर्मचारियों व अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा था। एसआईटी अब पेंशनरों व बिचौलियों के खातों में किए गए घालमेल के संबंध की जांच कर रही है।

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