जिंदगी में शिक्षा का उजियाला ला रही 'कोशिश क्लासेज':ग़रीब की बेटी बीटेक में हुई सेलेक्ट, नदी किनारे 14 वर्षों से लगती हैं पाठशाला

📅 Published: November 27, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

सुल्तानपुर शहर के निकट पांचोपीरन कस्बे में चल रही ‘कोशिश पाठशाला’ ने एक बार फिर ज़मीनी स्तर पर अपनी उपयोगिता साबित की है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटी खुशी ने केएनआईटी में बीटेक में प्रवेश पाया है। संस्था ने उसे सम्मानित किया। खुशी अब न सिर्फ आगे पढ़ाई करेगी, बल्कि कोशिश के अन्य बच्चों को भी शिक्षा देने के लिए स्वयंसेवा करेगी।दैनिक भास्कर ऐप ने मौके पर पहुंचकर पाठशाला की गतिविधियों और प्रभाव का विस्तृत जायजा लिया। हाइवे से नदी किनारे तक, जहां किताबें रोशनी बनती हैं अयोध्या–प्रयागराज हाईवे से करीब ढाई किमी दूर पांचोपीरन कस्बे में केएनआईटी का छात्रावास है। सड़क से दाईं ओर उतरते ही पहले आरएसएस का कार्यालय पड़ता है। यहां से लगभग 500 मीटर आगे कंकरीट मार्ग पर बढ़ते हुए दाईं ओर सीढ़ियों से नीचे उतरने पर गोमती नदी के किनारे झाड़ियों के बीच ‘कोशिश पाठशाला’ चलती दिखाई देती है—जहां रोज शाम को दर्जनों बच्चों की उम्मीदें चमकती हैं। शाम का समय, सूरज ढल चुका… और बच्चों के प्रोजेक्ट जगमगा रहे थे बुधवार की शाम पाठशाला में लगभग 50 बच्चे मौजूद थे। सभी निर्धन वर्ग से आने वाले ये बच्चे अपने-अपने प्रोजेक्ट तैयार करके सीनियर छात्रों को समझा रहे थे।कहीं ‘चंद्रयान’ का मॉडल था, कहीं वर्षा नियंत्रक यंत्र-हर प्रस्तुति पर मेहमान और वरिष्ठ छात्र तालियां बजाकर बच्चों का हौसला बढ़ा रहे थे। इसी दौरान करीब 5 किमी दूर रतनपुर से आने वाली खुशी का विशेष सम्मान किया गया। खुशी कक्षा 3 से कोशिश से जुड़ी रही है और अब उसका चयन केएनआईटी में बीटेक में हुआ है।उसकी साथी मुस्कान ने भी यही से शिक्षा ली और उसका भी बीटेक में चयन हुआ।दोनों छात्राओं ने वर्ष 2023 में बेहतर रैंक के साथ राजकीय पॉलिटेक्निक, लखनऊ में प्रवेश पाया था। 2011 में रखी गई थी कोशिश की नींव कोशिश पाठशाला की शुरुआत वर्ष 2011 में केएनआईटी के छात्र चेतनगिरि गोस्वामी (दिल्ली निवासी) और उनके साथियों ने की थी।चेतन आज भी जब यहां पहुंचते हैं, तो बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर धन्यवाद देते हैं कि वे बच्चों को यहां भेजते हैं। साथ ही उनसे आग्रह करते हैं कि बच्चों को नियमित भेजें और आसपास के अन्य बच्चों को भी जोड़ें—“हम उनकी भी देखभाल करेंगे।”

Read more


📱 Share on WhatsApp 🌐 View Original Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *