ज्ञानी हरप्रीत का बागी अकालियों की पार्टी से इस्तीफा:चंडीगढ़ मीटिंग में की प्रधान पद छोड़ने की पेशकश; नेताओं की बयानबाजी से नाराज

📅 Published: December 21, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

शिरोमणि अकाली दल (SAD) पुनर-सुरजीत के प्रधान ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की है। सूत्रों से पता चला है कि चंडीगढ़ में हुई मीटिंग में उन्होंने इस्तीफा रखा था। वो नेताओं की बयानबाजी से नाराज बताए जा रहे थे। हालांकि, अभी तक इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही पार्टी ने अभी स्वीकार किया है। उधर, गुरप्रताप सिंह बडाला ने कहा कि उन्होंने इस्तीफा पेश नहीं किया था। दो दिन पहले मनप्रीत सिंह अयाली, जो पुनर-सुरजीत में शामिल थे, उन्होंने कहा था कि वह किसी भी ग्रुप का हिस्सा नहीं हैं। उनकी श्री अकाल तख्त पर ड्यूटी लगाई गई थी, जिसे वह निभा रहे हैं। पता चला है कि वह नेताओं की बयानबाजी से आहत थे। हालांकि, गुरप्रताप सिंह बडाला ने इस्तीफा पेश नहीं किया था। पार्टी की अध्यक्षता में दिलचस्पी नहीं
सूत्रों के मुताबिक बैठक में ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने दोहराया कि उन्हें पार्टी की अध्यक्षता में पहले भी कोई दिलचस्पी नहीं थी और अब भी नहीं है। सूत्रों के मुताबिक अकाली दल पुनर-सुरजीत की बैठक काफी हंगामेदार रही। हालांकि, इसके बाद में वह मीडिया से भी रूबरू हुए थे, लेकिन उन्होंने किसी तरह की कोई बात नहीं की थी। बीबी जागीर कौर बोलीं- मीटिंग में त्याग की बात कही थी ज्ञानी हरप्रीत की इस्तीफे की खबर पर बीबी जागीर कौर ने कहा कि मीटिंग में ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने त्याग करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि मैं किसी ओहदे यानी पद के लिए यहां नहीं आया। उधर, मनप्रीत अयाली ने कहा कि पुनर सुरजीत अकाली दल के किसी भी नेता से मेरा कोई मतभेद नहीं है। जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों में जीत के बाद दिए गए बयान का मतलब यह था कि अभी तक मैं पुनर सुरजीत अकाली दल की किसी भी गतिविधि में सक्रिय रूप से शामिल नहीं हुआ हूं।लेकिन श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश की भावना के अनुसार, भर्ती कमेटी का सदस्य होने के नाते मैं पंथक एकता के लिए प्रयासरत था और आगे भी रहूंगा। अकाली दल से अलग बनाई थी पार्टी
2024 लोकसभा चुनाव हार के बाद शिरोमणि अकाली दल में असंतोष खुलकर सामने आया था। जून के अंत में (25-26 जून) करीब 60 वरिष्ठ नेताओं ने चंडीगढ़ में सुखबीर बादल की बैठक का बहिष्कार किया और जालंधर में अलग बैठक की। यहां सुखबीर से इस्तीफे की मांग की गई और पार्टी में बदलाव की जरूरत बताई। एक जुलाई को अकाल तख्त से “अकाली दल बचाओ लहर” शुरू करने की घोषणा हुई। 15-16 जुलाई को औपचारिक रूप से शिरोमणि अकाली दल सुधार लहर लॉन्च की गई। पूर्व MLA गुरप्रताप सिंह वडाला को संयोजक बनाया गया। SGPC अध्यक्ष चुनाव भी लड़ा
अकाली दल से अलग होकर पुनसुरजीत लहर ने SGPC अध्यक्ष चुनाव (अक्टूबर 2024) लड़ा। उनकी तरफ से बीबी जागीर कौर को SGPC अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार बनाया। जबकि शिरोमणि अकाली दल हरजिंदर सिंह धामी को उम्मीदवार बनाया। बीबी जागीर कौर हार गईं। धामी ने 74 वोटों से जीत हासिल की और चौथी बार SGPC अध्यक्ष बने। यह सुधार लहर का पहला और मुख्य अलग मुकाबला था। दूसरी तरफ पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव में सुधार लहर ने कुछ उम्मीदवारों का समर्थन किया। लेकिन सीधे इलेक्शन नहीं लड़ा।दूसरी तरफ सुधार लहर ने 2025 में नई पार्टी बनाने की घोषणा की है और चुनाव आयोग से नाम/सिंबल की मांग की है, लेकिन अभी यह औपचारिक रूप से अलग पार्टी नहीं बनी।

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