दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ का 7वां स्थापना दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय, दांग के प्रो. सुघन कुमार पौडेल, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. गणेश शंकर विद्यार्थी और शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशल नाथ मिश्र ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. सुघन कुमार पौडेल रहे। स्थापना दिवस से पूर्व सुबह 9 बजे रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के कई विभागों के शिक्षक शामिल हुए। इसके बाद दोपहर 12 बजे गोरक्षनाथ शोधपीठ में संस्कृत अध्ययन केंद्र का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के सहयोग से शुरू किया गया है। शोधपीठ की गतिविधियों की प्रस्तुति उद्घाटन के बाद डॉ. कुशलनाथ मिश्र ने शोधपीठ के पिछले ढाई वर्षों के कार्यों और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शोधपीठ लगातार भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति से जुड़े शोध व गतिविधियों को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है। संस्कृत की आवश्यकता और महत्व पर जोर विशिष्ट अतिथि प्रो. गणेश शंकर विद्यार्थी ने कहा कि संस्कृत में देश की प्राचीन परंपराओं और ज्ञान का विशाल भंडार है। संस्कृत का अध्ययन करने से विद्यार्थी भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को समझ पाएंगे। मुख्य अतिथि प्रो. सुघन कुमार पौडेल ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीक के इस दौर में भी संस्कृत निरंतर प्रगति कर रही है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारत के दर्शन और संस्कृति को समेटे हुए है। शोधपीठ द्वारा संस्कृत के प्रचार-प्रसार और शोध के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। संस्कृत अध्ययन केंद्र का उद्देश्य नए शुरू किए गए संस्कृत अध्ययन केंद्र का उद्देश्य संस्कृत भाषा को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है। इसके तहत छह महीने का संस्कृत भाषा प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। इस कोर्स के लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा निपा चौधरी को शिक्षक नियुक्त किया गया है। यहाँ विद्यार्थियों को सरल और व्यावहारिक तरीके से संस्कृत बोलना सिखाया जा रहा है। कार्यक्रम में अनेक शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति कार्यक्रम का संचालन डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन निपा चौधरी ने दिया। समारोह में विश्वविद्यालय के कई शिक्षक, शोधकर्ता और विद्यार्थी उपस्थित रहे, जिनमें प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, प्रो. अनुभूति दुबे, डॉ. धर्मदत्त तिवारी, डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी, डॉ. सोनल सिंह, डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, डॉ. सुनील कुमार, चिन्मयानन्द मल्ल और शोध विद्यार्थी शामिल थे।
डीडीयू के गोरक्षनाथ शोधपीठ का 7वां स्थापना:प्रो.पौडले बोले- तकनीकी युग में संस्कृत तेजी से बढ़ रही, 6 महीने का संस्कृत कोर्स शुरू
📅 Published: November 30, 2025 |
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