बीकेटी स्थित एस.आर. ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशन्स में सोमवार को ‘तिब्बतन अवेयरनेस टॉक – पर्यावरण और सुरक्षा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें तिब्बत के राष्ट्रपति पेनपा त्सेरिंग ने भारत की शक्ति, तिब्बत की स्थिति और वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की शुरुआत गणपति वंदना और एसआरजीआई के छात्रों द्वारा पारंपरिक तिब्बती नृत्य प्रस्तुति से हुई। इस अवसर पर एसआरजीआई के चेयरमैन एवं एमएलसी पवन सिंह चौहान, भारत-तिब्बत संवाद के ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटर डॉ. संजय मिश्रा, वाइस चेयरपर्सन सुष्मिता सिंह और वाइस चेयरमैन पीयूष सिंह चौहान सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। जलवायु परिवर्तन पर गंभीर चिंता व्यक्त की छात्रों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति त्सेरिंग ने कहा कि पर्यावरण और सुरक्षा आज दुनिया के सबसे बड़े संकट बन चुके हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश और लखनऊ की बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों, जैसे प्रदूषण, जल संकट, जलवायु परिवर्तन और वन कटाई को सीधे मानव सुरक्षा से जोड़ते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की। त्सेरिंग ने तिब्बत-भारत संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तिब्बती भाषा भारतीय देवनागरी से प्रेरित है, जो दोनों के 1000 साल पुराने रिश्ते का प्रमाण है। उन्होंने भारत को तिब्बत का गुरु और तिब्बत को उसका चेला बताया। त्सेरिंग ने यह भी कहा कि दुनिया में भारत से शक्तिशाली कोई नहीं है, बस उसे हनुमान जी की तरह अपनी ताकत याद दिलानी है। तिब्बत की स्वतंत्रता भारत की सुरक्षा का सवाल उन्होंने बताया कि तिब्बत में 46,000 ग्लेशियर हैं, जिसके बारे में दुनिया को जानकारी नहीं है। साथ ही, चीन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने तिब्बतियों की आवाजाही को सीमित कर दिया है, जो चिंता का विषय है।कार्यक्रम में उपस्थित संजय शुक्ला ने जोर देकर कहा कि तिब्बत की स्वतंत्रता केवल तिब्बत का नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा का भी सवाल है। शुक्ला ने लखनऊवासियों से जापान की तरह चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि 140 करोड़ भारतीयों का पैसा अंततः आतंकवाद को बढ़ावा दे सकता है। कार्यक्रम के अंत में वाइस चेयरपर्सन सुष्मिता सिंह ने राष्ट्रपति त्सेरिंग का आभार व्यक्त किया।
तिब्बत के राष्ट्रपति ने भारत को बताया विश्व शक्ति:लखनऊ में पर्यावरण, सुरक्षा और तिब्बत-भारत संबंधों पर रखे विचार
📅 Published: November 25, 2025 |
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