थाईलैंड का 104 सदस्यीय विशिष्ट दल शुक्रवार को भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर पहुंचा। यह दल यहां रात्रि विश्राम करेगा और 22 नवंबर को अपने अगले गंतव्य के लिए रवाना होगा। इस यात्रा के दौरान दल प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थलों का भ्रमण करेगा। पुरातत्व संरक्षण सहायक शादाब खान ने बताया कि विभाग की ओर से मेहमानों को मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर, मांथा कुंवर मंदिर और रामाभार स्तूप का भ्रमण कराया जाएगा। उन्हें इन स्थलों की प्राचीनता, ऐतिहासिकता, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी। यह दल बोधगया, सारनाथ और भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी (नेपाल) की यात्रा करने के बाद कुशीनगर पहुंचा है। विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि संरक्षित स्मारक स्थलों पर दल को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उनके आगमन को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कुशीनगर में स्थित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल थाई मंदिर की एक अनूठी विशेषता है। यहां तथागत बुद्ध के साथ-साथ त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) की भी पूजा की जाती है। अनीश्वरवादी बुद्ध के साथ सनातन धर्म के त्रिदेव की पूजा का यह संगम अन्य किसी स्थान पर देखने को नहीं मिलता है। यह स्थल पिछले कई वर्षों से दो संस्कृतियों के मेल का प्रतीक रहा है। बौद्ध और सनातन संस्कृति के इस अनूठे संगम वाले वाट थाई मंदिर परिसर में भगवान बुद्ध के साथ ब्रह्मा, विष्णु और महेश की मूर्तियां स्थापित हैं। इस मंदिर का पूरा नाम वाट थाई कुशीनारा छरर्मराज है। थाई राजघराने ने वर्ष 1994 में कुशीनगर में इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कराया था। थाई दूतावास द्वारा संचालित इस मंदिर परिसर में बौद्ध और सनातन संस्कृति का बेजोड़ संगम स्थापित है, जहां हर साल हजारों थाई पर्यटक आते हैं।
थाईलैंड का 104 सदस्यीय दल कुशीनगर पहुंचा:महापरिनिर्वाण स्थली सहित प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थलों का करेगा भ्रमण
📅 Published: November 21, 2025 |
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