दालमंडी पर बुलडोजर, क्या BJP के 50 हजार वोट घटेंगे:वाराणसी के लोग बोले- रोड के लिए घर-दुकान तोड़ी, चुनाव में जवाब देंगे

📅 Published: February 14, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

आदिल खान और उनका परिवार वाराणसी की दालमंडी में रहता है। 9 फरवरी की सुबह तक घर में सब हंसी-खुशी थे। शाम होने तक प्रशासन ने घर को जर्जर बताकर खंडहर बना दिया। आदिल गुस्से में बताते हैं, ‘1960 में जो दुकान हमारे पुरखों ने पाई-पाई जोड़कर खरीदी, उस पर बुलडोजर चल चुका है। घर पर पत्नी-बच्चे ये सोचकर खौफजदा हैं कि अब हम कहां जाएंगे। इतना दर्द देखकर आंसू भी सूख चुके हैं।’ ‘दालमंडी में 180 से ज्यादा घर और हजारों दुकानें गिराई जाएंगी। इस कार्रवाई से सीधे-सीधे 2 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित होंगे। इनमें 80% यहीं के वोटर हैं। दालमंडी पर अभी हो रहे सितम का असर 2027 के विधानसभा चुनाव में दिखेगा। लोगों की नाराजगी बता रही है कि BJP ये सीट 100 नहीं बल्कि 1 हजार पर्सेंट हारेगी।’ आदिल की मोबाइल शॉप और मकान पर जिला प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की है, क्योंकि वो सरकार के महत्वाकांक्षी ‘दालमंडी मॉडल रोड प्रोजेक्ट’ की सीमा में आ रहे थे। प्रोजेक्ट के लिए दालमंडी में अब तक 31 मकान तोड़े जा चुके हैं। इसमें से 16 पूरी तरह से जमींदोज कर दिए गए हैं। सरकार ने दालमंडी में 17.5 मीटर चौड़ी मॉडल रोड बनाने का फैसला लिया है, जिससे यात्रियों को काशी विश्वनाथ मंदिर तक जाने में आसानी होगी। ये रास्ता बनाने के लिए प्रशासन को दालमंडी के 181 घर, 500 से ज्यादा छोटी-बड़ी दुकानें और 6 मस्जिदें तोड़नी होंगी, जिसका विरोध हो रहा है। दालमंडी इलाका वाराणसी की दक्षिणी विधानसभा में आता है। 2022 चुनाव में ये सीट BJP ने जीती थी। तब डॉ. नीलकंठ तिवारी यहां से विधायक बने। उनकी जीत का मार्जिन बाकी 7 सीटों की तुलना में सबसे कम था। अब दालमंडी में हो रहे ध्वस्तीकरण पर लोकल लोगों और पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये कार्रवाई 2027 विधानसभा चुनाव में BJP के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकती है। सबसे पहले बात उन दुकानदारों की, जिनकी रोजीरोटी छिन गई…
70% दुकानें मुसलमानों की बाकी हिंदुओं की, नुकसान सभी को
वाराणसी के चौक थाने से सटा दालमंडी मिलीजुली आबादी वाला इलाका है। यहां लगभग 10,000 से ज्यादा दुकानें और घर हैं। इसका एक हिस्सा बेनिया बाग और दूसरा चौक की तरफ खुलता है। जहां से काशी विश्वनाथ मंदिर की दूरी महज 150 मीटर है। पिछले साल 6 दिसंबर को CM योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी आकर दालमंडी क्षेत्र के विकास प्रोजेक्ट की समीक्षा की थी। इसके बाद उन्होंने कहा था कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में आने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कत न हो, इसके लिए मंदिर से नजदीक दालमंडी मार्केट की सड़क को चौड़ा करके यहां मॉडल रोड बनाई जाएगी। रोड के दायरे में आने वाले दालमंडी के 181 मकान गिराए जाने हैं। 11 फरवरी तक 35 मकानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। इनमें आदिल खान के भी 2 मकान और एक दुकान है, जिन पर कार्रवाई हुई है। आदिल के परिवार में उनकी पत्नी और 3 बेटे हैं। वो 12 साल से दालमंडी में ‘वारसी कम्युनिकेशन’ नाम से मोबाइल फोन की दुकान चला रहे हैं। जिला प्रशासन के बुलडोजर एक्शन से निराश आदिल कहते हैं, ‘लोगों को गलतफहमी है कि अगर मकान और दुकानें खत्म कर दिए जाएंगे, तो लोग ये इलाका छोड़कर खुद चले जाएंगे। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। मेरे जैसे यहां बहुत से लोग हैं, जिनका एक घर कार्रवाई में चला गया है, लेकिन बस्ती के अंदर दूसरा मकान अब भी बचा है।‘ ‘हम लोग कहीं नहीं जाने वाले, यहीं दालमंडी में रहेंगे। क्योंकि हमें ये पता है कि अभी अंधेरी रात है, लेकिन कुछ दिन बाद फिर सवेरा होगा।‘ ‘लोकल विधायक की चुप्पी और प्रशासन की मनमानी से लोग परेशान हो चुके हैं। बात सिर्फ दालमंडी की ही नहीं। यहां डेवलपमेंट के नाम पर मणिकर्णिका घाट पर की जा रही तोड़फोड़ से भी हर वर्ग के लोगों में गुस्सा है। इसलिए एक बात जान लीजिए, जनता जब अपना गुस्सा उतारती है तो उसका असर सीधे 5 साल बाद चुनावों में ही दिखता है और इस बार ये निश्चित दिखेगा।’ ‘दालमंडी में 70% दुकानें मुसलमानों और 30% हिंदू दुकानदारों की हैं। यहां अग्रवाल, यादव, गुप्ता, पाल जैसे तमाम वर्ग के लोग व्यापार करते हैं। ये सभी BJP के कोर वोटर रहे हैं।’ कायनात के पास दुकान के कागज, लेकिन फिर भी तोड़ने का आदेश
दालमंडी में आदिल की दुकान से कुछ दूरी पर कायनात बानो की MS सेवई मर्चेंट नाम की ड्रायफ्रूट की दुकान है। ये उनके वालिद सिराज अहमद ने 1957 में किराए पर ली थी। तब से लेकर उनका परिवार हर महीने दुकान के किराए का 440 रुपए भर रहा है। उनके पास इसकी रसीद भी है। पिता की मौत के बाद कायनात और उनकी 4 बहनें ये दुकान संभाल रही थीं। अब उनकी दुकान जर्जर घोषित कर दी गई है। पेशे से एडवोकेट कायनात कहती हैं, ‘9 फरवरी को पुलिस की मौजूदगी में नगर निगम की टीम हमारी दुकान पर पहुंची। हमें बताया गया कि ये इमारत जर्जर है इसलिए दुकान जमीदोंज की जाएगी।‘ ‘आदेश के बाद हमारे मकान मालिक ने ऊपर का छज्जा, बरामदा और बाहरी दीवारें खुद गिरा दीं। इसके बावजूद प्रशासन हम पर दुकान खाली करने का दबाव बना रहा है। मैं CM योगी से यही कहना चाहती हूं कि हम लोग आपके विकास की राह में बाधा नहीं हैं। हम आपको सहयोग करते हैं, लेकिन आप भी हमारे बारे में सोचिए, हम कहां जाएंगे? कहां रोड पर भीख मांगेंगे? हमारे घर में चूल्हा कैसे जलेगा?‘ दालमंडी से वाराणसी को हर महीने मिलता है करोड़ों का रेवेन्यू
दालमंडी, वाराणसी की सबसे पुराने लोकल मार्केट के तौर पर जानी जाती रही है। यहां शादी-विवाह और मेकअप का सामान, ज्वेलरी साज-सज्जा, फैंसी कपड़े, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक, स्मार्टफोन से लेकर घड़ी और चश्मा बनाने के कारखानों के साथ हजारों दुकानें हैं। ये काशी में रहने वाले मुस्लिम व्यापारी, कारीगर और मजदूरों के रोजगार का सबसे बड़ा जरिया है। दालमंडी में पूर्वांचल के चंदौली, जौनपुर, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, बलिया के साथ-साथ बिहार की सीमा से नकदीक बक्सर, भभुआ, मोहनिया, आरा, छपरा, सासाराम जैसे जिलों के थोक और फुटकर व्यापारी खरीददारी करने आते हैं। काशी के इतिहासकार प्रवेश भारद्वाज कहते हैं, ‘दालमंडी बनारस की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है। मंडी शहर का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र रही है। आजादी की लड़ाई के दौर में जद्दनबाई से लेकर रसूलन बाई के कोठों पर सजने वाली संगीत की महफिलों के बीच ब्रिटिश सरकार के खिलाफ रणनीति तैयार होती थी।’ ’यहां आज भी लाल बलुआ पत्थर और चूने की जुड़ाई से बनी बेहद पुरानी इमारतें हैं, जिनमें बनारसी तहजीब की झलक मिलती है। दालमंडी के विकास के लिए जमीनें लेने से पहले सरकार को वहां रहने वालों को दूसरी जगह शिफ्ट करना चाहिए था। इससे उनका आर्थिक और मानसिक नुकसान पूरी तरह से भले कम न होता, लेकिन थोड़ी राहत जरूर मिलती।’ वाराणसी शहर की दक्षिण सीट पर 9 बार जीती BJP
दालमंडी इलाका वाराणसी की शहर दक्षिण सीट में आता है। यहां 1977 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ, जिसमें जनता पार्टी के नेता रामबलि तिवारी को जीत मिली। 1980 में कांग्रेस पार्टी के कैलाश टंडन ने रामबलि तिवारी को 19 हजार वोटों से हरा दिया। 1985 में भी इस सीट पर कांग्रेस पार्टी का कब्जा रहा। इस चुनाव में कांग्रेस नेता रजनी कांत ने BJP के श्यामादेव राम चौधरी को हराया। 1989 से लेकर 2022 तक वाराणसी शहर दक्षिण सीट पर 9 बार विधानसभा चुनाव हुए। सभी चुनाव BJP ने जीते। 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर BJP नेता और पूर्व विधायक नीलकंठ तिवारी को जीत मिली। उन्हें कुल 99,622 वोट मिले। उन्होंने सपा के कामेश्वर क‍िशन दीक्षित को महज 10,722 वोटों के अंतर से हराया। कामेश्वर किशन को 88,900 वोट मिले। BJP को वाराणसी की सभी 8 सीटों में सबसे कम मार्जिन वाली जीत इसी सीट पर मिली। 2024 लोकसभा चुनाव नतीजों में भी दिखा असर
2024 लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट पर सातवें चरण में एक जून को वोटिंग हुई थी। जब 4 जून को काउंटिंग शुरू हुई तो सुबह 9.15 बजे तक के आंकड़ों में पीएम मोदी कांग्रेस कैंडिडेट अजय राय से 6 हजार वोटों से पीछे चल रहे थे। इसकी बड़ी वजह वो 5 सीटें थीं, जहां मोदी को 2019 के मुकाबले 2024 में कम वोट मिलें। वाराणसी दक्षिण सीट, जिसमें दालमंडी भी आता है, वहां मोदी को 7,000 वोटों का घाटा हुआ। कुल 30 राउंड की काउंटिंग में मोदी को 6,12,970 लाख वोट मिले, जबकि अजय राय को 4,60,457 वोट मिले। मोदी 1,52,513 वोट से चुनाव जीते। जीत का मार्जिन 2014 और 2019 से कम रहा। एक्सपर्ट बोले- दालमंडी की तोड़फोड़ 2027 में BJP के लिए चुनौती
बनारस हिंदू यनिवर्सिटी में कॉमर्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. अवधेश सिंह कहते हैं, ’दालमंडी में मॉडल रोड बनाने के लिए प्रशासन 187 बिल्डिंग तोड़ रहा है। हर बिल्डिंग में करीब 6 से 8 दुकानें हैं। इतनी दुकानें टूटने का मतलब है कि आप सीधे-सीधे 1200 परिवारों को प्रभावित कर रहे हैं। यही लोग आने वाले चुनाव में वोट डालेंगे। जाहिर सी बात है, जिसका नुकसान होगा वो आपको वोट क्यों देगा।’ ’चाहे विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव दालमंडी का वोटर हमेशा बड़ी भूमिका निभाता रहा है। यहां हिंदू-मुस्लिम आबादी के वोटर तकरीबन बराबर हैं। शहर दक्षिण विधानसभा चुनाव में भले ही BJP की जीत हुई हो, लेकिन उसका प्रदर्शन 2017 की तुलना में खराब था। यही वजह है कि डॉ. नीलकंठ भले ही चुनाव जीत गए लेकिन उनका खराब प्रदर्शन देखते हुए इस बार योगी सरकार में उन्हें मंत्री पद नहीं मिला।’ ‘डेवलपमेंट होगा तो परेशानियां भी बढे़ंगी’
बनारस के सीनियर जर्नलिस्ट विश्वनाथ पांडे, अवधेश सिंह की बात से सहमत नहीं दिखते। वे कहते हैं, ’2024 लोकसभा चुनाव में वाराणसी की कई सीटों पर BJP के वोट कम पड़े, जबकि कांग्रेस-सपा को पिछले चुनाव से ज्यादा वोट मिले। इस बार भी सरकारी कामों की धीमी रफ्तार को देखकर बनारस के लोग बहुत संतुष्ट नहीं हैं। जितना डेवलपमेंट होना चहिए था, उतना नहीं हुआ। ये देखकर एक भ्रम की स्थिति जरूर है। फिर भी BJP के सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं दिखती।’ ’काशी में BJP को चुनौती देने के लिए अब भी कोई राजनीतिक विकल्प नहीं है। यहां आज भी इतनी मजबूत राजनीतिक समझ वाले लोग नहीं है, जो BJP को चुनौती दे सकें। सबसे बड़ी बात ये प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र हैं। ऐसे में BJP की पकड़ यहां स्वभाविक तौर पर बढ़ जाती है। लिहाजा, दालमंडी पर कार्रवाई का बहुत बड़ा इम्पैक्ट होगा, इसकी संभावना कम दिखती है।’ पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं…
BJP: दालमंडी की हालत धारावी जैसी, इसे पूर्वांचल का सिंगापुर बनाने की कोशिश
BJP नेता और वाराणसी के आदि विशेश्वर वार्ड-69 के पार्षद इंद्रेश सिंह कहते हैं, ’दालमंडी को पूर्वांचल का सिंगापुर कहा जाता है। हालांकि यहां की स्थिति ऐसी है कि ये सिंगापुर कम मुंबई का धारावी ज्यादा लगता है। अंधेरा और भीड़ इतनी की चलना भी दूभर। जब सिंगापुर कहा जाता है तो उसकी सूरत भी वैसे होनी चाहिए। इसे साफ-सुथरा करने की जरूरत है, जिसके लिए चौड़ीकरण जरूरी है।’ ’ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि दालमंडी और वहां के लोगों को उजाड़ा जा रहा है। ये विकास की सतत प्रक्रिया है। पांडेयपुर से लेकर आशापुर तक चौड़ीकरण हुआ, और भी कई मार्ग चौड़े किए जा रहे हैं। इस दौरान दिक्कतें आती हैं।’ कांग्रेस: तोड़फोड़ BJP का प्लांड एजेंडा, काशी की सारी सीट हारेंगे
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय कहते हैं, ’काशी में जब भी किसी घर में शादी या कोई कार्यक्रम होता है, लोग दालमंडी ही खरीदारी करने जाते हैं। ये इलाका पुराने समय से बनारस का ग्रोथ इंजन रहा है। यहां हर आदमी किसी न किसी तरह दालमंडी से जुड़ा है। BJP इसे तोड़कर बनारस की विरासत खत्म कर रही है। इसका असर वाराणसी की आठों विधानसभाओं सीटों पर दिखेगा।’ सपा: BJP दालमंडी वालों को दाल की तरह दर रही
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव कहते हैं, ’सरकार दालमंडी में मुआवजे के तौर पर दूसरी दुकान दे सकती है, लेकिन बाजार कैसे देगी। दालमंडी एक दिन में नहीं बनी है। यहां एक दुकान जमाने में जमाना लग जाता है। कई ऐसे व्यापारी हैं, जो पुश्तों से व्यापार कर रहे हैं। BJP दालमंडी वालों को दाल की तरह दरे नहीं, यहां के कारोबारियों को संरक्षण दें।’ ’BJP कभी भी दालमंडी से नहीं जीत पाई। मेरे पास वहां के बूथ के रिजल्ट हैं। भाजपा वाले जानते हैं कि वहां के लोगों ने उन्हें वोट नहीं दिया, इसलिए विकास के नाम पर ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं।’ ………………….. ये खबर भी पढ़ें… गैंग्स ऑफ म्यावड्डी; 1 लाख सैलरी-बंगले का ऑफर, मिली गुलामी थाईलैंड के घने जंगली इलाके माईसोट के रास्ते इंटरनेशनल बॉर्डर क्रॉस करने पर म्यांमार का शहर आता है, म्यावड्डी। ये कोई आम शहर नहीं है, कई देशों की पुलिस, इंटरपोल और अमेरिका की खुफिया एजेंसी FBI ने इसे खतरनाक शहरों की लिस्ट में डाला हुआ है। इस शहर की किसी बिल्डिंग में पहुंच गए, तो बिना पैसा दिए रिहाई नामुमकिन है। पढ़िए पूरी खबर…

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