जिले में दुधारू पशुओं को खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग से बचाने के लिए 45 दिवसीय निशुल्क टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान 22 जनवरी से 8 मार्च तक चलेगा। सर्दियों और मौसम में बदलाव के दौरान इस वायरल बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। खुरपका-मुंहपका मुख्य रूप से गाय और भैंस को प्रभावित करता है। इसमें पशुओं के मुंह, जीभ, मसूड़ों और खुरों में छाले व घाव हो जाते हैं। इन घावों के कारण पशु को अत्यधिक दर्द होता है, जिससे वह चारा नहीं खा पाता। इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है, जिसमें तेजी से गिरावट आती है। मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.पी. पाण्डेय ने बताया कि खुरपका-मुंहपका एक वायरल बीमारी है, जिसका कोई निश्चित इलाज नहीं है। इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है। भारत सरकार की योजना के तहत यह निशुल्क अभियान इसी उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इस 45 दिवसीय अभियान के दौरान पशु चिकित्सा विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर गाय और भैंस का टीकाकरण करेंगी। पशुपालकों को अपने पशुओं को लेकर कहीं जाने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि विभाग की टीमें स्वयं गांवों में पहुंचकर यह सेवा प्रदान करेंगी। डॉ. पाण्डेय ने यह भी बताया कि खुरपका-मुंहपका का टीका साल में दो बार लगवाना अनिवार्य है। एक खुराक लगभग छह महीने तक प्रभावी रहती है। छह महीने बाद दूसरी खुराक लगवाने से पशु अगले छह महीने तक सुरक्षित रहता है। यदि किसी पूरे गांव या क्षेत्र में सभी पशुओं का एक साथ टीकाकरण किया जाए, तो इस बीमारी के प्रसार को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। पशुपालन विभाग ने इस अभियान के लिए एक विस्तृत माइक्रो प्लान तैयार किया है, जिसमें प्रत्येक गांव के लिए टीकाकरण टीम का निर्धारण किया गया है। विभाग ने सभी पशुपालकों से इस निशुल्क टीकाकरण अभियान का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की है। समय पर टीकाकरण से पशु स्वस्थ रहेंगे, दूध उत्पादन स्थिर रहेगा और पशुपालकों को संभावित आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा।
दुधारू पशुओं में खुरपका-मुंहपका का खतरा बढ़ा:बचाव के लिए 45 दिवसीय निशुल्क टीकाकरण अभियान शुरू
📅 Published: January 20, 2026 |
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