नवजोत सिद्धू बोलीं- डेली गोमूत्र पीती हूं:कथावाचक अनिरुद्धाचार्य को कहा- कैंसर भी इसी से ठीक हुआ, डॉक्टरों ने 4 हफ्ते का मेहमान बताया था

📅 Published: January 31, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

पूर्व क्रिकेटर और पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू रोजाना गोमूत्र से स्नान करती हैं। इसके साथ ही वह नियमित रूप से गोमूत्र का सेवन भी करती हैं। डॉ. नवजोत कौर का मानना है कि कैंसर को हराने में गोमूत्र एक बड़ी दवा साबित हुआ। हाल ही में डॉ. नवजोत कौर सिद्धू वृंदावन गई थीं। वहां उन्होंने पहले प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। इसके बाद वह गौरी गोपाल आश्रम पहुंचीं, जहां आश्रम प्रमुख और कथा व्यास अनिरुद्धाचार्य से उनकी मुलाकात हुई। इस दौरान डॉ. नवजोत कौर ने उन्हें अपनी कैंसर से जुड़ी कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि वह पेशे से डॉक्टर हैं। जब उन्हें कैंसर हुआ था, तब डॉक्टरों की टीम ने कह दिया था कि वह सिर्फ चार हफ्ते की मेहमान हैं। इसके बाद उन्होंने आयुर्वेद के अनुसार डाइट अपनाई और नियमित रूप से गोमूत्र का सेवन किया। उनका कहना है कि इसी से उन्होंने कैंसर को मात दी। डॉ. नवजोत कौर ने कहा कि चार सप्ताह क्या, आज मैं पूरी तरह फिट हूं। नवजोत कौर सिद्धू की 3 बड़ी बातें… जानिए नवजोत कौर सिद्धू के बारे में अनिरुद्धाचार्य ने क्या कहा… पति ने बताया था कैसे ठीक हुईं नवजोत कौर शुगर-दूध बंद किए, हल्दी-नींबू पानी दिया: पति नवजोत सिंह सिद्धू ने उपचार को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि कैंसर एक इंफ्लामेशन है, जोकि दूध, कार्बोहाइड्रेट्स (गेहूं), रिफाइंड शुगर (जैसे कि जलेबी) और मैदा जैसी चीजों से होता है। इसलिए, इन्हें बंद कर दिया। हमने डाइट में वे चीजें एड कीं, जिसकी जरूरत थी। पत्नी को सुबह 10 बजे नींबू पानी दिया जाता था, जिसमें गर्म पानी, कच्ची हल्दी, एक लहसुन और सेब का सिरका होता था। चाय बंद कर गुड़ मिलाकर काढ़ा दिया: इसके आधा घंटे बाद 10 से 12 नीम के पत्ते और तुलसी देते थे। चाय पूरी तरह से बंद कर दी गई थी। सुबह चाय की जगह पत्नी को दाल चीनी, लौंग और छोटी इलायची का काढ़ा दिया जाता था। इसमें नाममात्र के लिए गुड़ मिलते थे। सफेद पेठे का जूस, बेरीज दिए: डाइट में नट्स एड किए गए थे। साथ ही सफेद पेठे का जूस दिया जाता था। इसके एक-डेढ़ घंटे बाद ब्लू बेरीज देते थे। अगर कोई ब्लू बेरी नहीं अफोर्ड कर सकता तो उसकी जगह अनार दिया जा सकता है। अगर कोई अनार भी इस्तेमाल नहीं कर सकता तो आंवला सबसे अच्छा है। ब्लैक बेरी (शहतूत) खाने से कैंसर को मात देने में बहुत मदद मिलती है। बेरीज के साथ चुकंदर, गाजर और आंवला का एक गिलास जूस और ड्राई फ्रूट दिए जाते थे। इसके बाद नोनी (सिद्धू की पत्नी का निकनेम) को कुछ नहीं दिया जाता था। देर शाम करीब साढ़े 7 बजे नोनी को अंत में उबला हुआ किनोवा (बथुआ) दिया जाता था। बादाम के आटे की रोटी, 4 बीज दिए: अगर किनोवा नहीं तो बादाम के आटे की रोटी, दो सब्जियां और सलाद दिया जाता था। दूध की जगह नारियल का दूध इस्तेमाल किया जाता था। बादाम मिल्क का इस्तेमाल करते थे। पत्नी को आयुर्वेद के हिसाब से 4 बीज भी दिए जाते थे। इसमें तिल, अलसी के बीज, सूरजमुखी के बीज शामिल थे। खीरा-नींबू डालकर पानी दिया, वर्जिश भी की: सिद्धू ने कहा- पानी की क्वालिटी भी मैटर करती है कि आप कितना साफ पानी पी रहे हैं। पानी का पीएच लेवल 7 हो, उसी पानी को पीना चाहिए। गंदा पानी पीने से भी कैंसर पनपता है। पानी में खीरा और नींबू डालकर ही पीना चाहिए। वर्जिश करना भी कैंसर से लड़ने का एक बड़ा हिस्सा है। जिसके शरीर में ऐसिड बनता है, उसके शरीर में कैंसर पनप रहा होता है। अगर आपको कोई दाल या फिर छोले बनाने हैं तो आप उसे एक रात पहले भिगो दो। इससे वह एसिडिक से एल्कलाइन हो जाता है।

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