नशीली दवांए बेचने वाली दो फर्मों पर FIR:अवैध रूप से करोड़ों की नशीली दवाओं को मुंबई से लेकर वेस्ट बंगाल तक बेचा

📅 Published: November 26, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

कानपुर की कलक्टरगंज थाने की पुलिस ने अवैध रूप से नशीली दवाएं बेचने वाली दो फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। दोनों ही फर्में भले ही कानपुर के पते पर रजिस्टर्ड थीं, लेकिन यहां पर कोई भी माल तैयार नहीं किया जा रहा था। फर्जी तरीके से माल की खरीद-फरोख्त दिखाकर दूसरी कंपनियों से दवा बनवाकर कानपुर ही नहीं यूपी के कई जिलों और आसपास राज्यों में भी इन दवाओं की सप्लाई की जा रही थी। जांच-पड़ताल में फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद ड्रग विभाग ने एक्शन लिया है। कानपुर से लेकर दिल्ली और वेस्ट बंगाल में खपाई करोड़ की नशीली दवाएं कलक्टरगंज थाने में मेडिसिना हेल्थकेयर के संचालक अनमोल गुप्ता और शिवम अग्रवाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। कोपरगंज स्थित फर्म के गोदाम से भारी मात्रा में कानपुर के साथ ही यूपी के कई जिलों और आसपास के कई राज्यों में इन दवाओं की अवैध रूप से बिक्री की जा रही थी। 28 जून को सहायक आयुक्त औषधि के निर्देश पर कानपुर देहात के औषधि निरीक्षक अजय कुमार संतोषी ने छापेमारी की तो यह खुलासा हुआ था। यहां पर भारी मात्रा में कोडीन, ट्रॉमाडोल, अल्प्राजोलम जैसी दवाओं की खरीद और बिक्री की गई थी। जांच के दौरान बिलों में झोल मिला और 19 में से तो सात बिलों का सत्यापन ही नहीं हो सका। फर्म ने यहां से दवाएं जबलपुर, मध्यप्रदेश, झारखंड, साउथ ईस्ट दिल्ली, भोपाल, वाराणसी, पश्चिम बंगाल, बिहार में बेचने की जानकारी मिली है। मामले में फर्म का रजिस्ट्रेशन पहले ही रद्द कर दिया गया था। 11 नवंबर को आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने अपनी टीम के साथ निरीक्षण करने के बाद कार्रवाई का आदेश दिया और अब मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई है। रोक के बाद भी करोड़ों की नशीली दवाएं बेची, फर्जी बिल मिले वहीं, दूसरी एफआईआर मेसर्स मसाइको एजेंसी कोपरगंज की मालिक उरई पटेल नगर निवासी अभिषेक शर्मा और मंजू शर्मा के खिलाफ गंभीर धाराओं में हुई है। इनका गोदाम जूही कला में है। ड्रग विभाग की छापेमारी में दोनों मालिक गायब थे। एकाउंटेंट जितेंद्र कुमार मौके पर मिला था। उससे तीन सालों के क्रय विक्रय का विवरण मांगा गया तो वह दिखा नहीं सके। फर्म ने भारी मात्रा में कोडीन युक्त औषधि को खरीदा गया। जिसकी बिक्री दूर दराज के जनपदों व प्रदेश के बाहर किया गया। बिक्री के आधार पर 83 फर्मो को सवाल जवाब के लिए पत्र भेजे गए। इनमे 28 फर्मो ने जवाब दिया। 24 फर्मो ने मसाइको एजेंसी से कोडीन युक्त कफ सिरप क्रय किए जाने की पुष्टि की। 59 फर्मो ने कोई उत्तर नहीं दिया। रोक के बावजूद नशे में उपयोग होने वाले कोडीन मिली दवाओं को बड़े पैमाने पर बेचा गया। 1.28 करोड़ रुपये की कोडीन युक्त दवाओं की बिक्री को दिखाया गया। इसके साथ ही फर्जी खरीद-फरोख्त और बिल का मामला भी सामने आया है। यह कंपनी सिर्फ नाम मात्र की रंजिस्टर्ड थी। दूसरी जगह से दवाएं बनवाकर पूरे देश में सप्लाई की जा रही थी। छापेमारी के दौरान कंपनी में कुछ भी नहीं मिला। यहां तक की कंप्यूटर भी नहीं चल रहा था। ड्रग इंस्पेक्टर ओमपाल सिंह ने बताया कि दोनों कंपनियों ने बड़े पैमाने पर नशीले कोडीन युक्त सिरप समेत दवाओं की बिक्री यूपी के बाहर राज्यों तक की है। खरीद बिक्री का ब्योरा पूरी तरह से नहीं दिया गया। रोक के बावजूद नशे में उपयोग होने वाली दवाएं बेची गई। दोनों फर्म के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। क्रास चेक करने पर की गई बिक्री जानकारी 71 फर्मो ने नहीं दी है। दिखावे के लिए गोदाम व दुकान खोले हुए थे।

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