साल 2006, नोएडा के सेक्टर-31 की D-5 कोठी से सटे नाले में 19 कंकाल मिले। 16 को लेकर केस चला, जिनमें 13 बच्चे और तीन बालिग लड़कियां थीं। उनसे रेप और मर्डर का आरोप कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उनके नौकर सुरेंद्र कोली पर लगा। 16 अक्टूबर 2023 को हाईकोर्ट ने पंढेर को और 11 नवंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया। रह गया एक सवाल कि उन 13 बच्चों और तीन लड़कियों को किसने मारा था। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में पंढेर ने माना था कि कोठी में मर्डर हुए थे, सुरेंद्र कोली ने कबूल किया था कि उसने मर्डर किए हैं। 16 केस में से 13 में गाजियाबाद के CBI कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को मौत की सजा सुनाई थी। पंढेर को दो केस में फांसी की सजा मिली। आखिर में दोनों बरी हो गए। एक केस की वजह से नोएडा की लुक्सर जेल में बंद सुरेंद्र कोली 19 साल बाद 13 नवंबर को बाहर आ गया। ऐसा क्यों हुआ, पुलिस और CBI से जांच में कहां चूक हुई, सुरेंद्र कोली के खिलाफ क्या सबूत और बयान थे और रिहाई के बाद कोली कहां गया, दैनिक भास्कर ने इसकी पड़ताल की। इसमें पता चला कि पंढेर की कोठी में कॉलगर्ल आती थीं। दो कॉलगर्ल ने CBI के सामने बयान भी दिए थे। ये बयान पहली बार सामने आए हैं। पहले सुरेंद्र कोली की बात
भाई बोले- सुरेंद्र अब तक हमारे पास नहीं आया
जेल से छूटने के बाद सुरेंद्र कोली उत्तराखंड में अपने गांव मंगरूखाल नहीं लौटा। ये गांव नोएडा से करीब 330 किमी दूर है। निठारी कांड के खुलासे से पहले कोली गांव आया था। फिर जांच के सिलसिले में नोएडा वापस गया और कभी नहीं लौटा। पता चला है रिहाई के बाद वो दिल्ली में रह रहा है और मीडिया से बात नहीं करना चाहता। सुरेंद्र कोली के भाई चंदन भी दिल्ली में रहते हैं। वे बताते हैं, ‘सुरेंद्र के जेल से बाहर आने के बारे में मीडिया से पता चला। अभी वो न हमसे मिला है, न बात हुई है।’ सुरेंद्र कोली की पत्नी और बच्चों के बारे में पूछने पर चंदन कहते हैं, ‘उनसे भी कई साल से कॉन्टैक्ट नहीं है। 2011 में मां का देहांत हुआ था। तब आखिरी बार सुरेंद्र की पत्नी से मिले थे।’ गांव का घर टूटने की कगार पर, कोई केस की बात नहीं करता
सुरेंद्र कोली का गांव मंगरूखाल उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में है। यहां के पूर्व प्रधान धर्मवीर नेगी बताते हैं, ‘सुरेंद्र कोली का परिवार अब यहां नहीं रहता। वे 4 भाई हैं। एक भाई प्राइवेट टीचर था। उसने सबसे आखिर में गांव छोड़ा था। सुरेंद्र कोली को सजा होने के बाद वो किसी से बात नहीं करता था। अब उनका घर गिरने की कगार पर है। गांव के लोग भी इस केस की बात नहीं करते।’ निठारी कांड में 3 बड़ी लापरवाही, जिनकी वजह से फांसी की सजा पाए कोली-पंढेर बरी
सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर कैसे बरी हो गए, इस पर हमने पंढेर की वकील मनीषा भंडारी और सुरेंद्र कोली के वकील सिद्धार्थ शर्मा से बात की। पता चला कि जांच में 3 बड़ी लापरवाहियां की गईं, जिनकी वजह से दोनों बरी हो गए। पहली लापरवाही: लोगों ने नरकंकाल निकाले, CBI ने रिकवरी मेमो नहीं बनाया
29 दिसंबर, 2006 की सुबह सैकड़ों लोग पंढेर की कोठी के सामने जुटे थे। उन्होंने कोठी से सटे नाले से मानव कंकाल निकाले। पुलिस ने सभी कंकाल रिकवर किए। कोर्ट ने इस रिकवरी को ही नहीं माना, न ही CBI ने रिकवरी मेमो बनाया। एडवोकेट मनीषा भंडारी कहतीं हैं, ‘किसी केस में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसकी निशानदेही से रिकवरी की जाती है। उसी प्रोसेस को रिकवरी मेमो कहते हैं। इस केस में आरोपियों की निशानदेही पर रिकवरी नहीं हुई। लोगों ने कंकाल और तमाम चीजें निकालकर पुलिस को सौंपे थे।’ ‘सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कहा कि घटनास्थल पर खुदाई शुरू होने से पहले उसे पूरी तरह प्रोटेक्ट नहीं किया गया। रिकवरी को रिकॉर्ड नहीं किया गया। इसलिए घटना वाली जगह से बरामदगी और रिमांड पेपर्स में अलग-अलग बातें थीं।’ ‘D-5 की तलाशी में कोई ऐसा सबूत नहीं मिला, जिससे फोरेंसिक तरीके से घटनाओं का पता लगाया जा सके। स्थानीय लोग नाले और कोठी के पीछे वाले हिस्से से हड्डियां निकाल रहे थे, वो सिर्फ D-5 का एरिया नहीं था। D-5 और D-6 दोनों के आसपास खुदाई चल रही थी। लग रहा था, जैसे हड्डियां और बॉडी पार्ट्स निकालने वालों को पहले से सब पता हो।’ दूसरी लापरवाही: कोठी के अंदर फोरेंसिक एविडेंस नहीं मिले
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि D-5 कोठी से सीमेन का सैंपल मिला था, वो दोनों आरोपियों से मैच नहीं हुआ। क्राइम सीन पर मिले कुल्हाड़ी और चाकू पर इंसान का खून या टिश्यू नहीं मिला। फोरेंसिक टीम को कोठी के अंदर से मरने वालों में से किसी का सबूत नहीं मिला, जिससे DNA का मिलान हो सके। सुरेंद्र कोली ने मजिस्ट्रेट के सामने 16 मर्डर की बात कबूल की थी। हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने कबूलनामे को नहीं माना। सुरेंद्र कोली के वकील सिद्धार्थ शर्मा बताते हैं, ‘हाईकोर्ट ने कहा कि सुरेंद्र कोली को लगातार 60 दिन तक कस्टडी रिमांड में रखा गया। एक केस में रिमांड खत्म होती, तो उससे पहले दूसरे केस में रिमांड मिल जाती थी।’ ‘इस तरह 60 दिन के बाद मजिस्ट्रेट के सामने कबूलनामा हुआ था। ये अपने आप में सवाल खड़े करता है। सुरेंद्र कोली ने 26 मार्च 2010 को लेटर लिखा था। उसमें लिखा है कि CBI ने मुझे बहुत टॉर्चर किया। बयान देने के लिए दबाव डाला था। इसलिए सुरेंद्र कोली के कबूलनामे को कोर्ट में नहीं माना गया।’ तीसरी लापरवाही: ऑर्गन ट्रेड एंगल से जांच नहीं, सबूत कमजोर हुए
पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निठारी कांड के पीछे सीरियल किलिंग नहीं, तो क्या ऑर्गन ट्रेड एंगल हो सकता है। इसे लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की एक कमेटी ने 2007 में रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में CBI को ऑर्गन ट्रेड के एंगल पर जांच करने के लिए कहा गया था। CBI ने उस लाइन पर जांच ही नहीं की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एजेंसी ने घर और पड़ोस के गवाहों की ठीक से जांच नहीं की, न ही कोई अहम सुराग खोजा गया। हर गलती ने सबूतों और भरोसे को कमजोर किया। इसलिए दोषी सुरेंद्र कोली को सभी आरोपों से बरी किया जाता है। इसके तहत लगाई गई सभी सजाएं और जुर्माने भी रद्द किए जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जजमेंट में लिखा है कि पुलिस समय पर और प्रोफेशनली कानून के हिसाब से जांच करती है तो सबसे मुश्किल रहस्य भी सुलझ सकता है। कई बड़े क्राइम को समय पर रोका जा सकता है, लेकिन ये सच में बहुत बुरा है कि निठारी केस में लापरवाही और देरी ने फैक्ट-फाइंडिंग प्रोसेस को खराब कर दिया। न सिर्फ खराब किया बल्कि जांच के घटिया तरीके ने उन रास्तों को बंद कर दिया, जिनसे असली अपराधी की पहचान हो सकती थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निठारी केस वीभत्स है। पीड़ित परिवार के दुख की कल्पना नहीं कर सकते, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कानूनी तौर पर कोई सबूत नहीं मिल पाया। भरोसेमंद सबूतों के बिना किसी को दोषी नहीं मान सकते। अब मोनिंदर सिंह पंढेर की बात कोठी में कॉलगर्ल बुलाते थे, बोले- मर्डर के वक्त मौजूद नहीं था
दैनिक भास्कर ने 10 नवंबर को मोनिंदर सिंह पंढेर का इंटरव्यू पब्लिश किया था। इसमें मोनिंदर सिंह पंढेर ने साफ कहा कि निठारी में मर्डर हुए, तब मैं घर पर नहीं था। उन्होंने ये भी माना कि वे कोठी में कॉलगर्ल बुलाते थे। दैनिक भास्कर ने कोठी में आने वालीं 12 से ज्यादा कॉलगर्ल के बयान की डिटेल निकाली। ये बयान CBI ने दर्ज किए थे। हमें कॉलगर्ल भेजने वाली महिला किरण (बदला हुआ नाम) का बयान भी मिला। फरीदाबाद में रहने वाली किरण ने बताया कि लापता हुई जिस कॉलगर्ल के मोबाइल फोन से निठारी कांड का खुलासा हुआ, उसके पिता ने 12 हजार रुपए के बदले उसे मेरे पास भेजा था। ये बयान CBI ने 16 जनवरी, 2007 को लिया था। इसमें किरण ने कहा था, ‘पति की मौत के बाद मेरे ऊपर 4 बच्चों की जिम्मेदारी थी। इसी दौरान मैं गलत महिलाओं के संपर्क में आ गई। 10-11 साल से वेश्यावृत्ति कर रही थी। 3-4 साल से कई लड़कियां मेरे संपर्क में हैं। इनमें से कई लड़कियां फरीदाबाद के सेक्टर-16 के एक होटल में रेगुलर जाती हैं।’ ‘मेरे पास बंगाल, यूपी, हरियाणा और दिल्ली की लड़कियां हैं। इनमें कोमल (बदला हुआ नाम) भी थी। उसकी उम्र करीब 26 साल थी। 2005 में मेरे ड्राइवर बाबूलाल ने मुझे नोएडा में रहने वाले किशनलाल (बदला हुआ नाम) से मिलवाया था।’ ‘किशनलाल को 12 हजार रुपए की जरूरत थी। उसने कहा था कि मेरी बेटी फरीदाबाद में तुम्हारे साथ रहेगी। उसी के काम से मिले पैसों से हिसाब हो जाएगा। मैंने किशनलाल को 12 हजार रुपए दे दिए और उसकी लड़की को फरीदाबाद ले आई।’ ‘मैंने उसे फरीदाबाद के सेक्टर-16 में मैगपाई होटल में कई बार भेजा। इसी दौरान जून 2005 में मैं मथुरा रोड पर एक रेस्तरां में मोनिंदर सिंह पंढेर से मिली थी। मैंने वहीं पहली बार कोमल की फोटो पंढेर को दिखाई थी। 2 हजार रुपए में कोमल को भेजने की बात तय हुई। मैंने उसी रात कोमल को D-5 कोठी में भेजा था। हम पंढेर को मेजर साहब कहते थे। उनके घर कॉलगर्ल भेजते थे।’ ‘कुछ समय में ही कोमल ने मेरे 7 हजार रुपए चुका दिए। उसी दौरान उसकी तबीयत खराब हो गई। इसके बाद उसकी भाभी यानी किशनलाल की बहू हमारे पास आ गई। उसने कॉलगर्ल का काम करके बाकी 5 हजार रुपए चुकाए थे।’ मोनिंदर सिंह पंढेर के कहने पर हम अलग-अलग लड़कियों को D-5 भेजते थे। बाद में कोमल मोनिंदर सिंह पंढेर से बात करने लगी। वो सीधे उसके पास चली जाती थी, ताकि मुझे पैसा न देना पड़े। पंढेर की कोठी में पार्टी के लिए गई कॉलगर्ल का बयान
D-5 कोठी में गई एक और कॉलगर्ल कविता (बदला हुआ नाम) ने 5 फरवरी 2007 को CBI के सामने बयान दर्ज कराया था। तब कविता की उम्र 29 साल थी। उसने बताया, ‘मैं गांव की एक लड़की के साथ दिसंबर 2002 में दिल्ली आई थी। उसने कहा था कि फैक्ट्री में काम दिला देगी। यहां पता चला कि वो कॉलगर्ल है। मेरे पास पैसे नहीं थे, मजबूरी में जिस्मफरोशी करने लगी।’ ‘2005 में दशहरे से 15 दिन पहले मेरी दोस्त सिम्मी ने मुझे मोनिंदर सिंह पंढेर से मिलवाया। हम मुनिरका में मिले थे। मोनिंदर सिंह अगले दिन मुझे मुनिरका से ही D-5 कोठी ले गए थे। वहां सुरेंद्र कोली भी था। उसने हमें खाना खिलाया था।’ ‘उस रात पंढेर ने मुझे 4 हजार रुपए दिए थे। करीब 15 दिन बाद मेरे पास फिर फोन आया। मोनिंदर सिंह पंढेर ने कहा कि मेरे दोस्त आ रहे हैं। इसलिए कई लड़कियों को लाना है। हम 5 लड़कियां रात करीब 10 बजे उनकी कोठी पर पहुंचे थे। देर रात तक पार्टी हुई। सबने शराब पी। दो लड़कियां एक साथ अलग कमरे में पंढेर के गेस्ट के साथ चली गईं।’ ‘मैं मोनिंदर सिंह के साथ अलग कमरे में गई। दो और लड़कियां दो अलग-अलग लोगों के साथ गईं। एक हफ्ते बाद भी हमें बुलाया गया था। मैं कई बार D-5 गई थी। तभी सुरेंद्र कोली ने मेरा नंबर ले लिया था।’ ‘एक बार सुरेंद्र कोली ने फोन करके मुझे बुलाया भी था। उसने कहा कि कुछ नए ग्राहक आए हैं। मैं कोठी पर पहुंची, तो वहां सुरेंद्र कोली के अलावा कोई नहीं दिखा। मैं घर लौट आई। सितंबर 2005 से अप्रैल 2006 के बीच वहां गई थी। उसके बाद दार्जिलिंग अपने गांव चली गई। फिर उनसे मुलाकात नहीं हुई।’ निठारी कांड से जुड़े सवाल, जिनके जवाब नहीं मिले 1. निठारी कांड में कितने लोग मारे गए
हमने निठारी से मिले नरकंकालों की जांच करने वाले एम्स के पूर्व फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. टीडी डोगरा से बात की। वे कहते हैं, ‘हमने 3 महीने तक जांच की थी। 21 अलग-अलग इंसानी कंकाल तैयार किए थे।’ उनके दावे के मुताबिक 21 लोगों के कंकाल मिले थे। बाद में सिर्फ 19 लापता लोगों की पहचान हुई। आखिर में 16 केस का ही कोर्ट में ट्रायल चला। ये राज ही है कि निठारी में आखिर कितने लोग मारे गए। 2. जिस कॉलगर्ल के फोन से पहला सुराग मिला, उसका DNA क्यों मैच नहीं हुआ
निठारी केस में पहला बड़ा सुराग लापता कॉलगर्ल कोमल के मोबाइल फोन से मिला था। इसकी जांच तब सब इंस्पेक्टर रहे विनोद पांडे ने की थी। उनकी टीम ने मोबाइल फोन ट्रेस करके सुरेंद्र कोली को पकड़ा था। विनोद पांडे अभी यूपी के हापुड़ में SHO हैं। वे कहते हैं कि 7 मई 2006 को सुरेंद्र कोली ने फोन करके उस कॉलगर्ल को बुलाया था। उस समय पंढेर अपने बीमार पिता की वजह से चंडीगढ़ में था। इसकी पुष्टि होने पर नौकर सुरेंद्र कोली पर शक हुआ। कोमल का फोन 21 दिसंबर, 2006 को एक्टिवेट हुआ। उसमें सुरेंद्र कोली का सिमकार्ड मिला। इसके बाद ये केस खुला था।’ ‘सुरेंद्र कोली ने माना था कि उसने कोमल की हत्या कर लाश के टुकड़े किए। सिर, चप्पल और पर्स कोठी के पीछे फेंका और बाकी हिस्से को नाले में बहा दिया था।’ ‘CBI और फोरेंसिक रिपोर्ट की पड़ताल में कोमल के पिता के DNA सैंपल से किसी भी कंकाल का मिलान नहीं हुआ। ऐसे में दो बातें हो सकती हैं, या तो D-5 के आसपास मिले कंकाल में कोमल थी ही नहीं। या कोमल का कंकाल मिला तो, लेकिन वो FIR दर्ज कराने वाले शख्स की बॉयोलॉजिकल बेटी नहीं थी।’ 3. निठारी से 3 किमी दूर रहने वाली दो लड़कियों की हड्डियां मिलीं, वे कौन थीं
CBI की फोरेंसिक रिपोर्ट में लिखा है कि जांच के दौरान हड्डियों के 73 टुकड़े मिले थे। ये अलग-अलग साइज के थे। सभी D-5 के पीछे मिले थे। 53 पॉलिथीन पैकेट मिले थे, जिनमें बायोलॉजिकल मटेरियल थे। इनके अलावा लड़कियों के बाल, जूते, चप्पल, मिट्टी में सने कपड़े थे। चंडीगढ़ के CFSL ने इनकी जांच की थी। 31 अगस्त 2007 की रिपोर्ट में लिखा है कि निठारी से मिली खोपड़ियों की सुपर इंपोजिशन तकनीक से पहचान की गई। आसपास के एरिया से गायब लड़कियों की फोटो की भी जांच हुई थी। बरामद खोपड़ियों में से नंबर-7 और नंबर-13 का मिलान निठारी से गायब लड़कियों से नहीं हुआ। निठारी से करीब 3 किमी दूर सेक्टर-24 थाना एरिया से लापता आशा और बसंती से दोनों खोपड़ियों का मिलान हुआ था। सवाल उठता है कि इनका नाम कभी CBI जांच में क्यों नहीं आया।
………………………………… मोनिंदर सिंह पंढेर का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू भी पढ़िए हां, कोठी में कॉलगर्ल बुलाई, घर में बच्चों की डेडबॉडी पड़ी रहीं, पता नहीं चला निठारी केस से बरी होने के बाद मोनिंदर सिंह पंढेर ने पहला इंटरव्यू दैनिक भास्कर को दिया। उन्होंने दो बातें कबूल कीं, एक कि कोठी में मर्डर हुए थे और कोठी में कॉलगर्ल बुलाई जाती थीं। पंढेर ने कहा कि मैं घर में कम ही रहता था। उसी वक्त कोठी में मर्डर होते रहे। डेडबॉडी नौकर सुरेंद्र कोली के बाथरूम में पड़ी रहती थीं। ये बाथरूम ऊपर फर्स्ट फ्लोर पर है, इसलिए कोई नहीं जान पाया।’ पढ़िए पूरा इंटरव्यू
पंढेर-कोली बरी, निठारी के 16 बच्चों-लड़कियों का कातिल कौन:कॉलगर्ल बोली- कोली ने D-5 कोठी में बुलाया, जांच में तीन बड़ी खामियां
📅 Published: November 26, 2025 |
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