क्या आप इस वक्त मोबाइल देख रहे हैं? जरा रुकिए और अपने बॉडी पोश्चर पर ध्यान दीजिए। क्या स्क्रीन देखने के लिए आपका सिर आगे या नीचे झुका हुआ है? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। आज औसतन एक व्यक्ति दिन में करीब 3 घंटे 15 मिनट मोबाइल पर बिताता है और लगभग 58 बार फोन चेक करता है। स्क्रीन से जुड़ी यह आदत अब सेहत पर असर दिखाने लगी है। इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर (ISIC) की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 80 प्रतिशत लोगों को जीवन में कभी–न–कभी पीठ दर्द की समस्या होती है। हर साल देश में 10 मिलियन से ज्यादा स्पाइन से जुड़े नए मामले सामने आते हैं। वहीं एम्स की 2023 की स्टडी बताती है कि क्रॉनिक बैक पेन के हर पांच में से एक मरीज की उम्र 30 साल से कम है। मोबाइल–लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल अब रीढ़ की सेहत को तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है। जो समस्या पहले उम्र बढ़ने के साथ जुड़ी मानी जाती थी, वह अब कम उम्र में ही दिखाई देने लगी है। इसलिए आज फिजिकल हेल्थ में जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. एम. एस. पांडुरंग, सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी, धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- स्क्रीन टाइम रीढ़ पर कैसे असर कर रहा है? जवाब- लंबे समय तक कंप्यूटर, फोन या टैबलेट देखने से हम अनजाने में गर्दन को आगे झुका लेते हैं। खासकर तब, जब सिर 45 डिग्री तक नीचे करके स्क्रीन देखी जाती है। यह पोजिशन सर्वाइकल स्पाइन पर दबाव कई गुना बढ़ा देती है। इससे “टेक नेक” का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। धीरे-धीरे चेस्ट और गर्दन की मांसपेशियां टाइट होने लगती हैं। वहीं, ऊपरी पीठ कमजोर पड़ जाती है। सवाल- टेक नेक क्या होता है? जवाब- टेक नेक वह समस्या है, जो फोन या कंप्यूटर इस्तेमाल करते समय गलत तरीके से बैठने पर होती है। इसमें गर्दन और कंधों में लगातार दर्द, अकड़न या भारीपन महसूस होता है। सवाल- पोश्चर बिगड़ने के शुरूआती संकेत क्या हैं? जवाब- पोश्चर खराब होने की शुरुआत अक्सर छोटे-छोटे बदलावों से होती है, जिन्हें हम रोजमर्रा की थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ये संकेत शरीर के संतुलन बिगड़ने का साफ इशारा होते हैं। ग्राफिक से उन संकेतों के बारे में समझते हैं- सवाल- क्या गलत पोश्चर गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकता है? जवाब- लंबे समय तक गलत पोश्चर में बैठने से शरीर पर लगातार दबाव पड़ता रहता है। इसका असर सिर्फ पीठ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। ग्राफिक से समझते हैं- इसलिए पोश्चर से जुड़ी समस्याओं को जल्दी पहचानकर ठीक करना जरूरी है। सवाल -इससे बचने के लिए कौन-से उपाय अपनाए जा सकते हैं? जवाब- कुछ आसान आदतें अपनाकर आप अपने पोश्चर को सही रख सकते हैं और इन दिक्कतों से बच सकते हैं। पॉइंटर्स से समझते हैं- स्क्रीन आई-लेवल पर रखें स्क्रीन हमेशा आंखों की सीध में रखें और करीब 15 इंच की दूरी बनाए रखें। जरूरत हो तो स्टैंड या एक्सटर्नल कीबोर्ड का उपयोग करें। दोनों पैर सीधे जमीन पर रखें बैठते समय पैर हवा में लटकने न दें। इससे कमर और घुटनों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। दोनों पैर जमीन पर टिके हों तो शरीर का संतुलन सही रहता है और थकान कम होती है। कुर्सी मेज के साथ फुटरेस्ट रखें अगर पैर जमीन तक नहीं पहुंचते तो फुटरेस्ट का इस्तेमाल जरूरी है। इससे पैरों को सही सपोर्ट मिलता है और लंबे समय तक बैठने पर कमर दर्द का खतरा घटता है। नियमित ब्रेक लेते रहें हर 20–30 मिनट में एक छोटा ब्रेक लें। थोड़ा स्ट्रेच करें, चलें, या गर्दन–कंधे हल्के से हिलाएं। नियमित नेक एक्सरसाइज करें चिन-टक, शोल्डर रोल और हल्के नेक स्ट्रेच जैसे व्यायाम गर्दन को मजबूत रखते हैं और मांसपेशियों को आराम देते हैं। बॉडी 90 डिग्री एंगल पर रखें हमेशा सीधे बैठें, पैर जमीन पर टिके हों, पीठ अच्छी तरह सपोर्ट में हो और कोहनी 90 डिग्री एंगल पर हो। झुककर बैठने से बचें। पीठ सीधी रखकर बैठें झुककर बैठने से रीढ़ पर दबाव बढ़ता है और पोस्चर बिगड़ता है। पीठ सीधी रखकर बैठने से गर्दन, कंधे और कमर की मांसपेशियां सुरक्षित रहती हैं। स्क्रीन टाइम कम करें बच्चों और बड़ों दोनों का स्क्रीन टाइम सीमित करें। ऑफलाइन टाइम बढ़ाएं और आउटडोर एक्टिविटीज को बढ़ावा दें। सवाल- स्क्रीन टाइम कैसे कम किया जा सकता है? जवाब- स्क्रीन टाइम को कम करना सिर्फ आंखों और दिमाग के लिए ही नहीं, बल्कि गर्दन, पीठ और पूरे पोस्चर की सेहत के लिए जरूरी है। कुछ छोटी आदतें अपनाकर आप डिजिटल ओवरलोड को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं। इन्हें ग्राफिक्स से समझें- पॉश्चर बिगड़ने से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और जवाब सवाल- क्या बच्चों और टीनएजर्स में भी पोश्चर बिगड़ने का खतरा होता है? जवाब- हां, ऑनलाइन क्लास, मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया की वजह से बच्चों और किशोरों में गलत पोश्चर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कम उम्र में पोश्चर बिगड़ने से आगे चलकर गर्दन, पीठ और रीढ़ से जुड़ी समस्याएं जल्दी शुरू हो सकती हैं। सवाल- काम के दौरान कुर्सी और टेबल का रोल कितना जरूरी है? जवाब- बहुत जरूरी। गलत ऊंचाई की कुर्सी या टेबल गर्दन और पीठ पर अतिरिक्त दबाव डालती है। सही एर्गोनॉमिक सेटअप न होने पर पोश्चर बिगड़ने की प्रक्रिया तेज हो जाती है, चाहे स्क्रीन आई-लेवल पर ही क्यों न हो।पोश्चर बिगड़ने की प्रक्रिया तेज हो जाती है, चाहे स्क्रीन आई-लेवल पर ही क्यों न हो।पोश्चर बिगड़ने की प्रक्रिया तेज हो जाती है, चाहे स्क्रीन आई-लेवल पर ही क्यों न हो।पोश्चर बिगड़ने की प्रक्रिया तेज हो जाती है, चाहे स्क्रीन आई-लेवल पर ही क्यों न हो। सवाल- डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए? जवाब- अगर गर्दन या पीठ का दर्द लगातार बना रहे, हाथों में झुनझुनाहट या सुन्नपन हो, सिरदर्द बढ़ता जाए या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो बिना देर किए ऑर्थोपेडिक या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। …………… ये खबर भी पढ़िए… फिजिकल हेल्थ- फ्रोजन शोल्डर क्या है:सर्दियों में बढ़ते केस, हार्ट पेशेंट, महिलाओं को ज्यादा रिस्क, डॉक्टर से जानें सेफ्टी टिप्स सर्दियां शुरू होते ही कुछ लोगों को पूरे शरीर में दर्द महसूस होने लगता है, लेकिन सबसे आम शिकायत कंधों के दर्द की होती है। ठंड का मौसम अपने साथ कई तरह की तकलीफें लेकर आता है, जिनमें सबसे आम फ्रोजन शोल्डर (कंधों का जम जाना) है। पूरी खबर पढ़िए…
फिजिकल हेल्थ- ज्यादा स्क्रीन टाइम से रीढ़ पर दबाव:बिगड़ता पोश्चर, बढ़ता बीमारियों का रिस्क, न्यूरोलॉजिस्ट से जानें बचाव के तरीके
📅 Published: January 6, 2026 |
📂 Category: Uncategorized
