फिजिकल हेल्थ- भारत में 13 करोड़ लोगों की किडनी खराब:तेजी से क्यों बढ़ रहे मामले, डॉक्टर से जानें सभी जरूरी सवालों के जवाब

📅 Published: December 29, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

CKD यानी क्रॉनिक किडनी डिजीज। इस बीमारी के मामले में हमारा देश पूरी दुनिया में दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर चीन है। खुद भारत में भी हार्ट डिजीज के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी बीमारी है। हेल्थ जर्नल द लैंसेट में पब्लिश एक ग्लोबल स्टडी के मुताबिक, 2023 में भारत में लगभग 13.8 करोड़ लोगों को क्रॉनिक किडनी डिजीज थी। पूरी दुनिया में यह बीमारी 2023 में हुई कुल मौतों का नौवां सबसे बड़ा कारण बनी। इससे दुनिया भर में लगभग 15 लाख लोगों की मौत हुई। क्रॉनिक किडनी डिजीज अचानक नहीं होती है। इसके लिए कोई वायरस या बैक्टीरिया जिम्मेदार नहीं है। यह लंबे समय तक खराब मेटाबॉलिज्म का नतीजा होता है। इसका मतलब है कि इस बीमारी से बचा जा सकता है। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज जानेंगे कि क्रॉनिक किडनी डिजीज क्या है। साथ ही जानेंगे कि- सवाल- क्रॉनिक किडनी डिजीज क्या है? जवाब- क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) में क्रॉनिक का मतलब है कि किडनी की समस्या धीरे-धीरे और लंबे समय में बढ़ रही है। इसके कारण किडनी अपना काम यानी खून को साफ करने और शरीर से वेस्ट निकालने का काम ठीक से नहीं कर पाती है। शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जैसे थकान, पैरों में सूजन या भूख कम लगना। किडनी डिजीज देर से पकड़ में आती है। इसका सबसे कॉमन कारण हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज है, जो किडनी की नाजुक ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है। समय रहते जांच के बाद जरूरी दवाएं लेकर, हेल्दी डाइट लेकर और शुगर-बीपी को कंट्रोल करके इसे संभाला जा सकता है। सवाल- क्या किडनी एक वाइटल ऑर्गन (ऐसा अंग, जिसके बिना हम जीवित नहीं रह सकते) है? जवाब- हां, किडनी एक वाइटल ऑर्गन है, यानी ऐसा अंग जिसके बिना शरीर नहीं चल सकता है। हमारे शरीर में दो किडनी होती हैं और इनका मुख्य काम खून को साफ करना है, यानी शरीर में बनने वाले वेस्ट और टॉक्सिन को पेशाब के जरिए बाहर निकालना। सवाल- भारत में किडनी डिजीज इतनी ज्यादा क्यों बढ़ रही है? जवाब- भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज के मामले तेजी से इसलिए बढ़ रहे हैं, क्योंकि यहां डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मामले बहुत कॉमन हो रहे हैं। ये दोनों लाइफस्टाइल डिजीज किडनी को लंबे समय में कमजोर कर देती है। सवाल- किडनी डिजीज क्यों होती है? किन हेल्थ कंडीशंस में इसका रिस्क बढ़ता है? जवाब- किडनी डिजीज अचानक नहीं होती, यह लंबे समय तक शरीर में मेटाबॉलिक गड़बड़ी के परिणामस्वरूप होती है। इसलिए किडनी को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका ये है कि हम उन बीमारियों और आदतों को कंट्रोल करें, जो किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं। नीचे ग्राफिक में देखिए कि किन हेल्थ कंडीशंस में रिस्क बढ़ता है– सभी पॉइंट्स को को विस्तार से समझें- डायबिटीज ब्लड शुगर लंबे समय तक हाई रहने से किडनी की नलिकाएं और फिल्टर धीरे-धीरे खराब हो जाते हैं, जिससे उनकी काम करने की क्षमता कमजोर हो जाती है। हाई बीपी हाई ब्लड प्रेशर से किडनी तक जाने वाली ब्लड वेसल्स सख्त और कमजोर हो जाती हैं, जिससे किडनी की फिल्टरिंग क्षमता कम हो जाती है। ओबिसिटी मोटापा इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाई BP दोनों बढ़ाता है, जिससे किडनी पर अतिरिक्त लोड पड़ता है और नुकसान की प्रक्रिया तेज होती है। स्ट्रेस लंबे समय तक स्ट्रेस रहने से हॉर्मोनल असंतुलन और ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जो किडनी की फिल्टरिंग यूनिट्स को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। स्लीप डिसऑर्डर नींद खराब होने से शरीर में सूजन और मेटाबॉलिक गड़बड़ी बढ़ती है, जो किडनी के टिश्यूज और काम करने की क्षमता पर सीधा असर डालती है। इंफ्लेमेशन शरीर में लगातार इंफ्लेमेशन रहने से किडनी की फिल्टरिंग झिल्लियां प्रभावित होती हैं, जिससे प्रोटीन लीकेज और किडनी डैमेज का खतरा बढ़ता है। फैटी लिवर फैटी लिवर मेटाबॉलिक सिंड्रोम, डायबिटीज और हाई BP से जुड़ा होता है, जो किडनी पर लोड बढ़ाकर उसकी कार्यक्षमता कमजोर करता है। हाई कोलेस्ट्रॉल खून में फैट बढ़ने से किडनी की ब्लड वेसल्स ब्लॉक या सख्त होने लगती हैं, जिससे किडनी का ब्लड फ्लो कम हो जाता है। PCOS पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) में इंसुलिन रेजिस्टेंस और हॉर्मोनल असंतुलन बढ़ता है, जो डायबिटीज और हाई BP का जोखिम बढ़ाकर किडनी को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। पेनकिलर लेना पेनकिलर्स किडनी के ब्लड सर्कुलेशन को कम करते हैं। लंबे समय तक पेनकिलर लेने पर किडनी की कोशिकाएं डैमेज होने लगती हैं। बहुत नमक खाना अधिक नमक ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और किडनी को अतिरिक्त पानी और सोडियम फिल्टर करने में मेहनत करनी पड़ती है, जिससे नुकसान होता है। स्मोकिंग और अल्कोहल सिगरेट और शराब ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किडनी तक ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने लगती है और फंक्शनिंग धीरे-धीरे खराब होती है। सवाल- क्रॉनिक किडनी डिजीज से बचने का तरीका क्या है? हम क्या करें कि ये बीमारी हमें हो ही नहीं? जवाब- नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए– सवाल- जो लाइफस्टाइल डिजीज किडनी डिजीज का रिस्क बढ़ाती हैं, उन्हें कैसे रिवर्स किया जा सकता है? जवाब- क्रॉनिक किडनी डिजीज को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन जिन लाइफस्टाइल डिजीज की वजह से यह होती है, उन्हें रिवर्स किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने शरीर की मेटाबॉलिक हेल्थ को सुधारें। नीचे दिए कदम धीरे-धीरे किडनी पर होने वाला दबाव कम करते हैं और बीमारी को बढ़ने से रोकते हैं। सवाल- एक बार किडनी खराब हो जाए तो क्या ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचता है? जवाब- किडनी खराब होने पर शुरुआती स्टेज में दवाएं लेकर, डाइट कंट्रोल करके और लाइफस्टाइल मैनेज करके किडनी की कार्यक्षमता कुछ समय तक बनाए रखी जा सकती है। इस दौरान डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है। यह कंडीशन कभी रिवर्स नहीं होती है। इसलिए एक समय के बाद किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचता है। सवाल- क्या क्रॉनिक किडनी डिजीज ठीक नहीं हो सकती है? जवाब- क्रॉनिक किडनी डिजीज एक ऐसी बीमारी है, जो एक बार हो जाए तो इसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है। इसका मतलब है कि किडनी का जो नुकसान हो चुका है, वह रिवर्स नहीं हो सकता है। ऐसे में आखिरी विकल्प डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट ही रह जाता है। हालांकि, जिन वजहों से किडनी खराब होती है, जैसे- हाई BP, डायबिटीज, मोटापा, स्ट्रेस और खराब खानपान, उन्हें कंट्रोल किया जा सकता है। ………………….. फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- ब्रेस्ट मिल्क में मिला यूरेनियम: ब्रेन–किडनी के लिए खराब, रुक सकती है ग्रोथ, जानें टॉक्सिन साफ करने के सही तरीके यूरेनियम केवल रेडियोएक्टिव नहीं होता, बल्कि यह एक खतरनाक केमिकल भी है। यह शरीर में पहुंचकर किडनी और हड्डियों को नुकसान पहुंचाता है। शिशुओं के लिए यह खतरा और ज्यादा है, क्योंकि उनके शरीर का इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता है। ऐसे में दूध के जरिए यूरेनियम उनका विकास और दिमागी सेहत प्रभावित कर सकता है। पूरी खबर पढ़िए…

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