इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि धारा 2(1)एच बीएन एसएस के तहत असंज्ञेय अपराध की चार्जशीट को सम्मन केस के बजाय कंप्लेंट केस कायम कर कार्यवाही करना बाध्यकारी है। मजिस्ट्रेट ने असंज्ञेय अपराध की पुलिस रिपोर्ट,(चार्जशीट)पर बिना आरोपी को सुनें सम्मन जारी करने के आदेश को अवैध करार दिया और कहा कि पुलिस रिपोर्ट को कंप्लेंट केस के रूप में सुनवाई कर आदेश जारी किया जाय। कोर्ट ने प्रकरण न्यायिक मजिस्ट्रेट शाहजहांपुर को वापस कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकलपीठ ने सभी मजिस्ट्रेट/पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिया है वह हाईकोर्ट महानिबंधक की ओर से जारी परिपत्र के क्रम में प्रत्येक आदेश पर अपने हस्ताक्षर के नीचे नाम, पदनाम और न्यायिक पहचान स्पष्ट रूप से अंकित करें। शाहजहांपुर निवासी प्रेमपाल व तीन अन्य की याचिका निस्तारित करते हुए एकल पीठ ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की तरफ से 11 अक्टूबर 2024 को पारित सम्मन आदेश निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट से कहा है कि प्रकरण में नया आदेश पारित करेंगे। प्रकरण से जुड़े तथ्य यह हैं कि थाना तिलहर क्षेत्र के विपक्षी रामनाथ और याचीगण प्रेमपाल पड़ोसी हैं। विवाद शौचालय के अपशिष्ट जल निकासी को लेकर है।
बिना आरोपी को सुनें सम्मन जारी का आदेश अवैध:असंज्ञेय अपराध की चार्जशीट को समन केस के बजाय कंप्लेंट केस से कार्यवाही बाध्यकारी है: हाईकोर्ट
📅 Published: November 27, 2025 |
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