ललित कला अकादमी, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में बुलंदशहर के चित्रकार डॉ. दुर्जन सिंह राणा की कलाकृति ‘अंतर-ज्ञान’ करीब एक लाख रुपये में बिकी। इस प्रदर्शनी के लिए पूरे भारतवर्ष से हजारों चित्रकारों ने अपनी कलाकृतियों के छायाचित्र भेजे थे, जिनमें से 292 चित्रों का राष्ट्रीय प्रदर्शनी हेतु चयन किया गया। इस प्रदर्शनी का अवलोकन देश की राष्ट्रपति, संस्कृति मंत्री भारत सरकार, देश के प्रमुख कला संस्थानों के अध्यक्षों, राजनेताओं और कलाकारों ने किया। कला प्रेमियों ने यहां ऊंचे दामों पर कुछ कलाकृतियां भी खरीदीं, इसी क्रम में डॉ. दुर्जन सिंह राणा की कलाकृति ‘अंतर-ज्ञान’ को करीब एक लाख रुपए में खरीदा गया। डॉ. दुर्जन सिंह राणा ने बताया कि ‘अंतर-ज्ञान’ शीर्षक से बनी इस कलाकृति में उन्होंने दर्शाया है कि आज मनुष्य प्रेम, मोह, माया, परिवार, धन और सोशल मीडिया से इतना जकड़ चुका है कि वह तनाव में जीवन जीने पर मजबूर है। वह असहाय होकर इससे बाहर निकलने का रास्ता खोज रहा है। चित्र में कमल के माध्यम से यह भी दिखाया गया है कि जब उसे अंतर-ज्ञान होता है, तो उसे अपना बचपन याद आता है कि यह सब तो हमारे बचपन में भी था, परंतु ऐसी समस्याओं को तो मैं गुब्बारे की तरह उड़ाता हुआ चला जाता था। यह सब एक कच्ची डोर से बंधी है, टूटती हुई नजर आ रही है। चित्र के इसी भाव से प्रभावित होकर कलाकृति को खरीदा गया। विदित हो कि चित्रकार डॉ. दुर्जन सिंह राणा मूलतः गांव नगला कटक के निवासी हैं तथा वर्तमान में पब्लिक इंटर कॉलेज, जौलीगढ़ में कला शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी के सम्मानित सदस्य भी नामित किया गया है। हाल ही में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ से भी भेंट कर कला के विषय में विस्तृत चर्चा की थी। उनकी इस उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा, जो अयोध्या स्थित राम मंदिर में भगवान रामलला की मूर्ति के रचनाकार भी हैं, ने उन्हें बधाई प्रेषित की है।
बुलंदशहर के दुर्जन सिंह राणा की कलाकृति:राष्ट्रीय प्रदर्शनी में करीब एक लाख रुपये में बिकी
📅 Published: November 23, 2025 |
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