बुलंदशहर में दो रेप पीड़िताओं को मेडिकल जांच के लिए जिला अस्पताल में घंटों भटकना पड़ा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के हस्तक्षेप के बाद ही उनका मेडिकल परीक्षण हो सका, जिससे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है। दोनों पीड़िताएं संबंधित थानों की महिला पुलिस के साथ कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए मेडिकल जांच के लिए अस्पताल पहुंची थीं। एक पीड़िता की मां तो इंतजार करते-करते बीमार पड़ गईं, जबकि दूसरी पीड़िता के परिजन सुबह से शाम तक परेशान रहे। सलेमपुर थाना क्षेत्र की एक नाबालिग लड़की के साथ हुए गैंगरेप के मामले में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर पीड़िता को मेडिकल के लिए भेजा था। लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने लगातार मेडिकल परीक्षण करने से इनकार कर दिया। मंगलवार को भी जब पीड़िता पहुंची, तो डॉक्टर ने मना कर दिया, जिसके बाद उसकी मां चक्कर खाकर गिर पड़ीं। उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कर उपचार दिया गया। इसी तरह डिबाई थाना क्षेत्र से आई दूसरी रेप पीड़िता का मेडिकल करने से भी डॉक्टर ने मना कर दिया था। ये दोनों पीड़िताएं सोमवार को भी मेडिकल परीक्षण के लिए आई थीं, लेकिन तब भी डॉक्टरों ने अगले दिन आने को कहकर टाल दिया था। मंगलवार को भी उन्हें यह कहकर लौटाया जा रहा था कि मेडिकल कल कराना था, आज नहीं होगा। परेशान परिजनों ने सीएमओ सुनील कुमार दोहरे से शिकायत की और मेडिकल परीक्षण कराने की गुहार लगाई। सीएमओ ने तुरंत संज्ञान लेते हुए ड्यूटी पर तैनात संबंधित डॉक्टर को मेडिकल परीक्षण करने के निर्देश दिए। इसके बाद ही दोनों पीड़िताओं का मेडिकल परीक्षण शुरू हो सका।
बुलंदशहर में दो रेप पीड़िताएं मेडिकल जांच के लिए भटकीं:मां अस्पताल में इंतजार करते बीमार हुई, सीएमओ के निर्देश पर हुआ चेकअप
📅 Published: November 25, 2025 |
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