माइनस 40 नंबर लाने वाले डॉक्टर से कौन इलाज करवाएगा:SC/ST/OBC सीटों पर 0 पर्सेंटाइल, डॉक्टर बोले- प्राइवेट कॉलेजों की सीट भरेंगे

📅 Published: January 24, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

डॉक्टरों के पोस्ट ग्रेजुएशन में एडमिशन के लिए होने वाला NEET-PG एग्जाम विवादों में है। इस साल सेकेंड राउंड की काउंसलिंग के बाद भी देश भर के मेडिकल कॉलेजों में PG की करीब 18 हजार सीटें खाली रह गईं। जिसके बाद NEET PG-2025 एग्जाम का कट-ऑफ SC/ST/OBC कैटेगरी के लिए परसेंटाइल घटाकर जीरो कर दिया गया। 13 जनवरी को नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने कटऑफ घटाने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया। इसके मुताबिक, रिजर्व कैटेगरी के लिए परसेंटाइल जीरो कर दिया गया, जो पहले 40 था। परसेंटाइल निकालने के फॉर्मूले के तहत एग्जाम में -40 मार्क्स पाने वाला कैंडिडेट भी अब काउंसलिंग में शामिल हो पाएगा। सरकार का तर्क है कि इससे सीटें खाली नहीं रहेंगी। वहीं डॉक्टर्स आरोप लगा रहे हैं कि ये प्राइवेट कॉलेज की सीटें भरने के लिए किया गया है। इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में संचित सेठ ने एक जनहित याचिका दाखिल की थी। 21 जनवरी को हाई कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ये एग्जाम डॉक्टरों की क्वालिटी चेक करने का नहीं है, बल्कि उन्हें PG कोर्स में दाखिला दिलाने का है। हालांकि अब भी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है, जिस पर सुनवाई होनी है। NEET PG से जुड़े इस विवाद को समझने के लिए हमने कुछ डॉक्टर्स से बात की। साथ ही मेडिकल फील्ड से जुड़ी ऑर्गनाइजेशन का भी पक्ष जाना। डॉक्टर्स क्या कह रहे…
ये सब प्राइवेट कॉलेजों की सीट भरने के तरीके
जयपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में काम कर रहे डॉ योगेश वर्मा ने NEET PG 2025 का एग्जाम दिया था। 3 साल पहले उन्होंने चेन्नई के एक सरकारी कॉलेज से MBBS पूरा किया। जीरो परसेंटाइल पर योगेश कहते हैं, ‘ये सिर्फ और सिर्फ बड़े प्राइवेट कॉलेज को फायदे पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। डॉक्टर की काबिलियत से इसका कोई लेना-देना नहीं है।‘ ‘इनका सिर्फ एक ही मकसद है, खूब पैसे कमाकर प्राइवेट कॉलेज की सीट भरी जाए। मुझे लगता है कि एग्जाम कराने वाली बॉडी प्राइवेट कॉलेज के इशारों पर ऐसा करती है। ये स्टूडेंट के फायदे के लिए तो नहीं है। ये सिर्फ सीट भरने के लिए हर साल ऐसा कर रहे हैं।’ परसेंटाइल पर विवाद को लेकर योगेश कहते हैं, ’ये -40 या जीरो परसेंटाइल का विवाद नहीं है। जब आपने क्वालिफाइंग मार्क्स इतना घटा दिया है तो जीरो या उससे नीचे सब बराबर है। इसे ऐसे बनाया गया है ताकि सिर्फ इसी (-40 मार्क्स) पर बात हो।’ NEET PG 2025 में ‘आंसर की’ भी सही तरीके से नहीं दी गई थी। पिछले साल सितंबर में जब ‘आंसर की’ आई तो क्वेश्चन पेपर नहीं दिए गए, जिससे पता चल सके कि किस सवाल का जवाब गलत हुआ। वे आरोप लगाते हैं कि जितनी भी मेडिकल बॉडी हैं, वे प्राइवेट कॉलेज, बड़े कॉर्पोरेट हॉस्पिटल के लिए काम कर रही हैं। स्टूडेंट्स के लिए कोई काम नहीं कर रही हैं। कम नंबर पर भी पैसे देकर सीट मिले तो क्या दिक्कत
दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर नीतेश सेहरावत के भी ऐसे ही आरोप हैं। वे कहते हैं, ‘इससे सिर्फ उन्हीं स्टूडेंट्स का फायदा होगा, जो प्राइवेट कॉलेज में ज्यादा फीस देकर पढ़ सकते हैं। जिसके मार्क्स कम हैं और उसके पास पैसे हैं, वो भला प्राइवेट कॉलेज में क्यों नहीं जाना चाहेगा।‘ ‘सच्चाई यही है कि जिसके 200-300 मार्क्स होंगे, तब भी वो अच्छी सीट नहीं ले सकता। आप अगर बराबरी लाने की बात करते हैं तो प्राइवेट कॉलेज की फीस भी नॉर्मल करिए, तभी कोई बात बनेगी। अभी तो सबका मकसद यही है कि प्राइवेट कॉलेज की सीट खाली ना जाए।‘ नीतेश ने भी पिछले साल NEET PG 2025 का एग्जाम दिया था। वे कहते हैं कि कुछ तो क्वालिफिकेशन रखनी ही पड़ेगी ताकि एग्जाम का स्टैंडर्ड बना रहे। ये सही बात है कि NEET सिर्फ एडमिशन के लिए है। लोग पढ़ाई करके और एग्जाम देकर ही पोस्ट ग्रेजुएट होंगे। ऐसे में फिर आप फीस ही नॉर्मलाइज कर दें।’ NEET PG का एग्जाम कुल 800 मार्क्स का होता है। तीन घंटे के पेपर में 180 सवाल पूछे जाते हैं। कट-ऑफ रिवाइज होने से पहले NEET PG 2025 में जनरल/EWS कैटेगरी के लिए क्वालिफाइंग 50 पर्सेंटाइल था, जो 276 मार्क्स के बराबर था। वहीं SC/ST/OBC के लिए 40 पर्सेंटाइल था, जो 235 मार्क्स के बराबर था। जब सीटें बढ़ाई गईं, तो खाली रहने लगीं
देश के सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएट सीट की संख्या 80,291 है। 2014 में ये संख्या 31,185 थी। क्लीनिकल सीटें जैसे रेडियोलॉजी, सर्जरी, डर्मेटोलॉजी, जनरल मेडिसिन जैसे सब्जेक्ट की सीटें जल्दी भर जाती हैं। जबकि सरकारी कॉलेजों में नॉन-क्लीनिकल (जिसमें मरीजों को ऑपरेट नहीं करते) सब्जेक्ट्स जैसे एनॉटामी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री की सीटें लगातार खाली रहने लगीं। प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की महंगी फीस के कारण ज्यादातर स्टूडेंट वहां नहीं जा पाते हैं। इसलिए पिछले कुछ सालों से पर्सेंटाइल घटाया जाने लगा है। दरअसल NEET PG एंट्रेंस पास करने के लिए परसेंटाइल का इस्तेमाल किया जा रहा है। यानी अगर किसी का परसेंटाइल 50 आया है तो इसका मतलब होता है, एग्जाम में बैठने वाले 50% स्टूडेंट्स से उसने बेहतर परफॉर्म किया है। ये कैंडिडेट की रैंक और एग्जाम में शामिल कुल कैंडिडेट की संख्या पर निर्भर करता है। 2025 में जीरो या उससे कम मार्क्स लाने वाले कैंडिडेट की संख्या 126 है। इनमें से 14 कैंडिडेट के जीरो आए हैं। वहीं -40 मार्क्स लाने वाला सिर्फ एक कैंडिडेट है। इसलिए जीरो पर्सेंटाइल के हिसाब से सबसे कम स्कोर वाले को भी कट-ऑफ में रखा गया है। NBEMS ने जो नोटिफिकेशन जारी किया, उसके मुताबिक जीरो पर्सेंटाइल के तहत -40 मार्क्स तक के स्टूडेंट काउंसलिंग के काबिल हैं। ये पहली बार नहीं है, जब NEET PG में कट-ऑफ पर्सेंटाइल जीरो किया गया है। इससे पहले 2023 में सभी कैटेगरी के स्टूडेंट्स के लिए कट-ऑफ पर्सेंटाइल जीरो किया गया था। हालांकि तब मेडिकल बॉडी ने जीरो पर्सेंटाइल के साथ मार्क्स नहीं बताया था। तब इस तरह का विरोध भी नहीं देखा गया था। NEET PG एग्जाम से डिग्री नहीं मिलती, ये एडमिशन के लिए
इस पूरे विवाद पर हमने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) से बात की, जो सरकार के फैसले को सपोर्ट कर रही है।12 जनवरी को IMA ने कट-ऑफ घटाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को चिट्ठी लिखी थी। जिसमें कहा कि मौजूदा कट-ऑफ से काबिल उम्मीदवार काउंसलिंग के प्रोसेस से बाहर हो जा रहे हैं। IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अनिल कुमार नायक बताते हैं कि संगठन को शिकायत मिल रही थी कि बहुत सारी सीटें खाली हैं और कट-ऑफ 50 पर्सेंटाइल से कम होने से ये सीटें भरी जा सकती हैं। वे कहते हैं, ‘NEET PG देने के बाद किसी को डिग्री नहीं मिल जाती है। इसमें 50% मार्क्स के साथ MBBS पास करने वाले स्टूडेंट बैठते हैं।‘ ‘SC या OBC स्टूडेंट भी इतने या इससे ज्यादा मार्क्स से पास हुए हैं। इसलिए उनकी योग्यता पर सवाल नहीं है। ये डॉक्टर अब भी प्रैक्टिस कर सकते हैं, लेकिन वे पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए जा रहे हैं। PG में एडमिशन मिलने के बाद इन्हें भी तीन साल बाद 50% मार्क्स से पास होने के बाद ही डिग्री मिलेगी।‘ डॉ अनिल के मुताबिक, पर्सेंटाइल घटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार हो रही है। दो राउंड की काउंसलिंग हो चुकी है। उसके बाद 18,000 सीटें खाली हैं। इनमें आधी से ज्यादा सीट सरकारी मेडिकल कॉलेजों की हैं। वहां नॉन-क्लीनिकल सब्जेक्ट्स जैसे एनॉटामी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, फोरेंसिक मेडिसिन की सीटें खाली हैं। ऐसे में ये कहना कि सिर्फ प्राइवेट कॉलेज को फायदा पहुंचाने के लिए हुआ है, वो गलत है। वे आगे कहते हैं, ‘जो लोग SC/ST/OBC स्टूडेंट्स को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, उनसे मैं कहना चाहता हूं कि ये (पर्सेंटाइल घटाना) सबके लिए किया गया है। जो लोग राजनीति करना चाह रहे हैं, वही इस तरह की बातें कर रहे हैं। जनरल कैटेगरी के लिए 7 पर्सेंटाइल किया गया है। नियमों के मुताबिक, रिजर्व कैटेगरी के लिए इससे 10 पर्सेंटाइल कम होना चाहिए। इसलिए ये जीरो किया गया है। ये सभी काबिल डॉक्टर हैं। नेगेटिव प्रचार नहीं करना चाहिए।’ डॉ अनिल कहते हैं कि जो लोग SC/ST या OBC को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि MBBS के एडमिशन में इन कैटेगरी से आने वाले स्टूडेंट्स का मार्क्स और जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स के मार्क्स में ज्यादा अंतर नहीं होता है। ये सिर्फ रिजर्व कैटेगरी से आने वाले स्टूडेंट्स को बदनाम करने की मानसिकता है। ये प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का नेक्सस
हालांकि फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहा है। उसका कहना है कि निगेटिव मार्क्स के साथ PG मेडिकल ट्रेनिंग की परमिशन देना किसी भी एकेडेमिक स्टैंडर्ड के हिसाब से सही नहीं है। FAIMA के चीफ एडवाइजर डॉ बिभू आनंद सवाल उठाते हैं कि सरकार का ये कदम प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की सीटें भरने के लिए किया गया है। ये कदम हेल्थ सेक्टर को नुकसान पहुंचा सकता है। डॉ बिभू कहते हैं, ‘प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलवाने का ये एक नेक्सस चल रहा है। इसलिए पर्सेंटाइल इस तरह से कम किया जा रहा है। अगर किसी ने MBBS क्वालिफाई किया है तो फिर NEET PG में जीरो या नेगेटिव मार्क्स कैसे आ सकते हैं। कम से कम उन्हें बेसिक नॉलेज तो होगी। मेरिट वाले कैंडिडेट सरकारी कॉलेजों में ही जाएंगे। जीरो पर्सेंटाइल होने से प्राइवेट कॉलेज में पैसे देकर जाने का रास्ता साफ हो जाता है।‘ डॉ बिभू आगे कहते हैं, ‘ऐसा नहीं है कि ये किसी खास कैटेगरी के लिए गलत है, बल्कि सभी के लिए गलत है। सरकार को खुद ये सोचना चाहिए कि किसी ऐसे डॉक्टर से कौन इलाज करवाएगा, जिसने एक सवाल का जवाब नहीं दिया हो।‘ वे कहते हैं, ‘सरकार को ऐसा नियम बनाना चाहिए कि लोग नॉन-क्लीनिकल ब्रांच में भी रुचि लें। ज्यादातर सीटें वहीं खाली रह रही हैं और सीटें खाली रहने के कारण हम ये नहीं कर सकते हैं कि मरीज की सेहत से समझौता हो। हमें ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि सारे कोर्स में लोग एडमिशन लें।‘ ‘मेडिकल स्टैंडर्ड से समझौता नहीं कर सकते‘
2022 में भी ये मामला कोर्ट में गया था। तब दिल्ली हाई कोर्ट में कट-ऑफ और कम करने की मांग की याचिका पर केंद्र सरकार ने कहा था कि न्यूनतम क्वालिफाइंग परसेंटाइल जरूरी है, जिससे मेडिकल एजुकेशन और प्रोफेशनल कोर्स का स्तर बना रहे। सरकार की दलील मानते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि मेडिकल फील्ड में पढ़ाई की क्वालिटी बहुत जरूरी है, क्योंकि ये लोगों की जान से जुड़ा मामला है। हालांकि, जब 2023 में केंद्र सरकार ने सभी कैटेगरी के लिए कट-ऑफ को जीरो पर्सेंटाइल किया था तब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। तब सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि ये सरकार का नीतिगत फैसला है और वो इसमें दखल नहीं दे सकता है। सरकार ने कहा- इसे सीटों की बर्बादी रुकेगी
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के एक सीनियर अधिकारी ने दैनिक भास्कर को बताया कि विवाद के बाद NEET PG 2026 के लिए एक्सपर्ट की एक कमेटी बनाई जाएगी। वो एग्जाम की मौजूदा प्रॉसेस, मार्किंग सिस्टम और काउंसलिंग प्रोसेस की जांच करेगी। NMC का पक्ष रखते हुए वे कहते हैं, ‘PG में एडमिशन सिर्फ एक ट्रांसपेरेंट तरीके से सीट अलॉट करने का तरीका है। स्टूडेंट्स की असली काबिलियत PG कोर्स के दौरान होने वाली 3 सालों की ट्रेनिंग और उसके बाद फाइनल एग्जाम से जांची जाती है। इसमें स्टूडेंट्स को कोई छूट नहीं दी जाती है। कट-ऑफ कम करने से ज्यादा डॉक्टर इन खाली सीटों में एडमिशन ले सकेंगे और इससे सीटों की बर्बादी रुकेगी।‘ हालांकि अधिकारी कहते हैं कि जो कमेटी बनाई जाएगी, वो पिछले 5 सालों के रिजल्ट देखेगी और पता करेगी कि किन सब्जेक्ट और कॉलेज में सीट खाली रह रही हैं। उन सब्जेक्ट्स में एडमिशन लेने के लिए स्टूडेंट्स को बढ़ावा दिया जाएगा।
……………….
ये खबर भी पढ़ें… ‘जो चल नहीं सकता, वो दंगों का मास्टरमाइंड कैसे’ दिल्ली में रहने वाले 36 साल के मोहम्मद इमरान का घर तुर्कमान गेट के पास है। यहीं उनकी कचौरी की दुकान भी है। 8 जनवरी की सुबह वो रोज की तरह दुकान गए, लेकिन शाम को घर नहीं लौटे। परिवार ने परेशान होकर जब ढूंढना शुरू किया तो करीब 2 घंटे बाद आसपास वालों ने बताया कि पुलिस उठा ले गई। थाने पहुंचने पर पता चला कि दंगे का केस लगा है। पढ़िए पूरी खबर…

Read more


📱 Share on WhatsApp 🌐 View Original Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *