कानपुर लोकसभा से तीन बार सांसद और केंद्र सरकार में कोयला मंत्री रहे श्रीप्रकाश जायसवाल के निधन के बाद उनकी सादगी और व्यक्तित्व के किस्से हर किसी की जुबां पर हैं। गमगीन माहौल के बीच जहां एक ओर सभी उनको श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर हर कोई उनके साथ की अपनी उन यादों को बता रहा है जो कि उनको जीवनभर याद रहने वाली हैं। दैनिक भास्कर टीम ने उनके साथ वालों से बात की, सभी ने एक सुर में कहा कि श्रीप्रकाश की यादें कहां भूल पाएंगे। उनके सामने कोई भी छोटा-बड़ा नहीं होता था। सभी को बराबर सम्मान देते थे। आने वालों से नहीं पूछा कि छोटे हो या बड़े
अमित मिश्रा ने बताया कि इन्होंने आने वाले से कभी यह नहीं पूछा कि आप छोटे हो या बड़े। सभी एक स्थान पर बैठे व काम सभी का हुआ। कभी निराश कोई नहीं जाता था। वह पीआरओ से लोगों का नाम लेकर पूछते थे कि काम हुआ या नहीं हुआ। रहते दिल्ली में अच्छा कानपुर लगता था
श्रीप्रकाश के करीबी अजय जायसवाल ने कहा कि बताया कि एक बार मंत्री रहते उनके साथ मालरोड में गाड़ी में सफर कर रहा था। तभी कुछ सीन देखकर बोले कि मैं दिल्ली रहता जरुर हूं लेकिन मुझे कानपुर अच्छा लगता है। वह बहुत सरल थे। उनके जैसा नेता मिल पाना मुश्किल। सबसे ज्यादा पत्राचार किया
एनडीए के संयोजक सुरेश गुप्ता ने बताया कि रिकॉर्ड निकलवा लिया जाएगा तो शासन-प्रशासन से सबसे ज्यादा पत्राचार करने वाले नेता श्रीप्रकाश जायसवाल ही निकलेंगे। उन्होंने अपनी पर्सनैलिटी स्वयं बनाई थी। तीन बार सांसद और महापौर रहे। छोटे लोगों के यहां भी निमंत्रण में जाते थे
अनिल सोनकर ने बताया कि उनके बारे में इतना कहा जा सकता है कि छोटे से छोटे और बड़े से बड़े लोगों द्वारा निमंत्रण में बुलाए जाने पर वह जरूर जाते थे। उनके काम करने का अंदाज बिल्कुल अनूठा था। वह सभी से सुख दुख में शामिल होते थे। साइकिल सवार की दाल देखकर बोले- अच्छी है
PRO राजू कुशवाहा ने बताया कि उन्होंने गरीबों के लिए बढ़कर काम किया। बताया कि वह एक बार मसवानपुर में पैदल यात्रा कर रहे थे। तभी एक युवक साइकिल पर दाल बेच रहा था। तभी वहां दाल ले रही महिलाओं ने पूछा कि मंत्री जी दाल कैसी है ले लूं। इतनी बात पर दाल वाले की ओर देखकर मुस्कुराए और दाल हाथ में लेकर बोले कि दाल अच्छी है ले लो। सभी के लिए दरवाजे खुले रहते थे ओपी श्रीवास्तव उनके दरवाजे पर बिना किसी भेदभाव के लिए सभी के लिए खुले रहते थे। कानपुर का विकास उनके द्वारा ही किया हुआ है। उनके द्वारा सरकार से अधिक से अधिक बजट सरकार से आवंटित कराया गया। जिसका काम कह दिया वह कराया। ईगो नाम की चीज नहीं थी
विनय कुमार सिंह ने बताया कि श्री प्रकाश जायसवाल बहुत ही सरल व्यक्ति थे। किसी भी काम के लिए जाओ उनके पास ईगो नाम की चीज नहीं रहती थी। कमजोर से कमजोर व मजबूत से मजबूत सभी के लिए वह एक समान थे। ——————
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यादों में श्रीप्रकाश जायसवाल:लोग बोले- छोटे-बड़े सभी को एक जैसा सम्मान देते, ईगो नाम की चीज नहीं थी
📅 Published: November 30, 2025 |
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