यूपी चुनाव से पहले मायावती को क्यों मिला बड़ा बंगला:अखिलेश को बताया सबसे बड़ा दुश्मन, योगी से मुलाकात के बाद क्या बदला

📅 Published: February 13, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

अप्रैल, 2024 की बात है। लोकसभा चुनाव होने वाले थे। मायावती के भतीजे आकाश आनंद यूपी के सीतापुर में रैली करने पहुंचे थे। उन्होंने BJP को नफरत फैलाने वाली और आतंकवादियों की पार्टी कहा। इससे बुआ मायावती इतनी नाराज हुईं कि फौरन आनंद को नेशनल कोआर्डिनेटर पद से हटा दिया। मायावती ने आकाश को पद से हटाने की बात सिर्फ दफ्तर के अंदर जारी लेटर तक नहीं रखी, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर लिखा, ‘आकाश आनंद से पद ले लिया गया है। अभी उन्हें पूरी तरह परिपक्व होने में वक्त लगेगा।’ आकाश समाजवादी पार्टी के खिलाफ भी खूब बोल रहे थे, लेकिन मायावती उस पर चुप रहीं। मैसेज साफ था कि मायावती BJP पर हमला करने से बच रही थीं। हां, राजनीतिक बयान देने की छूट थी। मायावती खुद रैलियों में BJP के खिलाफ राजनीतिक बयान दे रही थीं। इसके बाद उनकी BJP से करीबी के संकेत आने लगे। 9 अक्टूबर, 2025 को एक रैली में उन्होंने BJP को शुक्रिया कहा और CM योगी का आभार जताया। जनवरी, 2026 को मायावती को दिल्ली में एक और बंगला मिला है। ये टाइप-8 बंगला है, जबकि नेशनल पार्टी का अध्यक्ष होने के नाते उन्हें टाइप-6 या 7 बंगला ही मिल सकता है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या BJP और मायावती के बीच कोई खिचड़ी पक रही है, दोनों में औपचारिक गठबंधन भले न हो, लेकिन क्या अंदरखाने सांठगांठ हो चुकी है, क्या मायावती को मिला बंगला इसी का नतीजा है? लोकसभा चुनाव से अब तक BSP-BJP का समीकरण समझिए… नेताओं को आदेश- BJP पर तीखे बयान न दें
लोकसभा चुनाव के दौरान आकाश आनंद BJP पर हमलावर थे। एक रैली में उन्होंने कहा, ‘BJP ने केंद्र की ज्यादातर जांच एजेंसियों का राजनीतिकरण कर दिया है।‘ दूसरी रैली में कहा, ‘सवर्ण जातियों के गरीबों की हालत BJP के राज में बहुत खराब है। अगर निष्पक्ष चुनाव हुए तो BJP सत्ता से बाहर होगी।‘ 28 अप्रैल 2024 को सीतापुर की चुनावी रैली में आकाश ने BJP को नफरत फैलाने वालों की पार्टी कहा तो उन्हें पार्टी से बाहर होना पड़ा। हालांकि माफी मांगने के बाद उन्हें दोबारा पार्टी में जगह मिल गई। यहां मायावती का रुख साफ दिखा कि BJP पर तीखे हमलों से बचा जाए। इस पर BSP के प्रदेश स्तर के एक नेता बताते हैं, ‘लोकसभा चुनाव के दौरान BJP को टारगेट करके तीखे बयान देने पर रोक थी। हमसे कहा गया कि सिर्फ राजनीतिक बयान दें। BJP की राष्ट्रभक्ति पर सवाल न उठाएं और न ही उसे सांप्रदायिक कहें। मीडिया में जो बयान चलते रहे हैं, वो दे सकते हैं। हम समझ गए थे कि हमें समाजवादी पार्टी को टारगेट करना है। BJP को लेकर बहन जी का रुख नरम है।’ ‘हालांकि बहन जी कब, कौन सा फैसला करेंगी, कोई नहीं जानता। ये जरूर है कि अब अखिलेश के साथ तो समझौता नहीं करेंगी। हालांकि वे BJP के साथ बहुत अच्छे न सही लेकिन नॉर्मल रिलेशन रखना चाहती हैं।‘ क्या BSP और BJP में कोई सांठगांठ हुई है? सोर्स कहते हैं, ‘नहीं, कोई ऐसा सीधा मैसेज तो नहीं है लेकिन BJP पर हमला करने का कोई आदेश नहीं है।‘ BSP की बड़ी रैली से पहले योगी से मिलीं मायावती
BSP ने 9 अक्टूबर 2025 को लखनऊ में कई साल बाद बड़ी रैली की। तब कांशीराम की पुण्यतिथि थी। सोर्स बताते हैं, ‘मायावती और उनके करीबी सतीश चंद्र मिश्र इस रैली से करीब 15 दिन पहले यूपी के CM योगी आदित्यनाथ से मिले थे। उनके बीच क्या बात हुई, ये नहीं पता। हालांकि, इस मुलाकात के बाद रैली का प्रोग्राम और बड़ा किया गया। इसके बाद किसी ऑफिशियल गठबंधन पर बात नहीं हुई।’ ‘रैली में मायावती समाजवादी पार्टी पर खूब बरसीं। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में रहते PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) को याद नहीं रखती। कांशीराम की जयंती भूल जाती है, लेकिन सत्ता से बाहर होने पर उसे कांशीराम याद आते हैं।‘ रैली में कार्यकर्ताओं को कहा गया कि मायावती अपने वोटर्स (दलितों) को संदेश देंगी कि उनका मुकाबला सीधा समाजवादी पार्टी से है। कांग्रेस पर भी उनकी टेढ़ी नजर है। वहीं BJP के लिए उनका रुख आभार के तौर पर सामने आया। सोर्स बताते हैं, ‘रैली के बाद बहनजी का मैसेज जमीन तक पहुंच चुका है। विधानसभा चुनाव से पहले हम लोग घर-घर जाने की योजना बना रहे हैं। कुछ इलाकों में तो घर-घर जाओ अभियान शुरू भी हो गया है।‘ चुनावी रणनीति बनाने में क्या RSS बना BSP का मददगार
हमने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के यूपी में सक्रिय पदाधिकारी से पूछा कि BSP अचानक BJP पर इतनी नरम क्यों हो गई? जवाब मिला, ‘BSP की जैसी स्थिति है, उसके जीतने के चांस बहुत कम हैं। अगर वह सही रणनीति से लड़ेगी, तो कुछ सीटें ला भी सकती है।‘ ‘दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी इस बार पूरी तैयार है। ऐसे में BSP जितना एक्टिव होगी, उसका नुकसान समाजवादी पार्टी को होगा। अगर मायावती BJP पर नरम रहीं, तो उनके वोटर भी BJP पर नरम रहेंगे।’ क्या RSS इस बार रणनीति बनाने में BSP की मदद कर रहा है? इस पर पदाधिकारी का जवाब सीधा नहीं था। वे कहते हैं, ‘RSS के दरवाजे सबके लिए खुले हैं। जो मदद मांगेगा, उसे देंगे।’ इस बार BSP चुपचाप काम कर रही है। पार्टी के कार्यकर्ता वोटर्स के घर-घर जा रहे हैं। प्लान है कि यूपी के हर मंडल में मायावती खुद जाएंगी और रात वहीं रुकेंगी। वे मार्च से यह अभियान शुरू कर देंगी। इस दौरान चौपालें लगाई जाएंगी।’ पार्टी की चुनावी रणनीति पर BSP के एक नेता कहते हैं, ‘RSS के लोग रणनीति बनाने में तो शामिल नहीं दिखे, लेकिन जो रणनीति बनी है, वह RSS के मॉडल पर बनी है। इस बार डोर टु डोर अभियान पर जोर दिया जा रहा है।’ मायावती को लुटियन दिल्ली में कैसे मिला बड़ा बंगला
मायावती को 7 दिसंबर 2021 को दिल्ली में लोधी रोड पर टाइप-6 का बंगला नंबर- 29 मिला था। कुछ महीनों बाद उन्होंने इसे केंद्रीय कार्यालय में बदल दिया। करीब दो साल बाद फरवरी 2024 में मायावती को इसी रोड पर एक और बंगला मिला। ये टाइप-7 का बंगला नंबर-35 था। ये भी मायावती और BJP के बीच अच्छे संबंधों का संकेत माना गया। मई-जून 2024 में वे बंगले में शिफ्ट हुईं, लेकिन एक साल बाद 20 मई, 2025 को इसे खाली कर दिया। वजह बताई गई कि सामने मौजूद स्कूल से मायावती को दिक्कत हो रही है। हालांकि ये स्कूल तब भी था, जब मायावती ने बंगला लिया था। सोर्स का कहना है कि मायावती ने बंगला खाली नहीं किया, बल्कि उनसे खाली करवाया गया था। हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री ने उनके पास दो बंगले होने का हवाला देकर इसे खाली कराया था। मायावती इसे खाली नहीं करना चाहती थीं, क्योंकि उन्होंने इसे अपनी पसंद के हिसाब से रेनोवेट कराया था। साथ ही बताई गई वजह भी उन्हें वाजिब नहीं लगी थी। ‘डिपार्टमेंट से आदेश आया, मायावती के लिए बड़ा बंगला देखो’
बंगला उन्हें अलॉट किया गया था, तब भी मिनिस्ट्री को पता था कि उनके पास एक बंगला पहले से है। फिर इतने महीनों के बाद विभाग को आखिर दो बंगलों पर एतराज क्यों हुआ। हमने ये सवाल हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के ऑफिशियल सोर्स से पूछा। वे बताते हैं, ‘अक्टूबर 2025 के आखिरी हफ्ते में विभाग के पास मायावती के लिए टाइप-8 बंगले की तलाश का ऑर्डर आया। तब विभाग के पास कोई बंगला खाली नहीं था। विभाग को एक महीने पहले सितंबर में ही एक और पूर्व पदाधिकारी के लिए टाइप-8 बंगला खोजने का ऑर्डर मिल चुका था। उन्हें एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर बंगला नंबर-34 अलॉट भी कर दिया गया था। सोर्स के मुताबिक, बंगले में मरम्मत का काफी काम होना था। इसके लिए ऑर्डर भी जारी कर दिया था। तभी ऊपर से कहा गया कि अभी मरम्मत नहीं करनी है। फिर इस साल 20-21 जनवरी को ऑर्डर निकला कि ये बंगला मायावती के नाम अलॉट होगा।’ हमने हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के एक अफसर से पूछा कि नियम के मुताबिक मायावती को किस टाइप का बंगला मिलना चाहिए? जवाब मिला, ‘नेशनल पार्टी की अध्यक्ष या संयोजक और केंद्र में मंत्री को विभाग टाइप 6 या 7 बंगला देता है।’ फिर टाइप-8 बंगला कैसे अलॉट हुआ? उन्होंने कहा- ये स्पेशल रिकमंडेशन में दिया जा सकता है। हो सकता है कि कोई टाइप-7 बंगला खाली ही न हो। इसलिए टाइप-8 अलॉट कर दिया गया।‘ मायावती वाले बंगले पर थी केजरीवाल की नजर, मोदी के मंत्री को मिला
सोर्स ने बताया कि मायावती से लोधी रोड वाला बंगला नंबर-35 लेकर केंद्रीय मंत्री और बाद में यूपी के अध्यक्ष बने पंकज चौधरी को दिया गया। इस बंगले पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की भी नजर थी। मायावती ने बंगला खाली किया तो अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय पार्टी का संयोजक होने के हक से यही बंगला अलॉट करने की गुजारिश की थी। बंगला उन्हें नहीं मिला। अक्टूबर 2025 में उन्हें लोधी रोड पर बंगला नंबर- 95 अलॉट किया गया। मायावती के नए बंगले का रेनोवेशन शुरू
हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के GRPA विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बंगले का रेनोवेशन शुरू हो गया है। मई खत्म होने से पहले बंगले की मरम्मत पूरी करने के आदेश हैं। BSP के सोर्स के मुताबिक, मायावती तय करेंगी कि उन्हें यहां कब तक शिफ्ट होना है। पहले तो इस बंगले का रेनोवेशन होगा। फिर एक बार मायावती खुद भी बंगला देखने और अपने हिसाब से रेनोवेशन का निर्देश देने के लिए आ सकती हैं। …………………
ये खबर भी पढ़ें… क्या RSS की तरह रणनीति बना रहीं मायावती ‘मायावती ने लखनऊ में रैली की तो भीड़ उमड़ पड़ी। ये वो भीड़ थी, जो अपने साथ रोटियां बांधकर लाई थी। सोचिए कितनी कमिटेड जनता होगी, जो सिर्फ मायावती के नाम पर इकट्ठी हुई। वरना रैलियों में लोग तब जाते हैं, जब कम से कम खाने-पीने का अच्छा इंतजाम हो। कई बार तो लोग बारात जैसा स्वागत मांगते हैं।’ सीनियर जर्नलिस्ट अमिताभ अग्निहोत्री इसे सिर्फ बसपा की रैली नहीं बल्कि मायावती की सक्रिय राजनीति में वापसी मान रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर…

Read more


📱 Share on WhatsApp 🌐 View Original Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *