लखनऊ में विश्व धरोहर सप्ताह पर विशेष व्याख्यान:डॉ. रहीस सिंह ने 'भारतीय धरोहर' की वैश्विक प्रासंगिकता बताई

📅 Published: November 21, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

विश्व धरोहर सप्ताह के अवसर पर शुक्रवार को राज्य संग्रहालय, लखनऊ और उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय (संस्कृति विभाग) के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान ‘वैश्विक सभ्यता का केंद्र : भारतीय धरोहर’ विषय पर केंद्रित था। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार डॉ. रहीस सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। डॉ. रहीस सिंह ने भारतीय धरोहर की व्यापकता और उसकी वैश्विक प्रासंगिकता पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि धरोहर केवल पुरानी वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि हमारी जीवित सभ्यता की धड़कन हैं। यह हमारी सांस्कृतिक स्मृतियों, परंपराओं और जीवन मूल्यों का आधार है, जिसमें समाज जीता और विकसित होता है। हमारी संस्कृति एक जीवित संस्कृति है.. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विरासत की पीड़ा को समझना और उसे संरक्षित रखना हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। डॉ. सिंह ने आगे कहा कि हमारी संस्कृति एक जीवित संस्कृति है, यह हमारी आत्मा है। हमें अपनी धरोहर को सिर्फ देखकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए, बल्कि उसके संरक्षण में सक्रिय योगदान देना चाहिए ताकि भविष्य की पीढ़ियाँ भी इस गौरव को महसूस कर सकें। कार्यक्रम में उ.प्र. संग्रहालय निदेशालय की निदेशक डॉ. सृष्टि धवन ने बताया कि संग्रहालय द्वारा धरोहर संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए सप्ताह भर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। समाज को सुरक्षित करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग की निदेशक डॉ. रेनू द्विवेदी ने विश्व धरोहर सप्ताह मनाने के उद्देश्य और उसकी वैश्विक महत्ता के बारे में बताया।उन्होंने कहा कि धरोहर ऐसे स्थलों और परंपराओं का समूह है जो पूरे मानव समाज के लिए मूल्यवान हैं और इन्हें सुरक्षित रखना हमारी नैतिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक डॉ. मीनाक्षी खेमका ने किया, जबकि राज्य संग्रहालय के निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर नेशनल पीजी कॉलेज और खुन-खुन जी गर्ल्स डिग्री कॉलेज के विद्यार्थियों सहित अनेक इतिहास-रसिक उपस्थित रहे। प्रमुख अतिथियों में राम विनय, अलशाज फातमी, डॉ. अनीता चौरसिया, धनंजय राय, प्रमोद कुमार, शशिकला राय, गायत्री गुप्ता, राहुल सैनी और बलिहारी सेठ शामिल थे।

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