काशी तमिल संगमम् के चौथे संस्करण में CM योगी ने वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को सम्मानित किया। वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने हाल ही में काशी में शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिन शाखा के लगभग 2000 मंत्रों का दण्ड क्रम पारायण पूरा किया। यह पारायण लगातार 50 दिनों तक बिना किसी रुकावट के चला। देवव्रत की यह उपलब्धि बिना किसी गलती के की। उन्होंने इसे सबसे कम समय में पूरा करने का कीर्तिमान भी बनाया। विश्व में दूसरी बार और भारत में 200 साल बाद यह कारनामा हुआ है। इस सिद्धि पर रेखे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X (पहले ट्वीटर) पर पोस्ट कर बधाई दी। दक्षिण भारत के प्रसिद्ध श्री श्रृंगेरी शारदा पीठम के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री विद्याशंकर भारती जी महाराज ने बताया कि काशी के रामघाट स्थित वल्लभराम शालिग्राम सांगवेद विद्यालय में देवव्रत ने 2 अक्टूबर से 30 नवंबर तक लगातार 50 दिन तक यह सिद्धि की। देवव्रत महेश रेखे ने रोज सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक शुक्ल यजुर्वेद के करीब 2000 मंत्रों का दंडक्रम पारायण किया। बताया कि दंडक्रम मतलब हर मंत्र को 11-11 अलग-अलग क्रमों में दोहराना होता है। उन्होंने बताया कि यह बेहद कठिन होता है। इसे आखिरी बार 200 साल पहले नासिक के वेदमूर्ति नारायण शास्त्री देव ने किया था। विश्व में दूसरी बार और भारत में 200 साल बाद यह कारनामा हुआ है। देवव्रत महेश रेखे के सफल पारायण के बाद वाराणसी में शोभायात्रा निकाली गई। यह रथयात्रा चौराहे से महमूरगंज तक गई। इसमें 500 से ज्यादा बटुक शामिल रहे। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री विद्याशंकर भारती जी महाराज ने देवव्रत को स्वर्ण आभूषण और 1 लाख 11 हजार 116 रुपये की सम्मान राशि से सम्मानित किया। अब उस उपाधि के बारे में जानिए जो महेश रेखे को मिली
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री विद्याशंकर भारती जी महाराज ने बताया कि वेदमूर्ति वे होते हैं, जिनको वेदों का ज्ञान होता है। यह उपाधि उन विद्वानों और संन्यासियों को दी जाती है। जिन्होंने वेदों और हिंदू धर्मग्रंथों का लंबे समय तक अध्ययन किया हो। उन्हें याद कर लिया हो। इसके अलावा ऐसे लोग जिन्होंने वेदों का गहराई से अध्ययन किया हो। जिनका जीवन वैदिक परंपराओं के संरक्षण और प्रचार में समर्पित हो, उन्हें भी वेदमूर्ति कहा जाता है। पीएम मोदी ने बधाई दी, लिखा- मन प्रफुल्लित हो गया पीएम मोदी ने X पर लिखा, 19 वर्ष के देवव्रत महेश रेखे जी ने जो उपलब्धि हासिल की है, वो जानकर मन प्रफुल्लित हो गया है। उनकी ये सफलता हमारी आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा बनने वाली है। भारतीय संस्कृति में आस्था रखने वाले हर एक व्यक्ति को ये जानकर अच्छा लगेगा कि श्री देवव्रत ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा के 2000 मंत्रों वाले ‘दण्डकर्म पारायणम्’ को 50 दिनों तक बिना किसी अवरोध के पूर्ण किया है। इसमें अनेक वैदिक ऋचाएं और पवित्रतम शब्द उल्लेखित हैं, जिन्हें उन्होंने पूर्ण शुद्धता के साथ उच्चारित किया। ये उपलब्धि हमारी गुरु परंपरा का सबसे उत्तम रूप है। काशी से सांसद के रूप में, मुझे इस बात का गर्व है कि उनकी यह अद्भुत साधना इसी पवित्र धरती पर संपन्न हुई। उनके परिवार, संतों, मुनियों, विद्वानों और देशभर की उन सभी संस्थाओं को मेरा प्रणाम, जिन्होंने इस तपस्या में उन्हें सहयोग दिया। कौन हैं देवव्रत महेश रेखे
देवव्रत महेश रेखे (19) महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के एक साधारण ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए। देवव्रत महेश रेखे के पिता महेश चंद्रकांत रेखे भी बड़े विद्वान हैं। वह अपने बेटे के पहले गुरु भी हैं। 5 साल की उम्र से देवव्रत ने वेद मंत्र बोलना शुरू कर दिया था। …………………….. ये खबर भी पढ़िए- शामली में बावरिया गिरोह का सरगना एनकाउंटर में ढेर; पुलिस ने घेरा तो कार्बाइन से अंधाधुंध फायरिंग की यूपी के शामली में पुलिस ने बावरिया गिरोह के सरगना मिथुन बावरिया को एनकाउंटर में मार गिराया। मिथुन पर 25 से ज्यादा मुकदमे थे, वह शामली के अलाऊदीनपुर का रहने वाला था। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मिथुन पश्चिम यूपी के साथ ही दक्षिण भारत में भी नाम बदलकर क्राइम करता था। उसके खिलाफ 25 मुकदमे दर्ज थे। पढ़िए पूरी खबर
वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे का CM ने सम्मानित किया:काशी में 25 लाख से अधिक पदों का पाठ किया, 200 साल बाद ये कीर्तिमान रचा
📅 Published: December 2, 2025 |
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