शब-ए-बारात आज:मुरादाबाद कि मस्जिदों में इबादत की तैयारी तेज, कब्रिस्तानों में दोपहर से सफाई और फातिहा का सिलसिला

📅 Published: February 3, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

मुकद्दस माहे रमज़ान से 15 दिन पहले आने वाला माह शाबान यानी शब-ए-बारात मुसलमानों के लिए बहुत अहम और बरकत वाली रात मानी जाती है। यह इस्लामी महीने शाबान की पंद्रहवीं रात होती है। माना जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों पर रहमत फरमाता है और सच्चे दिल से मांगी गई दुआ और तौबा कबूल होती है। इसलिए लोग इस रात को इबादत और मग़फ़िरत की रात कहते हैं। मुरादाबाद में मुस्लिम समुदाय के लोग शब्-ए-बारात कि तैयारियों में लगे हुए हैँ। मस्जिदों में साफ सफाई का अहत्माम किया जा रहा है। यहां लोग देर रात इबादत करेंगे और अल्लाह से अपने गुनाहों कि माफ़ी मांगेंगे। इसके अलवा कब्रिस्तानों में भी लोग अपने रिश्तेदारों, अजीज़ो कि क़ब्र कि साफ सफाई में लगे हुए हैँ। बाज़ारों में भी ख़ासतौर पर कुर्ते पयजामे कि खरीदारी कि जा रही है। अधिकतर नौजवान् और बच्चे आज के दिन कुर्ते पयजामा और शालवार सूट पहनते हैँ। इस रात क्या-क्या किया जाता है कुरआन कि तिलावत मुस्लिम समुदाय के लोग इशा कि नमाज़ के बाद नफ्ल नमाज़ पढ़ते हैं, तस्बीह करते हैं और ज्यादा वक्त अल्लाह की इबादत में गुज़ारते हैं। कुरआन की तिलावत घरों और मस्जिदों में कुरआन शरीफ पढ़ा जाता है ताकि सवाब हासिल हो और दिल को सुकून मिले। दुआ और अस्तग़फार अपने गुनाहों की माफी, घर-परिवार की सलामती और मुल्क में अमन के लिए खास दुआएं मांगी जाती हैं। दरूद और ज़िक्र दरूद शरीफ, कलमा और तस्बीह पढ़कर अल्लाह को याद किया जाता है। रोज़े की नियत मुस्लिम समुदाय के ज़्यादातर लोग अगले दिन रोज़ा रखने की नियत भी करते हैं। खैरात और मदद गरीबों और जरूरतमंदों को खाना, कपड़े या पैसे देकर मदद की जाती है, इसे नेक अमल माना जाता है। मस्जिदों का माहौल मस्जिदों में खास रौनक और नूरानियत रहती है। नमाज़, तिलावत और दुआ का सिलसिला देर रात तक चलता है। लोग सुकून और अदब के साथ इबादत करते हैं। कब्रिस्तान की हाज़िरी लोग अपने अज़ीज़ो दुनिया से रुख़सत हुए मरहूम रिश्तेदारों की कब्र पर जाते हैं, फातिहा पढ़ते हैं, फूल चढ़ाते हैं और साफ-सफाई करते हैं। कई जगह कब्रों पर मिट्टी डालकर उन्हें दुरुस्त भी किया जाता है ताकि जगह साफ और सही रहे। शब-ए-बारात का असल पैग़ाम माफी, मोहब्बत, भाईचारा और नेक रास्ते पर चलना है। यह रात इंसान को अपने गुनाहों पर सोचने, दूसरों को माफ करने और भलाई के काम करने की याद दिलाती है।

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