साइबर लिटरेसी- SIR फॉर्म के नाम पर स्कैम:साइबर ठग ऐसे बना रहे शिकार, एक्सपर्ट से जानें इस फ्रॉड से बचने के तरीके

📅 Published: November 22, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) के निर्देश पर देश के कई राज्यों में मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसे लेकर मतदाताओं से वेरिफिकेशन के लिए प्रपत्र भरवाए जा रहे हैं। इसी बीच साइबर क्रिमिनल्स SIR के आड़ में लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। अब तक ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां मतदाता सूची अपडेट करने के नाम पर लोगों को ठगने की कोशिश की गई। इसी को ध्यान में रखते हुए हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल से एक एडवाइजरी शेयर की है। इसमें लोगों से SIR फॉर्म के नाम पर हो रही धोखाधड़ी से सावधान रहने की बात कही गई है। ऐसे में असली और नकली SIR प्रक्रिया में फर्क समझना बेहद जरूरी है। तो चलिए, आज साइबर लिटरेसी कॉलम में हम SIR के नाम पर होने वाले इस स्कैम के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- SIR क्या है? जवाब- SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चुनाव आयोग (ECI) द्वारा घर-घर जाकर की जाने वाली वोटर लिस्ट सत्यापन प्रक्रिया है। ECI के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसी मतदाता सूची तैयार करना है, जो पूरी तरह सटीक हो, जिसमें हर योग्य मतदाता का नाम सही तरीके से दर्ज हो और कोई भी डुप्लीकेट, फर्जी या अयोग्य नाम शामिल न हो। सवाल- SIR के नाम के पर कैसे स्कैम हो रहा है? जवाब- साइबर ठग SIR के नाम पर लोगों को फर्जी लिंक और APK फाइल भेज रहे हैं। वे खुद को चुनाव कर्मचारी बताकर कॉल करते हैं और कहते हैं कि ‘आपका नाम वोटर लिस्ट से हट सकता है, इस फॉर्म को तुरंत भरिए।’ लोग जैसे ही उस लिंक या फाइल को खोलते हैं, ठग मोबाइल का एक्सेस ले लेते हैं। इसके बाद वे OTP मांगकर बैंक खाते खाली कर देते हैं या फोन में मौजूद डाटा चुरा लेते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से समझिए कि ठग इस स्कैम को कैसे अंजाम देते हैं। सवाल- कैसे पता चलता है कि मैसेज में आया लिंक फर्जी है? जवाब- अगर मैसेज में आया लिंक SIR, वोटर वेरिफिकेशन या सरकारी काम के नाम पर कुछ डाउनलोड करने या तुरंत क्लिक करने को कह रहा हो तो वह फ्रॉड है। फर्जी लिंक पहचानने के कुछ संकेतों को ध्यान से समझिए- ऐसे किसी भी लिंक को न खोलें और तुरंत डिलीट कर दें। सवाल- स्कैमर्स SIR के नाम पर कौन-कौन सी जानकारी मांगते हैं? जवाब- स्कैमर्स का उद्देश्य यूजर की पहचान और बैंकिंग डेटा चुराना होता है। इसलिए वे SIR के नाम पर सेंसिटिव जानकारी मांगते हैं। जैसेकि- सवाल- क्या SIR के लिए ऑफिशियल कॉल आता है? जवाब- नहीं, SIR के लिए कोई ऑफिशियल कॉल नहीं आता है। इस प्रक्रिया में सिर्फ आपका बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ही घर पर आकर जानकारी लेता है या आधिकारिक नोटिस देता है। सवाल- SIR में अपनी वोटर ID अपडेट कराने का सही तरीका क्या है? जवाब- SIR अपडेट सिर्फ बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के माध्यम से होता है। इसके लिए आपको किसी लिंक पर क्लिक, APK डाउनलोड या OTP शेयर करने की जरूरत नहीं होती है। आइए इसे स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं। अगर EF नहीं मिला या BLO नहीं पहुंचा तो वोटर हेल्पलाइन एप (VHA), 1950 हेल्पलाइन या voters.eci.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। स्थानीय ERO से भी संपर्क कर सकते हैं। सवाल- SIR के नाम पर स्कैम का शिकार होने पर तुरंत क्या करना चाहिए? जवाब- अगर आप SIR के नाम पर किसी ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाते हैं तो बिना देरी किए तुरंत कुछ एक्शन लें। सवाल- SIR के नाम पर होने वाले स्कैम से बचने के क्या तरीके हैं? जवाब- सतर्कता बरतना ही इससे बचने का सबसे आसान तरीका है। याद रखें निर्वाचन आयोग या BLO कभी भी किसी लिंक पर क्लिक करने, APK फाइल डाउनलोड करने, OTP साझा करने या बैंक डिटेल देने को नहीं कहते हैं। हमेशा यह सुनिश्चित करें कि BLO आपके क्षेत्र का नियुक्त कर्मचारी हो, उसके पास ऑफिशियल आईडी हो और वह घर या मोहल्ले में आकर ही एनुमरेशन फॉर्म दे रहा हो। किसी भी कॉल, मैसेज या वॉट्सएप लिंक पर भरोसा तभी करें, जब आप उसकी वास्तविकता की पुष्टि कर लें। नीचे दिए ग्राफिक से इस फ्रॉड से बचने के तरीके समझिए- सवाल- अगर गलती से OTP दे दिया हो तो क्या होगा? जवाब- OTP मिलने के बाद स्कैमर्स आपके मोबाइल, वॉट्सएप, ईमेल और बैंकिंग एप का एक्सेस लेने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे मामलों में तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके सभी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन सर्विसेज अस्थायी रूप से ब्लॉक करवाएं। मोबाइल में मौजूद पासवर्ड, UPI पिन और सभी अकाउंट्स के लॉगिन बदलें। 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। सवाल- क्या TRAI, बैंक या सरकार कभी SIR से जुड़ा कोई SMS भेजती है? जवाब- नहीं, न TRAI, न बैंक और न ही कोई सरकारी विभाग SIR से जुड़ा कोई SMS भेजता है। SIR पूरी तरह ऑफलाइन और BLO के माध्यम से किया जाने वाला फील्ड-वेरिफिकेशन प्रोसेस है। ऐसे मैसेज वह 100% फर्जी और साइबर फ्रॉड का हिस्सा है। ………………. साइबर लिटरेसी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए साइबर लिटरेसी- RTO के नाम से आ रहा फेक चालान: ठगों से सावधान, जानें कैसे होता है ये स्कैम, चालान भरते हुए बरतें 10 सावधानियां इस स्कैम में ठग लोगों के वॉट्सएप पर ‘RTO e-Challan.apk’ नाम की एक नकली फाइल भेजते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल पर क्लिक करता है, उसके फोन में मालवेयर इंस्टॉल हो जाता है। इसके जरिए वे बैंकिंग डिटेल्स तक पहुंच बना लेते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

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