सीएम योगी से मिलीं तो बीजेपी नेता पर FIR:28 साल बाद महिला को मिला न्याय, भाजपा के पूर्व विधायक कार्रवाई की जद में

📅 Published: November 21, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

कौशांबी के भरवारी में मेरा मकान था। सन 1970 में मेरे पति उमाशंकर केसरवानी ने चेयरमैन लखन लाल केसरवानी से 500 रुपए में 12/40 का प्लॉट नीलामी में खरीदा था। इसके एक साल बाद चार मंजिला मकान बनवाकर हम अपने दो बेटे शिव शंकर और हरि शंकर, बेटी आरती और पूजा के साथ रहने लगे थे।
2004 में मेरे पति की मौत हो गई।
पति की मौत के एक साल बाद 7 मई 2005 को लखन लाल ने मेरे पति की मौत 30 साल पहले दिखाकर मकान को हड़पने की कोशिश शुरू कर दी। इसके बाद मकान के विवाद की लड़ाई शुरू हुई। कागजी कार्रवाई शुरू हुई तो, 2012 में इस विवाद में भाजपा के चेयरमैन संजय गुप्ता की इंट्री हुई और इस मकान को हड़पने में मदद करने लगे।
इसके बाद भाजपा नेता संजय गुप्ता के खिलाफ तत्कालीन डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की गई। उन्होंने संजय गुप्ता को मामले में मदद करने को कहा, लेकिन संजय गुप्ता ने अपने पावर का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया। यह विवाद चलता गया। कोखराज थाने से लेकर डीएम तक शिकायत की गई, लेकिन न्याय नहीं मिला। 28 सालों तक न्याय की आस में इस लड़ाई को जारी रखा और फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर समस्या से अवगत कराया गया।
जिसके बाद सीएम ने तत्काल मामले को संज्ञान में लेकर भाजपा नेता संजय गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश जारी कर दिया। कोखराज थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद अब मुझे न्याय मिला है। यह बात 28 सालों अपने हक की लड़ाई लड़ रही विधवा महिला राम दुलारी ने दैनिक भास्कर से कहीं। फर्जी दस्तावेज बनाकर किया है मकान में कब्जा राम दुलारी का कहना की कौशांबी के चेयरमैन रहे कैलाश केसरवानी ने पहले फर्जी दस्तावेजों से नाम चढ़वाया था। मैं बार बार कार्रवाई के लिए दौड़ती रही। इस पूरे मामले में संजय गुप्ता ने लखन लाल की मदद की। मेरे पति और बेटे को कोखराज थाने में बंद कराकर पिटवाया। पुलिस ने हमारी नहीं सुनी। इस मामले में कौशांबी के डीएम रहे मनीष वर्मा से भी शिकायत की गई थी, लेकिन संजय गुप्ता के रसूख के चलते हमारी सुनवाई नहीं हो सकी और हम अपने हक के लिए दौड़ते रहे। दो लाख लेकर मकान छोड़ने को कहा पीड़ित महिला के बेटे ने केशव प्रसाद इसे मुलाकात की थी। केशव मौर्य ने संजय गुप्ता से उसका परिचय कराया था। कहा था कि मेरा मेरे परम मित्र के दोनों बेटे हैं। इनका मामला हल करा दो। लेकिन संजय गुप्ता ने मामले को हल कराने के बजाय दो लाख रुपये लेकर मकान खाली करने की बात कही। फिर बार बार जनसूचना आयोग से कागज मांगने पर भी उन्होंने कागज नहीं दिए। जिसका 5 बार में 1 लाख 25 हजार जुर्माना लग चुका है। कौन है संजय गुप्ता संजय गुप्ता प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के करीबी माने जाते है। संजय गुप्ता पहले भरवारी से चेयरमैन बने। इसके बाद चायल विधान सभा सीट से विधायक बने। डिग्री कॉलेज, पेट्रोल पंप और भी कई करोड़ों के कारोबार के मालिक है। भाजपा में अच्छी पकड़ रखते है। प्रयागराज के नैनी में बनवाया मकान पीड़ित महिला राम दुलारी का कहना है कि वहां की संपति में विवाद शुरू के बाद प्रयागराज के नैनी गंगोत्री नगर में एक छोटी सी जमीन खरीदकर छोटा सा मकान बनाया। यहां पर आकर परिवार के साथ रहने लगे। घर में एक किराने की दुकान खोलकर पूरे परिवार का भरण पोषण किया जा रहा है। इसके अलावा और कोई आय का साधन नहीं है। जो भी कमाते है वो अपनी पुरानी संपति को पाने के लिए दौड़ने में ही खर्च हो जा था था। अब पढ़िए पूरा मामला चायल विधान सभा सीट के पूर्व भाजपा विधायक संजय गुप्ता और भरवारी के पूर्व चेयरमैन कैलाशचंद्र केसरवानी समेत सात लोगों के खिलाफ मकान पर कब्जा करने, साजिश रचने और धमकी देने के मामले कोखराज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। विधायक ने खुद पर लगे आरोपों को बताया गलत कौशांबी के भरवारी थाने में केस दर्ज होने के बाद पूर्व विधायक ने खुद के ऊपर लगाए गए सारे आरोप गलत बताए हैं। उन्होंने बताया कि इस महिला को मैं नहीं जानता हूं। मेरी महिला से कोई मुलाकात नहीं हुई। मेरा इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। यह मामला दो भाइयों के बीच का है। यह वर्ष 2004 का मामला है उस समय मैं चेयरमैन भी नहीं था। मै इनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दर्ज कराऊंगा।

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