हाईकोर्ट की कैंट बोर्ड कर्मचारियों को राहत:समान काम के बदले समान वेतन देने के आदेश,15 साल से संघर्ष,1969 के समझौते का उल्लंघन

📅 Published: February 7, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कैंटोनमेंट बोर्ड में कार्यरत कर्मचारियों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि पंप अटेंडेंट,पंप ड्राइवर और फिटर जैसे पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को उनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से 140-300 रुपये का नया वेतनमान दिया जाए, जो पंजाब सरकार के समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के बराबर है। 15 साल से कर रहे संघर्ष सुनवाई के दौरान जस्टिस हरप्रीत सिंह ब्रार ने कहा कि याचिकाकर्ता पिछले 15 साल से ज्यादा समय से अपने हक के लिए लड़ रहे थे, लेकिन फिर भी उन्हें उनकी पढ़ाई और तकनीकी योग्यता के अनुसार वेतन नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ताओं के पास मैट्रिक के साथ दो साल का आईटीआई कोर्स है, जिसके आधार पर वे ऊंचे वेतनमान के हकदार हैं। पंजाब सरकार के कर्मचारियों के बराबर वेतनमान हाईकोर्ट के वकील गर्गी कुमार, बिंदू गोयल और परीतिश गोयल ने कहा कि अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ताओं की योग्यता और पद पंजाब सरकार के पब्लिक हेल्थ विभाग (अब जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग) में कार्यरत पंप ड्राइवर और प्लंबर जैसे पदों के समान हैं। ऐसे में उन्हें भी समान वेतनमान दिया जाना चाहिए। 1969 के समझौते का उल्लंघन माना हाईकोर्ट ने 13 मई 1969 को हुए मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें साफ तौर पर तय किया गया था कि कैंट बोर्ड कर्मचारियों को राज्य सरकार के समान पदों के बराबर वेतन और भत्ते दिए जाएंगे। इसके बावजूद संशोधित वेतनमान लागू नहीं किया गया, जो नियमों के खिलाफ है। अदालत ने कैंटोनमेंट बोर्ड के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक मॉडल नियोक्ता होने के नाते बोर्ड का आचरण मनमाना और अनुचित रहा है। कर्मचारियों को भरोसा दिलाकर याचिका वापस करवा लेना और फिर लाभ न देना, विश्वासघात और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। एरियर 3 महीने में तय करने के आदेश हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं को उनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से संशोधित वेतनमान दिया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि तीन महीने के भीतर एरियर की गणना की जाए और इसके बाद एक महीने के अंदर पूरी राशि का भुगतान किया जाए। अदालत ने साफ किया कि याचिकाकर्ताओं को 12 अक्टूबर 2022 से भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी मिलेगा। हाईकोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर कैंटोनमेंट बोर्ड ने आदेशों का पालन नहीं किया, तो याचिकाकर्ता अवमानना याचिका दायर कर सकते हैं।

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