हाईकोर्ट ने ई-रिक्शा पंजीकरण की शर्त रद्द की:लखनऊ का स्थायी निवासी होने की अनिवार्यता मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

📅 Published: November 28, 2025 | 📂 Category: Uncategorized

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राजधानी में ई-रिक्शा के पंजीकरण के लिए लखनऊ का स्थानीय निवासी होने की अनिवार्य शर्त को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि ऐसी शर्त समानता, व्यवसाय की स्वतंत्रता और जीवन के मौलिक अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने अजीत यादव की याचिका सहित चार याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई के बाद पारित किया। याचिकाओं में बताया गया था कि 5 फरवरी 2025 को सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, प्रशासन, लखनऊ ने एक आदेश जारी कर ई-रिक्शा के पंजीकरण पर दो प्रतिबंध लगाए थे। इनमें पहला यह था कि जिस व्यक्ति के पास पहले से ई-रिक्शा का पंजीकरण है, उसे नए रिक्शे का पंजीकरण नहीं मिलेगा। दूसरा प्रतिबंध यह था कि लखनऊ में स्थायी तौर पर निवास करने वाले व्यक्ति को ही नए ई-रिक्शा का पंजीकरण मिलेगा। याचिकाओं में लखनऊ में स्थायी निवास संबंधी दूसरी शर्त को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार ने याचिकाओं पर जवाब देते हुए कहा कि लखनऊ में किराए पर रहने वाले ई-रिक्शा मालिकों को फिटनेस की समाप्ति आदि के संबंध में नोटिस देने में कठिनाई होती है। उनका पता बदलने पर उन्हें तलाशना मुश्किल हो जाता है। न्यायालय इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और इसे किराए पर रहने वाले व्यक्तियों को पंजीकरण से वंचित रखने का उचित आधार नहीं माना। न्यायालय ने टिप्पणी की कि ई-रिक्शा की संख्या को नियंत्रित करने के अन्य तरीके हो सकते हैं, जैसे एक वर्ष में निश्चित संख्या में ही पंजीकरण करना या वैध फिटनेस सर्टिफिकेट न रखने वाले ई-रिक्शों को जब्त करना। हालांकि, लखनऊ में स्थायी निवास न होने के आधार पर पंजीकरण से इनकार करना मनमाना है।

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