प्रतापगढ़ जिले के 35 निजी स्वास्थ्य संस्थानों में बायो मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन की उचित व्यवस्था नहीं पाई गई है। इस लापरवाही के सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने सभी संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। डिप्टी सीएमओ और अपर शोध अधिकारी द्वारा जिलेभर में किए गए सप्ताहभर के निरीक्षण के दौरान यह अनियमितता सामने आई। निरीक्षण के दौरान इन संस्थानों द्वारा बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन से संबंधित कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए। यह संस्थान सदर क्षेत्र के साथ-साथ कुंडा, पट्टी, लालगंज और रानीगंज तहसील क्षेत्रों में संचालित नर्सिंगहोम, पॉली क्लीनिक, पैथोलॉजी जांच केंद्र और अन्य स्वास्थ्य संस्थान शामिल हैं। बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन का अर्थ अस्पतालों, क्लीनिकों और प्रयोगशालाओं से निकलने वाले संक्रामक कचरे (जैसे सुई, शरीर के अंग, पट्टियां) को वैज्ञानिक तरीके से अलग करना, संग्रहीत करना, परिवहन करना और नष्ट करना है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, शहर के कुछ निजी अस्पतालों से ऐसे कचरे को एकत्रित करने के लिए लखनऊ और प्रयागराज से विशेष वैनें प्रतिदिन आती हैं। सीएमओ कार्यालय के शोध विभाग ने सभी 35 संस्थानों को नोटिस भेजकर 15 दिन के भीतर जवाब देने को कहा है। निर्धारित समय में जवाब न मिलने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
35 निजी स्वास्थ्य संस्थानों में बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन नहीं:प्रतापगढ़ में सीएमओ ने नोटिस जारी कर 15 दिन में मांगा जवाब
📅 Published: February 11, 2026 |
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