6 महीने बाद भी पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ‘बेघर’:अफसर बोले- बंगला रेनोवेट करा रहे, मंत्री ने कहा- अभी बंगला अलॉट नहीं, वे पसंद तो करें

📅 Published: January 27, 2026 | 📂 Category: Uncategorized

21 जुलाई 2025 को जगदीप धनखड़ ने अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। पद छोड़ने की वजह को लेकर सवाल उठे। इसके 42 दिन बाद सितंबर में धनखड़ ने सरकारी बंगला भी छोड़ दिया। नए बंगले के लिए हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री को एप्लिकेशन भेजी गई। ये सब प्रोटोकॉल के मुताबिक हुआ। इस्तीफा हुए 6 महीने और एप्लिकेशन दिए 5 महीने गुजर चुके हैं, लेकिन पूर्व उपराष्ट्रपति अब भी एक निजी फार्म हाउस में रह रहे हैं। बंगला मिलने में देरी होने पर धनखड़ के करीबी कहते हैं, ‘सितंबर में बताया गया था कि उनके नाम से बंगला अलॉट हो गया है। मरम्मत में करीब 3 महीने लगेंगे। नवंबर और फिर जनवरी में बंगले का स्टेटस पूछा गया तो फिर मरम्मत की बात कही गई।’ दैनिक भास्कर ने देरी की वजह जानने के लिए विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन जवाब नहीं मिला। लिहाजा हमने हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री में राज्य मंत्री तोखन साहू से कॉन्टैक्ट किया। उनसे जवाब मिला- ‘बंगला अभी अलॉट ही नहीं हुआ। जैसे ही पूर्व उपराष्ट्रपति पसंद करेंगे, फौरन अलॉट कर दिया जाएगा।’ दोनों पक्षों की बातें और दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग मिले। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर सच कौन बोल रहा है। राज्य मंत्री तोखन साहू या वो अधिकारी, जो धनखड़ को बंगले के मरम्मत की बात कह रहे हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने अपने सोर्सेज के जरिए पूरा मामला समझा। अफसरों ने 5 महीने में 3-4 बार कहा- मकान की मरम्मत होते ही हैंडओवर करेंगे
सबसे पहले हमने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के एक करीबी सोर्स से बात कर बंगले का स्टेटस जाना। सोर्स ने बताया, ‘सरकारी बंगला छोड़ने के बाद सितंबर के तीसरे हफ्ते में धनखड़ को संबंधित मिनिस्ट्री के अफसरों ने भरोसा दिया था कि बंगला रेनोवेट किया जा रहा है। नवंबर तक हैंडओवर करने की पूरी उम्मीद है।’ नवंबर में भी बंगला नहीं मिला। न ही ये पता चला कि रेनोवेशन में कितना वक्त और लगेगा। तब विभाग में एक-दो बार फिर पूछताछ की गई। इस बार भी पहले वाला ही जवाब मिला कि बंगले की मरम्मत की जा रही है। सोर्स ने आगे बताया, ‘मेरी एक हफ्ते पहले धनखड़ जी से मुलाकात हुई थी। तब पता चला था कि 10-11 जनवरी को उन्होंने संबंधित अधिकारी को फिर फोन कराया था। वही जवाब मिला, जो पहले 2-3 बार मिल चुका है। उनसे कहा गया कि मकान की मरम्मत चल रही है। बंगला लंबे वक्त से खाली था। इसलिए ज्यादा वक्त लग रहा है। उम्मीद है जल्द ही बंगला सौंप दिया जाएगा।’ बंगला नंबर-34 अलॉट होने का पता चला
चार महीने पहले हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के एक ऑफिशियल सोर्स ने बताया था कि एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर मौजूद 34 नंबर बंगला पूर्व उपराष्ट्रपति को अलॉट करने की प्रोसेस चल रही है। इसके बाद मीडिया में कई खबरें आईं कि बंगला अलॉट किया जा चुका है। धनखड़ के करीबी सोर्सेज ने भी इसे कंफर्म किया। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सितंबर, 2025 से हरियाणा की इनेलो पार्टी के प्रमुख अभय चौटाला के फार्म हाउस में रह रहे हैं। ये दिल्ली के छतरपुर में मौजूद है। सरकारी बंगला मिले बिना धनखड़ के ऐसे निजी फार्महाउस में शिफ्ट होने पर सवाल भी उठे। अभय चौटाला से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘जगदीप धनखड़ के साथ हमारे घरेलू संबंध हैं। उनके साथ जो हुआ, वो ठीक नहीं है। मैं उस विवाद पर कुछ नहीं कहूंगा। रही बात फार्महाउस की तो समझिए ये मेरा नहीं, उन्हीं का है। वे जब तक चाहेंगे, यहां रहेंगे।’ हालांकि इन सबके बीच धनखड़ की इस्तीफे के वक्त साधी गई चुप्पी सरकारी आवास खाली करने और निजी फार्म हाउस में शिफ्ट होने के बाद भी नहीं टूटी। बंगला नंबर 34 में कोई मरम्मत नहीं हो रही
दैनिक भास्कर की टीम पूर्व उपराष्ट्रपति को अलॉट बताए जा रहे बंगला नंबर 34 पर पहुंची। दिल्ली में ये टाइप-8 बंगला बिल्कुल वीरान पड़ा है। इसे देखकर साफ अंदाजा होता है कि यहां सालों से कोई नहीं आया। यहां न साफ-सफाई हुई और न ही मरम्मत। हम बाहर से जितना देख सकते थे, उतना देखने की कोशिश की। वहां न कोई लेबर नजर आया और न मिस्त्री दिखा। इससे ये तो साफ था कि बंगले की मरम्मत नहीं चल रही है। इसे कंफर्म करने के लिए हमने गार्ड से भी बात की। हमने पूछा कि क्या ये बंगला अलॉट हो चुका है। गार्ड ने जवाब दिया- ‘नहीं, अगर अलॉट होता तो हमें पता चल जाता। अभी तो लोग इसे देखने ही आ रहे हैं।‘ इसकी मरम्मत हुई थी क्या या फिर मरम्मत का कोई ऑर्डर आया हो? जवाब मिला- ‘नहीं, अगर मरम्मत का हाल-फिलहाल में कोई प्लान होता, तो हमें सूचना मिल गई होती, लेकिन ऐसी कोई सूचना नहीं है।‘ क्या धनखड़ ने बंगला से मिलने से पहले दबाव में छोड़ा सरकारी घर
हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री के ऑफिशियल सोर्स ने बताया, ‘21-22 अगस्त को धनखड़ की तरफ से डिपार्टमेंट को बंगले के लिए एप्लिकेशन मिल गई थी। पहले चर्चा हुई कि वो सरकारी बंगला मिलने के बाद ही मौजूदा सरकारी घर छोड़ेंगे। हालांकि उन्होंने सितंबर 2025 में नया ठिकाना मिले बिना ही बंगला छोड़ दिया।‘ इस बारे में पूछने पर धनखड़ के करीबी सोर्स बताते हैं, ‘उन्हें कहा गया कि नया सरकारी बंगला मिलने में कम से कम 3 महीने लगेंगे। इसलिए वो उपराष्ट्रपति का आवास छोड़कर फार्म हाउस में शिफ्ट हो गए।’ क्या उन पर सरकारी घर छोड़ने का दवाब था? सोर्स कहते हैं, इस पर उनसे मेरी ज्यादा बात नहीं हुई, लेकिन कोई दबाव तो रहा होगा। इसीलिए बिना सरकारी घर मिले ही उन्होंने पुराना बंगला छोड़ दिया। अफसरों से जवाब नहीं मिला, मंत्री बोले- धनखड़ पसंद करें, फौरन अलॉट होगा
दैनिक भास्कर की टीम ने हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की। सोर्स ने बताया था कि विभाग के मौजूदा सचिव को बंगले के लिए एप्लिकेशन दी गई है। हमने सचिव श्री कटिकिथाला श्रीनिवास से कई बार कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद मिला। इसके बाद हमने विभाग के जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन (GPRA) डायरेक्टर ऑफ स्टेट संदीप कुल्हाड़िया और मानिकचंद्र सोनोवाल से संपर्क करने की कोशिश की। यहां भी हमारी कॉल नहीं उठी। इसके बाद हमने विभाग के राज्य मंत्री तोखन साहू से संपर्क किया। पूर्व उपराष्ट्रपति के बंगले के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया, ‘अभी इस मसले पर जानकारी नहीं है। अधिकारियों से अपडेट लेकर बता पाऊंगा।’ दो दिन बाद हमने उनसे दोबारा बात की, तब मंत्री ने कहा, ‘सरकारी बंगला पूर्व उपराष्ट्रपति का हक है। वो तो मिलेगा ही। बस उन्हें कोई बंगला पसंद आ जाए। प्रोसेस चालू है। जैसे ही धनखड़ कोई बंगला पसंद करेंगे। विभाग फौरन उसे अलॉट कर देगा।’ तो क्या अब तक बंगला अलॉट नहीं हुआ है? जवाब मिला, ‘नहीं, बंगला तो तब अलॉट होगा, जब धनखड़ जी पसंद करेंगे।’ हमें तो पता चला था कि बंगला अलॉट हो चुका है? मंत्री कहते हैं, ‘नहीं, मुझे जो जानकारी मिली, मैंने वो आपको बता दी। बाकी इसके बारे में और पूछताछ कर लूंगा।’ किसी पूर्व उपराष्ट्रपति को आवास मिलने में पहले इतनी देरी नहीं हुई
विभाग के एक सोर्स से हमने पूछा कि क्या इससे पहले भी किसी पूर्व उप राष्ट्रपति को बंगले के लिए 5-6 महीने इंतजार करना पड़ा? जवाब मिला, ‘इससे पहले के दो पूर्व उपराष्ट्रपति का रिकॉर्ड देखें, तो मुझे अच्छे से याद है, दोनों को एक-दो महीने के अंदर बंगला मिल गया था। उनसे पहले के पूर्व उप राष्ट्रपतियों को भी प्रोटोकॉल के मुताबिक जल्द बंगले मिल गए थे।‘ फिर इन्हें बंगला मिलने में देरी क्यों हो रही है। क्या वाकई धनखड़ को कोई बंगला पसंद नहीं आ रहा? जवाब मिला, ‘ये मामला बहुत सेंसिटिव है। कोई जानकारी लीक हुई, तो बवाल हो जाएगा। विभाग को सख्ती के साथ मना किया गया है कि किसी को भी इस मामले में जानकारी न दी जाए।’ वेंकैया नायडू के रिटायर होते ही अलॉट हो गया था बंगला
पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त 2022 को खत्म हुआ। सोर्स के मुताबिक, नायडू के लिए रिटायरमेंट के कुछ दिन पहले बंगला तय कर लिया गया था। रेनोवेशन की वजह से वो 20 अक्टूबर, 2022 में शिफ्ट हुए थे। 20 अक्टूबर 2022 को उन्होंने ट्वीट कर बताया भी था कि वे नए सरकारी बंगले में शिफ्ट हो चुके हैं। नायडू से पहले पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का दूसरा और अंतिम कार्यकाल 10 अगस्त 2017 को खत्म हुआ। अंसारी 11 अगस्त 2007 से 10 अगस्त 2017 तक 10 साल पद पर रहे। उनका भी रिटायरमेंट के बाद सरकारी बंगले में शिफ्ट होने को लेकर कोई देरी या विवाद नहीं मिलता। सोर्स के मुताबिक, वो भी रिटायरमेंट के 3-4 दिन बाद ही जनपथ स्थित एक बंगले में शिफ्ट हो गए थे। पूर्व उपराष्ट्रपति ने नहीं ली सरकारी शेफ की सुविधा
धनखड़ के करीबी सोर्स बताते हैं, ‘उन्हें सरकारी बंगले के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। प्रोटोकॉल के मुताबिक पूर्व उपराष्ट्रपति को स्टाफ शिफ्ट होते ही मिल गया था। हालांकि उन्होंने शेफ की सुविधा नहीं ली है। किचन में वो अपना निजी स्टाफ इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें बाकी सिक्योरिटी गार्ड, साफ सफाई, गार्डनर और अधिकारी समेत सब कुछ मिला है। प्रोटोकॉल के मुताबिक, गाड़ियां और रेगुलर मेडिकल स्टाफ भी है। हमने पूछा कि किचन का स्टाफ न लेने की क्या कोई खास वजह है? जवाब मिला- ‘नहीं, कोई खास वजह तो नहीं लगती। शायद उन्हें फार्म हाउस का शेफ ज्यादा पसंद आया होगा।‘
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